- छह अभियंता कठघरे में, सभी से हुई पूछताछ
- मई में तीन दिनों तक हो चुकी है छह अभियंताओं से पूछताछ
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हस्तिनापुर में गंगा पुल के क्षतिग्रस्त होने का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। इस मामले में रोज कोई न कोई नए खुलासे से विभागीय अधिकारियों से लेकर इस पुल के निर्माण से जुड़े अभियंताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश सर्तकता अधिष्ठान (विजिलेंस) के एसपी का एक पत्र मई के महीने में लोक निर्माण विभाग के कार्यालय में पहुंचा था जिसके बाद अभियंताओं में हड़कम्प मच गया था।
उत्तर प्रदेश सर्तकता अधिष्ठान मेरठ सेक्टर के पुलिस अधीक्षक का पत्र गत दिनों अधिशासी अभियन्ता (प्रांतीय खंड) के कार्यालय पहुंचा था। बताया जाता है कि पत्र में शामिल जांच वाले नामों को गोपनीय रखा गया था, लेकिन इस पत्र की कॉपी शनिवार को दैनिक जनवाणी के हाथ लग गई। इस पत्र में विजिलेंस अधिकारियों ने छह नामों का जिक्र करते हुए उन्हें पूछताछ के लिए बुला लिया था।

साथ ही पत्र में एक प्रकार से यह भी चेतावनी दे दी गई थी कि उक्त प्रकरण शासन की प्राथमिकताओं में हैं। लिहाजा अपने बयान देने में पीडब्ल्यूडी के संबधित अभियंता इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दें। यानि कि इन अभियन्ताओं को यह हिदायत रूपी संदेश दे दिया गया था कि वो पेशी में जरा भी ढिलाई न बरतें। इस पत्र के बाद उक्त अभियंता खासे परेशान हो गए थे।
पत्र में पूछताछ का कारण बताते हुए कहा गया था कि चेतावाला घाट पर सेतू के पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग व सुरक्षात्मक निर्माण कार्यों के अंतर्गत गाइड बंध के निर्माण के संबध में विलम्ब के कारणों की जांच की जा रही है। इसलिए इस प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ अभियंताओं के बयान (कथन) लिया जाना बेहद जरुरी है लिहाजा उक्त अभियंताओं को संबधित तारीख पर बयान दर्ज कराने के लिए विजिलेंस दफ्तर भेजा जाए।
इन अभियंताओं से हुई पूछताछ
अवर अभियंता राजीव कुमार व राजेश कुमार से नौ मई को पूछताछ हुई। अवर अभियंता श्रवण पाल सिंह व सहायक अभियंता महेश बालियान 11 मई मई को पूछताछ हुई जबकि अवर अभियंता साहिब खान व मुकुल कुमार से इसी वर्ष 15 मई को पूछताछ हुई थी। यह जांच विजिलेंस के इंस्पेक्टर संजय कुमार शर्मा के अधीन की जा रही है। इस संबध में जब संजय शर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो कई बार फोन करने के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।

