जनवाणी संवाददाता |
मेरठ/मोदीपुरम: एनएच-58 स्थित सिवाया टोल प्लाजा पर शनिवार को कृषि विधेयक के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने टोल प्लाजा को फ्री कराया। इसके बाद यूनियन के कार्यकर्ता धरना देकर बैठ गए। कार्यक र्ताओं ने सुबह 11 बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक धरना दिया। इसके बाद अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम सरधना को ज्ञापन सौंपा।
जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। उधर, टोल फ्री होने से लाखों रुपये का टोलवे कंपनी को फटका लगा। केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि विधेयकों के विरोध में किसानों द्वारा धरना दे रखा है। शनिवार को देश भर के टोल फ्री कराने का किसानों ने ऐलान किया था।
जिसके बाद भाकियू के कार्यकर्ताओं द्वारा टोल प्लाजा को सुबह 11 बजे फ्री कराकर धरना दे दिया। धरने में भाकियू के अलावा विभिन्न किसानों के संगठनों के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोेग भी पहुंचे। किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम सरधना अमित कुमार भारतीय को ज्ञापन दिया गया।
जिसके बाद भाकियू ने अपना धरना समाप्त किया। इस दौरान संजय दौरालिया, रविंद्र दौरालिया, पवन प्रधान, नरेश चौधरी, मनोज, तेजपाल सिंह, ललित, जितेंद्र, प्रवीन बड़कली, मदन, उपेंद्र प्रधान, दिनेश प्रधान आदि मौजूद रहे।

पुलिस की रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
किसानों द्वारा टोलवे को फ्री कराने की बात कही गई थी। जिसके बाद किसानों ने शनिवार को टोल फ्री कराए। किसानों के इस आह्वान के बाद टोल पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे। पुलिस के अलावा पीएसी बल भी मुस्तैदी के साथ टोल पर तैनात रहा।
सपाइयों ने भी दिया समर्थन
सपा नेता पवन गुर्जर ने भी किसानों के बीच पहुंचकर किसानों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इसके अलावा राजकुमार देदवा ने भी किसानों को अपना समर्थन दिया।
आल इंडिया लॉयर्स पहुंचे किसानों के समर्थन में
आल इंडिया लायर्स यूनियन मेरठ इकाई के अध्यक्ष अब्दुल जब्बार खान ने बताया कि उनकी यूनियन के अधिवक्ता शनिवार को किसानों को समर्थन मे गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पहुंचे। अधिवक्ताओं ने एक सुर में ये बात कही कि केंद्र सरकार को अपने तीनों किसान विरोधी कानून वापस लेने चाहिए साथ ही आंदोलनकारी किसानों को कहा यदि उन्हें किसी भी विधिक सहायता की आवश्यकता पड़ती है तो आल इंडिया लॉयर्स यूनियन उन्हें यह सहायता नि:शुल्क प्रदान करेगी साथ जाने वालों में ब्रजवीर मलिक, मुनेश त्यागी, ज्ञान प्रकाश सलोनिया, रंजना चौधरी, देवेंद्र चौधरी, सत्येंद्र चौधरी, श्याम सिंह, जसोदा यादव, धर्मसिंह सत्याल, वीरेंद्र सिंह, सचिन शर्मा, आशीष चौरसिया, उर्वशी सिंह, आफाक खान, आजम जमीर, कय्यूम अली, अशफाक अहमद, कमलदीप, ललित यादव, मोनिका गौर, प्रीति रानी, हिमानी राजपूत, पारुल रस्तोगी आदि अधिवक्ता शामिल रहे।
पुलिस ने कांग्रेस नेता को हिरासत में लिया
रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का क्रांतिधरा पर आगमन है। उनका किसान व विपक्षी दलों के नेता काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन नहीं कर दे, इससे पहले ही पुलिस-प्रशासन ने नेताओं व किसानों की धरपकड़ शुरू कर दी है। शनिवार की शाम को पुलिस ने कांग्रेस नेता रोहित गुर्जर समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। कहा कि ये लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को काले झंडे दिखा सकते हैं। ऐतिहात के तौर पर इन्हें पुलिस हिरासत में लिया गया है। रविवार को जब मुख्यमंत्री की लखनऊ के लिए वापसी हो जाएगी, तब इन्हें रिहा किया जाएगा।
दरअसल, किसान भी आंदोलित है। ऐसे में किसान कोई बवाल नहीं कर दे, इससे पहले ही पुलिस-प्रशासन ने पूरी तैयारी की है। किसानों व विपक्षी दलों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के किसी कार्यक्रम में फटकने नहीं दिया जाएगा। इसकी पूरी तैयारी पुलिस ने की है। इसी परिपेक्ष्य में शनिवार की रात में उत्तर प्रदेश कांग्रेस सेवादल के प्रदेश सचिव व पीसीसी सदस्य रोहित गुर्जर को उसके घर से पुलिस उठाकर खरखौदा थाने ले गई।
उन्हें रातभर थाने में ही रखा जाएगा। रोहित गुर्जर के काजीपुर गांव में पुलिस पहुंची तथा हिरासत में लेकर थाने ले गई। रोहित गुर्जर ने पत्रकारों से फोन पर बातचीत में कहा कि पुलिस-प्रशासन की तानाशाही चल रही है। आम जन व किसानों की आवाज उठाना भी अब कानूनी अपराध की श्रेणी में आ गया है। जो भी आवाज उठाने की कोशिश करता है उसे पुलिस उठाकर थाने ले आती है, इस तरह से मानचिक यातनाएं दी जाती है। यह लोकतंत्र की हत्या है। जनपद के तमाम थानों को विरोध करने वाले नेताओं व किसानों को हिरासत में लेने के लिए कहा गया है।

जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष घर में ही नजरबंद
किसान आंदोलन के क्रम में टोल फ्री करने के ऐलान के मद्देनजर समर्थन देने का एलान करने वाले कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला व शहर अध्यक्ष जाहिद अंसारी को पुलिस ने घर में ही नजरबंद कर लिया। वहीं, दूसरी ओर यदि मेरठी कांग्रेसियों की किसान आंदोलन को लेकर बात की जाए तो प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष अजय लल्लू सरीखा जज्बा व दमखम नजर नहीं आया।
इस सप्ताह में ये दूसरा वाक्या है जब कांग्रेसी नेताओं को नजरबंद किया गया है पूरा घटनाक्रम देखकर ऐसा लगता है कि वो मानों पुलिस की ओर से नजरबंद किए जाने का इंतजार ही कर रहे हों। क्योंकि दोनों ही बार किसी प्रकार का प्रतिरोध नहीं किया गया। हालांकि इससे पूर्व जब जिला व शहर कांग्रेस के अध्यक्ष नजर बंद किए गए थे तो संगठन के पुराने व खांटी कहे जाने वाले पंड़ित नवनीत नागर सरीखे कांग्रेसियों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल कमिश्नरी पर प्रदर्शन किया बल्कि किसान आंदोलन को समर्थन करते हुए गिरफ्तारियां भी दीं।
यदि दूसरे विपक्षी दलों की बात की जाए तो उसके नेता किसान आंदोलन के समर्थन का ऐलान करने के बाद सबसे पहला काम अंडर ग्राउंड होने का करते हैं ताकि पुलिस के हाथ उन तक न पहुंच सकें। इतना ही नहीं अपनी घोषणा के अनुसार कहीं न कहीं मजबूत विरोध प्रदर्शन भी कर देते हैं, जबकि कांग्रेसियों का रवैया आमतौर पर मानों नजरबंदी के लिए पुलिस वालों का इंतजार करने सरीखा नजर आता है। कांग्रेसियों के अलावा प्रसप व आम आदमी पार्टी के जिन नेताओं ने टोल प्लाजा जाने का ऐलान किया था, उन्हें भी बुलाकर थाने में बैठा लिया गया।

