- हिंडन (गाजियाबाद) और जेवर में एयरपोर्ट, इन पर नहीं होता नियम लागू
- लंबे समय से मेरठ की जनता को दिखाया जा रहा है एयरपोर्ट का सपना
- 150 किमी नियम, लेकिन क्रांतिधरा पर ही क्यों किया गया लागू
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एयरपोर्ट अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने स्पष्ट कर दिया है कि मेरठ, इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली के नियम 150 किमी के दायरे में आता है, इसलिए यहां पर एयरपोर्ट की अनुमति नहीं मिल सकी। बड़ा सवाल यह है कि गाजियाबाद हिंडन व जेवर में एयरपोर्ट 150 किमी के दायरे में ही बन रहे हैं।
उन्हें एयरपोर्ट अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने अनमुति दे दी, मगर मेरठ को नहीं? इस निर्णय से भाजपा के नेता भी हैरान है, लेकिन उम्मीद अभी भाजपा नेताओं ने नहीं तोड़ी हैं। 2022 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, इसमें भी एयरपोर्ट का मुद्दा उठ सकता है।
पहले जिस तरह से भाजपा नेता हवाई उड़ान का सपना दिखा रहे थे, लेकिन अब यह सपना टूटता दिख रहा है। परतापुर हवाई पट्टी का एयरपोर्ट अथॉरिटी, डीजीसीए और जूम एयरवेज कंपनी दौरा कर अपनी रिपोर्ट दे चुकी है। अब इस प्रोजेक्ट में जो पेंच 150 किमी दायरे का फंसा है।
उसे निस्तारण कराने के लिए भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बता तो कहीं है, मगर क्या मेरठ में एयरपोर्ट के मुद्दे पर केन्द्र सरकार को रजामंद कर पाएंगे। फिलहाल यह मुश्किल ही नजर आ रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी आॅफ इंडिया के जीएम अरुण मेहान, ज्वाइंट जीएम अनिल कालरा, इंदु प्रकाश, जयकुमार व डीजीसीए के इंजीनियर मोतीराम के साथ जूम एयरवेज के एक पायलट और तकनीकी की टीम रिपोर्ट दे चुके है कि परतापुर हवाई पट्टी पर जमीन पर्याप्त है, जहां पर उड़ान भरी जा सकती है।
वन विभाग व एमडीए पहले ही जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को दे चुके हैं। यदि इससे ज्यादा जमीन की आवश्यकता पड़ेगी तो उसके लिए भी प्रशासन किसानों से जमीन लेने को तैयार है। इसका नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट को बना रखा है।
दरअसल, 406 एकड़ जमीन चाहिए। इसके साथ ही विस्तारीकरण पर करीब 643 करोड़ की लागत आएगी। इस समय हवाई पट्टी की लंबाई डेढ़ किमी है, इसे बढ़ाकर तीन किमी गगोल की ओर विस्तार करना होगा। गगोल तीर्थ स्थल है और वहां मेला भी लगता है। इसलिए उस तरफ जमीन नहीं ली जा सकती। ऐसे स्थिति में दूसरी तरफ जमीन ली जा सकती है।
हालांकि वर्तमान में मौजूद जमीन पर्याप्त बतायी जा रही है। क्योंकि 20 से 25 सीटर विमान उड़ान भरने के लिए जमीन व रनवे पर्याप्त है। विस्तारीकरण के बाद यहां से 80 से 100 सीटर विमान उड़ान भर सकेंगे। केंद्र सरकार की उड़ान योजना के अंतर्गत मेरठ को भी हवाई सेवा से जोड़ने का प्लान तो लंबे समय से चल रहा है। जब भी चुनाव आते है कि हवाई उड़ान से मेरठ को जोड़ने का वादा भाजपा करने लगती है, मगर धरातल पर जब प्रोजेक्ट उतारने की कोशिश होती है तो कह दिया जाता है कि मेरठ, इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 150 किमी के अंदर आता है। इसलिए यहां पर एयरपोर्ट नहीं बनाया जा सकता। अब यह पेंच इसमें फंसा दिया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सहारनपुर व मुरादाबाद को अनुमति दे दी है। इन पर यह नियम लागू नहीं होता। यही नहीं, जेवर व हिंडन (गाजियाबाद) पर भी नियम लागू नहीं होता है, वहां एयरपोर्ट की अनुमति दे दी गई है। जल्द उडान भी शुरू हो जाएंगी। लखनऊ-मेरठ और लखनऊ-प्रयागराज के बीच हवाई उड़ान पर सहमति भी बनी थी। वन विभाग की 12 हेक्टेयर जमीन में कंचनपुर घोपला की 11.787 हेक्टेयर और गगोल वन ब्लॉक की 0.420 हेक्टयेर भूमि है, जो एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीन दे भी दी हैं, मगर एयरपोर्ट का सपना मेरठ की जनता के लिए अधूरा नजर आ रहा है। हवाई पट्टी 120 मीटर चौड़ी है। 72 सीटर विमान उड़ाने के लिए इसे 200 मीटर चौड़ा और 2600 मीटर लंबा बनाना होगा, जिसके लिए जमीन का प्रबंध भी कर दिया गया है।

