- रोहटा रोड स्थित वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जे मामला: तहसील व निगम के अधिकारी बोले, रुकवा दिया निर्माण, धरातल पर कार्य जारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रोहटा रोड पर निगम एवं तहसील अधिकारियों के बीच नूराकुश्ती चल रही हैं। वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जे के मामले को लेकर प्रशासन की नूरा-कुश्ती का बदरंग चेहरा सामने आ रहा हैं। सरकारी दस्तावेज में कार्रवाई कर दी, लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई अफसरों ने नहीं की। सिजरे में जो रास्ता दर्ज हैं, उसे बदल दिया गया। कुछ लोगों ने अफसरों से सेटिंग कर लाभ पाने के लिए एक तरफ रास्ता तैयार कर दिया, जिस पर एक दुकान का निर्माण ट्रायल के तौर पर कर दिया गया।
इसमें विरोध हुआ तो काम रुक जाएगा, अन्यथा 32 दुकानों का निर्माण कर दिया जाएगा। कुछ वैसा ही यहां पर चल रहा हैं। जो कार्य अफसरों का है, वो भूल गए हैं तथा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपी जा रही हैं। मिलीभगत से अवैध वक्फ बोर्ड की जमीन पर अवैध निर्माण जारी है। एसडीएम एवं तहसीलदार के साथ नगर निगम के अधिकारी अवैध निर्माण को रूकवाने का दावा कर रहे हैं,
जबकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बीच-बीच में रूक-रूककर निर्माण जारी है। चर्चा है कि निगम व तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना निर्माण जारी नहीं हो सकता। फिलहाल यह निर्माण विवादों के घेरे में है। वहीं अधिकारी स्पष्ट बताने को कोई तैयार नहीं हैं,कि रोक के बाद भी अवैध निर्माण किसके आदेश पर जारी है।
रोहटा रोड पर खसरा संख्या-242/1 कब्रिस्तान का नंबर है। खसरा संख्या 242-2 रास्ते का नंबर है। इसी के बराबार में खसरा संख्या-2920 वक्फ बोर्ड का मोबाइल नंबर है। कब्रिस्तान के बराबर में ही खसरा संख्या-123 प्राईवेट व्यक्तिगत खरा नंबर है,जिसमें दुकान आदि बनी हुई हैं, जिसमें जो वहां पर रास्ता बना हुआ है। उसमें 25 फिट चोडा एवं 300 फीट लंबाई का रास्ता बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि वक्फ बोर्ड की जमीन पर कुछ लोगों के द्वारा अवैध निर्माण किया जा रहा है, जिसमें इसी बीच रास्ते एवं कब्रिस्तान की भूमि पर भी कुछ लोगों के द्वारा अवैध निर्माण कराया जा रहा है। मामले की शिकायत पर सदर तहसील के एसडीएम ओजस्वी राज एवं तहसीलदार रामेश्वर प्रसाद के साथ निगम के अधिकारियों ने अवैध निर्माण को रुकवाने की बात कही। रोक के बावजूद निर्माण अब तक हो चुका हैं। बिना अधिकारियों की मिलीभगत के रोक के बावजूद निर्माण नहीं हो सकता।
शुक्रवार को तहसीलदार रामेश्वर प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि तहसील की तरफ से निर्माण पर रोक लगाई हुई है। इसमें निगम की भूमिका अहम है, जिसमें निगम के अधिकारियों को भी संज्ञान लेना चाहिए। क्योंकि उनकी आपस में नूरा-कुश्ती चल रही हैं। ये नूरा-कुश्ती का बदरंग चेहरा सामने हैं। इसका शासन स्तर से संज्ञान लेना चाहिए। इस प्रकरण को जनप्रतिनिधि भी नहीं उठा रहे हैं, वो भी चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर इस चुप्पी के पीछे का ‘राज’ क्या हैं?
कैंट बोर्ड: नहीं दी घूस तो गिरा दी दीवार
कैंट बोर्ड के इंजीनियरों की एक परिवार ने घेराबंदी की। इस परिवार का आरोप है कि इंजीनियरों ने उनसे पांच लाख की घूस मांगी थी, नहीं देने पर मकान को तोड़ने की धमकी दी। इसी वजह से उनके मकान की दीवार पर बुलडोजर चला दिया। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा हैं, जिसमें पीड़ित परिवार पूरी कहानी बता रहा हैं। दरअसल, कैंट बोर्ड आॅफिस के समीप शैलेन्द्र सिंह का मकान हैं।
इस मकान में दो माह पहले आग लग गई थी। आग भीषण थी। मकान में जो भी सामान रखा था, वो जलकर नष्ट हो गया। दीवार व लिंटर पर भी आगजनी से प्रभाव हुआ। शैलेन्द्र सिंह का आरोप है कि आग लगने के बाद दीवार का प्लास्टर खराब हो गया था, जिसकी मरम्मत करने के लिए काम किया जा रहा था, जिसे कैंट बोर्ड के इंजीनियरों ने रुकवा दिया। काम करने के लिए पांच लाख की मांग की थी।
ये मांग पूरी नहीं की तो उनके मकान की दीवार को बुलडोजर लगाकर इंजीनियरों ने गिरा दिया। इस पूरे प्रकरण की शिकायत सीबीआई से करने की बात कही हैं, ताकि इस प्रकरण की जांच हो सके। उन्होंने बताया कि नियम ये है कि कोई भी अपने मकान की मरम्मत करा सकता हैं, लेकिन इसकी अर्जी कैंट बोर्ड में देनी होगी। इसका पत्र कैंट बोर्ड में दिया गया था। फिर भी उनको धमकाया गया और दीवार गिरा दी।
प्रकरण की जांच के लिए केन्द्रीय रक्षामंत्री को भी लिखा गया हैं, ताकि इस प्रकरण की जांच हो सके। महत्वपूर्ण बात ये है कि इसी निर्माण से दस कदम की दूरी पर आईपीएस का अवैध निर्माण हैं, जिसे आजतक नहीं गिराया गया। व्हाइट हाउस के बराबर में एक बड़ा निर्माण हुआ और लिंटर डालकर नवसृजन कर दिया गया। इसमें भी कोई ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया गया? इन मुद्दों की शिकायत की जा रही हैं, जिसमें इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

