Tuesday, March 17, 2026
- Advertisement -

वार्डों के हाल बेहाल, टूटी पड़ी सड़कें

  • भूले विकास, आपसी लड़ाई में फंसे पार्षद
  • बैठकों में चलती रही राजनीति, नहीं हुए विकास कार्य
  • 12 दिसंबर को खत्म हो रहा है निगम पार्षदों का कार्यकाल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम पार्षदों का कार्यकाल 12 दिसंबर 2022 को खत्म हो रहा है। संभावित लोगों ने अभी से चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दी है। लोग छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर अब मुखर होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि करीब छह महीने बाद ही नगर निगम का चुनाव होना है, इसका असर अब सीधे-सीधे वार्डो में दिखने लगा है।

शहर के वार्डों की बात की जाये तो यहां 90 वार्ड हैं और अधिकांश वार्डों में कार्य भी पूरे नहीं हो पाये हैं। पूर्य कार्यकाल के दौरान दो साल से अधिक का समय कोरोना में बीत गया और बाकी समय में जो बोर्ड बैठकें हुर्इं भी वह राजनीति की भेंट चढ़ गर्इं। विकास कार्य केवल नाम के ही होते दिखे। विपक्षी दलों के वार्डों का हाल तो और भी बुरा रहा यहां न के बराबर ही कार्य हुए।

मेरठ नगर निगम का चुनाव 2017 में हुआ था। दिसंबर माह में बसपा की ओर से सुनीता वर्मा मेयर चुनकर सामने आर्इं थी। उनके नेतृत्व में ही पूरे पांच सालों तक कार्यकाल चला जो कि हंगामें की भेंट अधिक रहा। सत्ता पार्टी के पाषर्षदों के क्षेत्र में तो कार्य हुए, लेकिन विपक्षी दल के पार्षद परेशान ही चक्कर लगाते रहे वह न के बराबर ही कार्य करा पाये। उस समय बसपा के खाते में मेयर की सीट करीब 13 साल बाद आई थी। यहां भाजपा के पार्षदों की संख्या भी अधिक रही। जिसमें कुल 40 से अधिक पार्षद भाजपा के ही शामिल रहे।

भाजपा के 40 तो बसपा के हैं 28 पार्षद

नगर निगम के पार्षदों की बात की जाये तो यहां वार्डों की संख्या 90 है और इनमें 40 पार्षद भाजपा, 28 पार्षद बसपा, 4 पार्षद सपा, 4 पार्षद कांग्रेस और 14 पार्षद अन्य दलों के हैं। इनमें 10 नॉमिनेट मेंबर भी हैं। अब कार्य कराये जाने की बात की जाये तो अधिकांश कार्य भाजपा पार्षदों के क्षेत्र में हुआ है यहां बसपा और अन्य दलों के पार्षद अपने क्षेत्रों में कार्य कराने को लेकर चक्कर ही लगाते रहे।

यहां तक कि विकास को लेकर जो बाते बोर्ड बैठक में होनी चाहिए थे। वह हुई ही नहीं बैठक हर बार हंगामे की भेंट चढ़ती रही। भाजपइयों ने अपने क्षेत्रों में जबरन कार्य कराये अब इसे सत्ता का असर कहें या कुछ ओर, लेकिन उन्होंने कार्य कराये और विपक्षी दलों के पार्षद चक्कर ही लगाते रहे।

वार्ड-70 में भी नहीं हुए कार्य

वार्ड-70 के पार्षद इकराम ने बताया कि पिछले पांच सालों में उनके क्षेत्र इस्माईल नगर, कैंचियान समेत करीब 10 से 11 मोहल्लों में कोई कार्य नहीं हो पाया है। कुछ कार्य हुए हैं जो न के बराबर हैं। क्षेत्र की जनता परेशान हैं। पार्षद की ओर से लगातार प्रयास किया जाता रहा क्षेत्र में कार्य कराने का, लेकिन कार्य नहीं हो पाये। उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों में कुछ ही बैठकें हुर्इं और उनमें से अधिकांश बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ गई। ऐसे में पार्षद सिर्फ आपस में ही उलझे रहे जनता के हितों का किसी को ध्यान नहीं रहा।

