यूरिया खाद का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया नहीं मिल रहा हैं। यूरिया खाद लेने के लिए हाय-तौबा मची हुई हैं। आला अफसर भी गहरी नींद में हैं। अब किसान से फर्द लेकर उसको पांच बीघा जमीन पर सिर्फ एक यूरिया का बोरा दिया जा रहा हैं, जो पांच बीघा जमीन के लिए एक बोरा अपर्याप्त हैं। इसको लेकर सोसायटी के गोदाम पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया हैं। किसान परेशान हैं, लेकिन इस समस्या का कोई सामाधन नहीं निकल रहा हैं। कहा जा रहा है कि यूरिया पीछे से ही शॉट चल रहा हैं, जिसके चलते यूरिया की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं की जा रही हैं, जिसके चलते किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रहा हैं। अब किसान बवाल भी कर रहे हैं, इससे गोदाम पर ड्यूटी देने वाले कर्मचारी भी भयभीत है कि कहीं उनके साथ किसान मारपीट नहीं कर दें। यूरिया खाद संकट से उभरने के लिए कोई प्रयास अभी नहीं किये जा रहे हैं।
- किठौर, फतेहपुर नारायण, बोंद्रा, महमूदपुर गढ़ी स्थित सहकारी समितियों पर यूरिया का टोटा
- कर्मचारियों पर रसूखदारों को यूरिया बांटने का आरोप, बबार्दी के कगार पर किसान
जनवाणी संवाददाता |
किठौर: किसान की आय दोगुनी करने के वादे के साथ सत्ता में लौटीं केंद्र व प्रदेश की सरकारें उसको यूरिया और डीएपी तक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं करा पा रहीं हैं। नतीजा किसान यूरिया की समस्या से जूझ रहा है। गन्ना, धान व चारे की फसलों के लिए यूरिया नहीं मिलने से उत्पादन कमी की प्रबल संभावना है। जिससे किसान की आय घटेगी और वह बबार्दी के कगार पर पहुंच जाएगा।
केंद्र और प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार ने चुनावी समर में किसानों से भारी-भरकम वायदों के साथ वोट लिया था। वादा था कि किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर लोन, बिजली बिल हॉफ, खाद-बीज पर सब्सिडी के साथ वक्त पर गन्ना भुगतान। मिल द्वारा देरी पर ब्याज सहित भुगतान कराया जाएगा। यानि किसान की आय दोगुनी की जाएगी, लेकिन वास्तविकता ये है कि किसानों की एकगुनी आय भी खतरे में पड़ी हुई है।
वजह गन्ना, धान, चारे की फसल में डीएपी और यूरिया डालने का वक्त चल रहा है। सहकारी समितियों पर यूरिया, डीएपी है नहीं। एकाध गाड़ी आती भी है तो समिति के कर्मचारी रसूखदारों को अधिक मुनाफे पर उसको बेच देते हैं। नाममात्र के किसानों को सशर्त दूसरे प्रोडक्ट्स सागरिका, नैनो यूरिया, दूसरे जाइम्स के साथ थोड़ा-बहुत यूरिया दिया जाता है। शनिवार को जनवाणी टीम ने पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए।
शाहीपुर निवासी किसान हरजीत सिंह ने बताया कि सहकारी समिति महमूदपुर गढ़ी से यूरिया लेते हैं। 50 एकड़ गन्ना है, लेकिन 10 बैग यूरिया मिला है। समिति कर्मियों ने 10 नैनो यूरिया थमा दिए। नैनो यूरिया उन्हें एक बैग 510 रुपये का पड़ा। जबकि बैग का निर्धारित मूल्य 266 रुपये है।
छुछाई निवासी किसान जगबीर उर्फ गुड्डू का कहना है कि काफी दौड़धूप के बाद भी यूरिया हाथ नहीं आ रहा है। समिति गांव से दूर है। गाड़ी आते ही बेट जाती है। समिति कर्मचारी सेटिंग कर रसूखदारों को टालियां भरवा देते हैं। पिछली बार 14 बैग मिले थे। जरूरत 70 बैगों की है। साथ में जबरन दिया जा रहा नैनों यूरिया भी विश्वसनीय नहीं। ऐसे में फसल उत्पादन को लेकर किसान परेशान है।
बागवाला निवासी किसान जगमाल का कहना है कि गन्ना, धान, चारा की फसल में बिल्कुल भी यूरिया नहीं पड़ा है। जबकि यूरिया का भरपूर मौसम है, लेकिन समिति कर्मी यूरिया रसूखदारों को देते हैं। उन्हें 40 बैगों की जरूरत थी। समिति कर्मचारी पांच बैग देने लगे। उसमें भी हजारों रुपये के एंजाइम्स साथ में लगा रहे थे इसलिए वह नहीं लाए।
किठौर निवासी किसान सलीम अहमद का कहना है कि यूरिया की भारी किल्लत चल रही है। गाड़ी आते ही तमाम यूरिया खत्म हो जाता है। पर्याप्त यूरिया, डीएपी नहीं मिलने से फसल उत्पादन घटने के प्रबल आसार हैं।
नदल्लीपुर निवासी बाबूराम ने बताया कि उन्हें दो माह पूर्व यूरिया के 25 बैग मिले थे, लेकिन सब डल गए अब 100 बैगों की जरूरत है, लेकिन यूरिया हाथ नहीं आ रहा। ऐसे में तो फसलें तबाह होकर किसान बर्बाद हो जाएगा।

