- एक युवक की हो चुकी दर्दनाक मौत, दो का चल रहा उपचार
- रात ठेकेदार के निर्दोष साबित होने के बाद असली गुनहगारों के खिलाफ नहीं हुई कोई कार्यवाही
जनवाणी संवाददाता |
भोपा: चोली गंग नहर किनारे पर पड़ी रात में झुलसे युवकों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। झुलसे तीन युवको में से एक की मौत हो चुकी है। इस मामले में दोषी बनाए गए राख ठेकेदार जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद अभी तक पुलिस द्वारा असली दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है जांच में साबित हो गया था कि राख में केमिकल होने के कारण यह राख खतरनाक बन गई थी।
भोपा थाना क्षेत्र के नंगला बुजुर्ग गांव के पास नहर पटरी पर केमिकल युक्त राख में तीन युवकों के झुलस जाने और बुरी तरह झुलसे एक युवक की मौत के बाद कैमिकल युक्त राख का यह प्रकरण बीते दिनों सुर्खियों में रहा था और मामले की गूंज लखनऊ तक सुनाई दी थी। जिसके बाद पुलिस ने नंगला बुजुर्ग निवासी राख के ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच में राख ठेकेदार निर्दोष पाया गया था और ये साबित हो गया था कि राख में खतरनाक कैमिकल था। प्रदूषण विभाग ने मौके पर जाकर इस केमिकल युक्त राख को भी मौके से हटवा दिया है जिसके बाद यह प्रकरण शांत होता दिखाई दे रहा है, परन्तु इन सबके बीच केमिकल युक्त राख में झुलसे पीड़ितों को अभी भी न्याय का इंतजार है। पीडितो को अभी तक किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नही मिल पाई है।
बता दें कि भोपा थाना क्षेत्र में गंग नहर पटरी पर बकरियों के लिए चारा लेने गए एक युवक के परिवार पर 9 जुलाई का दिन मुसीबत बन कर आया था। थाना क्षेत्र के गांव नगला बुजुर्ग निवासी मोहम्मद नबी पुत्र पर्वश 26 वर्ष बकरीद के त्यौहार के लिए बकरे खरीद कर लाया था बकरीद से एक दिन पहले वह अपने साथी शादाब के साथ बकरों के लिए चारा लेने के लिए गंग नहर पटरी पर स्थित जंगल में गया था। दोनों दोस्त चारा काटने के बाद वापिस गांव की ओर लौट रहे थे। मोहम्मद नबी खेत में से निकल कर राख के बड़े ढेर पर चढ़कर बाहर निकलने का प्रयास करने लगा, जैसे ही काली राख के ढेर पर चढ़ा वैसे ही केमिकल युक्त राख की चपेट में आ गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया था। उसके परिजन आनन-फानन में मो नबी को लेकर ककरौली थाना क्षेत्र के गांव गंगदासपुर में पहुंचे, परंतु वहां चिकित्सक ने बुरी तरह झुलसे युवक को मुजफ्फरनगर ले जाने की सलाह दी थी। परिजन झुलसे युवक को लेकर मुजफ्फरनगर अस्पताल में पहुंचे, परंतु युवक की हालत गंभीर देखते हुए उसे मेरठ रेफर कर दिया गया था। लगभग 3 सप्ताह बाद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी थी। इस प्रकरण के मात्र सोलह दिन बाद उसी स्थान पर लकड़ी लेने के लिए गए सिखेड़ा थानाक्षेत्र के गांव भिक्की निवासी सैफ अली व उसका चाचा मोमिन भी इस कैमिकल युक्त राख की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद हरकत में आई भोपा पुलिस ने मुकदमे के आधार पर काली राख के ठेकेदार इरफान उर्फ भूरा को जेल भेज दिया था।

विधायक चंदन चौहान ने दिलाया था मदद का भरोसा
मोहम्मद नबी की उपचार के दर्दनाक मौत के बाद 30 जुलाई को भोपा कोतवाल बिजेंद्र सिंह रावत ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर पीड़ितों को कड़ी कानूनी कार्यवाही का भरोसा दिलाया था। उसके बाद बीते 1 अगस्त को मीरापुर विधानसभा के विधायक चंदन चौहान ने मृतक युवक के परिजनों से मिलकर उन्हें न्याय व आर्थिक मदद का वादा किया था। केमिकल युक्त राख में तीन लोगों के झुलसने और एक झुलसे युवक की मौत के बाद इस प्रकरण की गूंज लखनऊ तक सुनाई दी थी, जिसके बाद सत्ता पक्ष के जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर वीरपाल निर्वाल ने 2 अगस्त को घटनास्थल पर जाकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाते हुए मामले में कड़ी कार्यवाही के संकेत दिए थे। विधायक चंदन चौहान के पीड़ितों से मुलाकात के बाद मृतक युवक के परिजनों को आर्थिक मदद की आस जगी थी परन्तु अभी तक पीड़ितों को कोई आर्थिक मदद नही मिल पाई है।
पीड़ितों को आर्थिक सहायता की दरकार, भीख मांगकर करवा रहे घायलों को इलाज
कैमिकलयुक्त राख की चपेट में आये मोहम्मद नबी की दर्दनाक मौत के बाद पूरा परिवार शोकग्रस्त है। मृतक के भाई नौशाद, शमशाद, इरशाद, सावेज व शहजाद मजदूरी आदि कर अपने परिवार का पेट पाल रहे है। मृतक की मां इमराना को कम दिखाई देता है, वही बहन महराना शादी की दहलीज पर खड़ी है। मृतक के भाई शमशाद ने बताया कि उसके भाई की मौत के बाद वादे तो बहुत हुए पर आज तक उन्हें किसी तरह की कोई आर्थिक मदद नही मिल पाई है, वही दूसरी और कैमिकल युक्त राख में बुरी तरह झुलसने से घायल हुए सैफ़ अली व उसके चाचा मोमीन का उपचार चल रहा है। मोमीन के पिता मुन्ना ने बताया कि दोनों के इलाज में अब तक लाखो रुपये खर्च हो चुके है, अब उनके पास दोनों के इलाज के लिए पैसा खत्म हो चुका है। प्रत्येक सप्ताह दो बार दोनों घायलों को पट्टी कराने के लिए गंगदासपुर ले जाना पड़ता है, जिसमे लगभग तीन हजार रुपये खर्च हो जाते है। उम्र के इस पड़ाव में भीख मांगकर किसी तरह पैसों को इंतजाम कर वह बुरी तरह झुलसे पुत्र और पौत्र के इलाज के लिए पैसे जुटा पाते है। अगर किसी प्रकार की आर्थिक सहायता मिल जाती तो वह दोनों का बेहतर इलाज करा पाते। वही दूसरी और बुरी तरह झुलसे मोमीन की मां सफीकन व पत्नी समीना और सैफ की पत्नी शमा दोनों की हालत देखकर बार बार फफक पड़ती है

