Saturday, May 16, 2026
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शाबाश प्रियंका! क्रांतिधरा को किया गौरवान्वित

  • साधारण परिवार से निकलकर बर्मिंघम में फहराया तिरंगा, पीएम और सीएम कर चुके हैं सम्मानित
  • मेहनती और सरल स्वभाव की धनी प्रियंका गोस्वामी ने किया देश का नाम रोशन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। यही कर दिखाया है मेरठ के एक बेहद साधारण परिवार में जन्म लेनें वाली प्रियंका गोस्वामी ने। उन्होंने एक हजार मीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर मेरठ समेत पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है।

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प्रियंका की इस उपलब्धि के बाद घर में जश्न का माहौल है और परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा है। कोच गौरव का कहना है कि प्रियंका की इस उपलब्धि के बाद पूरे स्टेडियम के खिलाड़ी जश्न मन रहें है। हर खिलाड़ी उसकी जीत पर खुशी जता रहा है, इससे खिलाड़ियों के हौसले और बुलंद होंगे। प्रियंका इस बार मेडल जरूर जीतेगी ऐसा उन्हें विश्वास था और उसने यह कर दिखाया।

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प्रियंका गोस्वामी कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच गौरव से प्रशिक्षण लेती है। परिजनों ने बताया कि वह बेहद मजबूत इरादों की धनी है। कभी माता पिता से कोई ख्वाहिश नहीं की। हमेशा अपने कोच की सलाह पर आगे बढ़नें का जज्बा दिल में लेकर खेलती रही है। उसके मजबूत इरादों की ही देन है कि आज प्रियंका ने पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। प्रियंका एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर इतनी बुलंदियों पर पहुंची है।

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पिता मदन गोस्वामी कुछ समय पहले तक रोडवेज में संविदा पर कंडक्टर थे, लेकिन यह नौकरी चली गई और इस समय गांव में खेती करते है जबकि मां अनिता गोस्वामी गृहिणी है, एक भाई कपिल गोस्वामी है जो नोयडा में एक निजी कंपनी में जॉब करता है। पिता ने बताया कि प्रियंका बेहद मजबूत इरादों वाली खिलाड़ी है। वह एक बार कुछ करने की ठान लेती है तो फिर उसे हासिल करनें तक उसमें लगी रहती है।

कठिन परिश्रम का परिणाम

प्रियंका के परिवार का कहना है कि वह एक मेहनती खिलाड़ी है। अपने घर से रोज 12 किमी तक स्टेडियम में प्रैक्टिस करन के लिए आना और फिर वापस जाना, इस तरह पूरे दिन में दो बार वह स्टेडियम पहुंचती है। रोजाना सुबह चार बजे उठती है और पांच बजे घर से निकलकर स्टेडियम पहुंचती है। वहां पर सुबह नौ बजे तक प्रैक्टिस करती है।

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इसके बाद घर पर अपने परिवार के साथ समय बिताती है, और फिर शाम को चार बजे फिर से स्टेडियम के लिए निकल जाती है और दिन छिपनें पर ही घर वापस पहुंचती है। प्रियंका ने अभी हाल ही में पटियाला के एक कॉलेज से बीए की परीक्षा पास की है। लेकिन उसका सारा ध्यान अपने खेल पर ही लगा रहता है।

लड्डू गोपाल की करती है पूजा

प्रियंका गोस्वामी भगवान पर अटूट विश्वास करती है, मां अनिता गोस्वामी ने बताया कि रात को सोते समय प्रियंका अपने सिरहाने लड्डू गोपाल को रखकर सोती है। सुबह उठते ही सबसे पहले उन्हीं की पूजा करती है और उसके बाद ही वह अपनी दिनचर्या शुरू करती है। हालांकि इससे पहले भी वह टोक्यों ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी है, लेकिन वहां उसे कोई मेडल नहीं मिल सका था।

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