Friday, February 13, 2026
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अर्बन सीलिंग की जमीन पर खड़ी कर दी दीवार, निगम मौन

  • अभियान चलाकर बड़ी तादाद में जमीन कराई गई थी कब्जा मुक्त
  • जमीन पर लगाए थे बोर्ड, इन सब के बावजूद धड़ल्ले से चल रह अवैध निर्माण

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शासन के आदेश पर पिछले दिनों अर्बन सीलिंग की जमीन को कब्जा मुक्त करने का शहर में अभियान चला था। बड़ी तादाद में जमीन कब्जा मुक्त कराई गयी और जमीन पर बोर्ड भी लगाये गए थे। एक तरफ तो सीलिंग की जमीन को कब्जा मुक्त करने का अभियान चलाया था, लेकिन यहां रोहटा रोड पर अर्बन सीलिंग की जमीन पर शुक्रवार को कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। दीवार निकालकर इस जमीन की घेराबंदी कर दी गई। इसके बाद भी नगर निगम अफसरों की नींद नहीं टूटी। पूरा दिन निर्माण सीलिंग की जमीन पर चलता रहा। यही हाल रहा तो यहां बिल्डिंग भी बनकर तैयार हो जाएगी। शायद इसके बाद ही नगर निगम अफसरों की नींद टूटेगी।

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दरअसल, ये सीलिंग की जमीन रोहटा रोड स्थित कब्रिस्तान की जमीन से सटी हुई हैं। कब्रिस्तान के बीच से पहले सिजरा में रास्ता दर्शाया गया था। उसके साथ भी छेड़ाछाड़ की गई। रास्ता अब परिवर्तन कर दिया गया। जहां पर रास्ता नहीं था, वहां पर रास्ता दर्शा दिया गया। ये सब अर्बन सीलिंग की जमीन को कब्जाने के लिए हुआ। शुक्रवार की सुबह बड़ी तादाद में मजदूरों को लगाकर दीवार बनाई जा रही हैं। एक तरह से इस पूरी जमीन की घेराबंदी चल रही हैं। दीवार बड़ी-बड़ी करने के बाद भीतर कोई भी निर्माण किया जा सकता हैं। मेरठ विकास प्राधिकरण ने भी इस निर्माण को नहीं रुकवाया।

क्योंकि प्राधिकरण की भी इसको रोकने की जिम्मेदारी हैं। करोड़ों की इस जमीन को कुछ लोग गलत तरीके से हथियाने में लगे हुए हैं। इसी वजह से इसकी दीवार लगाकर घेराबंदी की जा रही हैं। इसके कोई दस्तावेज नहीं हैं। इसकी कई बार जांच भी हो चुकी हैं। तहसील प्रशासन भी इसमें जमीन कब्जाने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दे चुके हैं। जांच के नाम पर भी वर्तमान में खानापूर्ति नगर निगम और तहसील प्रशासन कर रहा हैं। संयुक्त टीम बनाकर इस पूरे प्रकरण की जांच कर अर्बन सीलिंग की जमीन कब्जाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी जा सकती हैं।

कब्रिस्तान की जमीन और सड़क किनारे दुकानों का निर्माण भी पहले अवैध तरीके से कर दिया गया था। इस पर पहले तो मेडा सील लगा चुकी हैं, फिर उसको गिरा दिया था। वर्तमान में उस पर किसी तरह का निर्माण तो नहीं हुआ, लेकिन उससे सटकर अर्बन सीलिंग की करोड़ों की जमीन पर दीवार बनाकर घेराबंदी की प्रक्रिया चल रही हैं। ये निर्माण रात-दिन चल रहा है, ताकि प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी जा सके।

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इससे पहले रोहटा रोड पर ही नारायण गार्डन में नगर निगम की जमीन पर कुछ लोगों ने दीवार लगाकर निर्माण कर दिया था। इस पर मकान बनाया जा रहा था। इस निर्माण को निगम ने मौके पर पहुंचकर गिरा दिया था। इस तरह से अर्बन सीलिंग की जमीन को कोई भी घेराबंदी कर जमीन कब्जाने का कार्य कर रहे हैं, जिस पर कार्रवाई करने से निगम व मेडा बच रहा हैं।

मेरठ विकास प्राधिकरण के खिलाफ सीएम से की शिकायत

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण के खिलाफ मुख्यमंत्री को मनोज चौधरी द्वारा एक शिकायती पत्र भेजा गया। जिसमें मुख्य रूप से मेरठ विकास प्राधिकरण के जोन-ए 1 के अन्तर्गत घनी आबादी एवं तंग गलियों वाले पुराने क्षेत्रों में जैसे-शहर सराफा बाजार, कागजी बाजार, उठेरवाड़ा, लाला का बाजार, नील की गली, पत्थरवालान, जत्थीवाड़ा, खैरनगर आदि में पिछले दो-तीन वर्षों से एवं वर्तमान में भी सौ, डेढ़ सौ सालों से भी अधिक प्राचीन, पुराने आवासीय भवनों कों पहले तोड़कर फिर उनके ऊपर अवैध कमर्शियल काम्प्लेक्स, दुकानों के अवैध निर्माण की आई बाढ़ एवं इससे लोगों की जान-माल के ऊपर उत्पन्न खतरों एवं शहर के बदले जा रहे भगोलिक स्वरूप को खत्म करने के प्रयासों से वर्तमान में एवं भविष्य में लोगों को होने वाली गम्भीर परेशानियों, समस्याओं के अति गम्भीर विषयों का संज्ञान लिए जाने की मांग की। पत्र में बताया कि 2022 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष रखा गया। जिसकी वर्तमान में भी उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है।

सुनवाई होने के दौरान भी अवैध निर्माणकर्ताओं द्वारा लगातार सौ, डेढ़ सौ साल से भी अधिक प्राचीन, पुराने आवासीय भवनों को तोड़कर फिर उनके ऊपर अवैध व्यवसायिक निर्माण लगातार लगातार जारी हैं। अवैध निर्माण करने वालों को उच्च न्यायालय का भी डर नहीं है और मेरठ विकास प्राधिकरण केवल दिखावटी कागजी कार्रवाई करते हुए इस खेल का चुपचाप तमाशा देख रहा है। उसका पूर्ण समर्थन अवैध निर्माणकर्ताओं को है मेरठ विकास प्राधिकरण इन अवैध निर्माकतार्ओं को क्यों संरक्षण दे रहा है, समझ से परे है। व्यवसायिक निर्माण पर कोई भी नक्शे मेरठ विकास प्राधिकरण से पास नहीं कराये जा रहे हैं। भविष्य में लोगों की जान को खतरे में डालने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। जिसके लिए मेरठ विकास प्राधिकरण लापरवाही बरत रहा है। मेरठ विकास प्राधिकरण के साथ हुए इनके अवैध गठजोड़ की भी जांच करने के आदेश पारित करने की मांग की।

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