वार्ड-33 में बदहाल है पार्कों के हालात

लोहिया नगर वार्ड-33 में आता हैं यहां कार्यों की बात की जाये तो यहां की पार्षद बसपा से सितारा बेगम हैं। पूरे कार्यकाल में यहां न के बराबर ही कार्य हो पाया है। यहां लोहिया नगर टंकी के पास एल ब्लॉक में क्षेत्र का सबसे पड़ा पार्क है, लेकिन इस पार्क के चारों ओर चार दीवारी तक नहीं है।

02 27

नालियों और सीवरों का गंदा पानी पार्क में बहता है। जिस कारण यहां रहने वालों का रहना तक दुश्वार हो चुका है। क्षेत्र की गलियों में नालियां अभी तक नहीं बनाई गई हैं। जबकि लोहिया नगर को अस्तित्व में आये 15 साल से भी अधिक का समय हो गया है। जो एलईडी लाइटें लगवार्इं गई, वह भी एमडीए की ओर से लगवार्इं गर्इं हैं। पार्षद सितारा बेगम ने बताया कि उनकी ओर से अधिक से अधिक कार्य कराने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ कार्य अभी भी अधूरे हैं जो की शुरू ही नहीं हो पाये।

टूटी पड़ी हैं सुभाष नगर-मोहनपुरी की सड़कें

शहर का सुभाष नगर का क्षेत्र वार्ड-29 में आता है। सुभाष नगर से मोहनपुरी को जाने वाला मार्ग खोदा गया था, लेकिन अभी तक इसे सही नहीं कराया गया है। मार्ग पिछले कई माह से टूटा पड़ा है, लेकिन इसे सही नहीं कराया गया है। क्षेत्र की गलियों की बात की जाये तो यहां नालियां सही समय पर साफ नहीं होती।

04 25

नाले की दीवार टूटी पड़ी है, लेकिन क्षेत्र के पार्षद की मानें तो उनकी ओर से अधिकांश कार्य करा दिये गये हैं, लेकिन यहां नाले का कार्य अधूरा है। जिसे पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।

नाले अटे पड़े, सड़कें टूटी, नहीं दिखता विकास

क्षेत्र के अधिकांश मार्गों की हालत खस्ताहाल में हैं। मलियाना पुल के पास बागपत रोड की बात की जाये तो यह मार्ग पूरी तरह से टूटा पड़ा है, लेकिन किसी का इसकी ओर ध्यान नहीं है। क्षेत्रीय पार्षद भी इस ओर से आंखे मूंदे हैं, अब चुनाव का समय आने वाला है तो संभावित उम्मीदवार गलियों से निकलकर वोट मांगने आयेंगे, लेकिन कार्य कराने कोई नहीं आता।

01 25

यही हाल शहर के नालों का है। शहर का ओडियन नाला कूड़े से अटा पड़ा है, लेकिन इसे अभी तक साफ नहीं कराया गया है। जिस कारण आने वाले समय में भी लोगों के लिये समस्या खड़ी होगी।

नगरायुक्त ने किये सुधार के प्रयास

विपरीत हालातों के बीच भी नगरायुक्त मनीष बंसल ने शहर की दशा सुधारने की दिशा में प्रयास किये। कई प्लान भी बनाये और उन पर धरातल स्तर पर काम भी किया। सफाई व्यवस्था को भी सुधारा। लगातार निरीक्षण भी किये, ताकि शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर आ सके, लेकिन इसके बावजूद पार्षद आपस में ही लड़ते रहे। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ लगातार दंडात्मक कार्रवाई भी की जा रही हैं। इस दशहत से धरातल पर निगम कर्मचारी काम भी कर रहे हैं।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP: मुरादाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई कार, चार युवकों की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी।...

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला हर वर्ष 15 मार्च को विश्व भर में...

पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स. पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ...
spot_imgspot_img