Saturday, March 21, 2026
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आजादी का चोला पहनकर दीवानों ने सीने पर खाई थी गोलियां

  • रासना की माटी से आती है क्रांतिकारियों के बलिदान की ‘खुशबू’
  • गांव की माटी ने देश को दिए 17 क्रांतिकारी

जनवाणी संवाददाता |

रोहटा: मेरठ की क्रांतिकारी भूमि पर रोहटा ब्लॉक का गांव रासना स्वतंत्रता सेनानियों के गांव के नाम से जाना जाता है। मेरठ-बड़ौत रोड पर शहर से लगभग 25 किलोमीटर रासना गांव ने देश को 17 क्रांति का दम भरने वाले स्वतंत्रता सेनानी दिए। गांव की मिट्टी में आज भी स्वतंत्र सेनानियों की खुशबू आती है।

स्वतंत्र सेनानियों के नाम से द्वार से लेकर जंगल में झंडा सिंह द्वारा स्थापित दुर्गा माता मंदिर कुटी व श्री शालिग्राम शर्मा स्मारक कॉलेज स्वतंत्र सेनानियों की यादें आज भी ताजा करती हैं। देश के लिए कुबार्नी का जज्बा रखने वाले इस गांव ने एक नहीं 17 योद्धा दिए। आतंकी आॅपरेशन में वीरता का परिचय देने वाले इसी गांव के शहीद मेजर मोहित शर्मा को शांति काल में मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र से भी नवाजा जा चुका है।

सन 1852 से 1857 के बीच क्रांति के दौरान यहां के झंडा सिंह के नाम पर जंगल में दुर्गा माता का मंदिर बनाया गया,गांव के जंगल में बीचो-बीच स्थित गांधी आश्रम कभी क्रांतिकारियों का अड्डा हुआ करता था, जो वर्तमान में है। शालिग्राम शर्मा स्मारक व कॉलेज के नाम से मशहूर है।

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मेरठ-बड़ौत रोड पर गांव के मुख्य द्वार पर यहां के क्रांतिकारियों के नाम आज भी अंकित हैं। गांव के बुजुर्ग और इतिहास बताता है कि 1942 से शुरू क्रांति का सिलसिला 1999 तक चला। दो भाइयों लेफ्टिनेंट कर्नल अमरदीप त्यागी व लेफ्टिनेंट कर्नल राजदीप त्यागी ने वर्ष 1999 में कारगिल में आॅपरेशन विजय फतह किया।

लेफ्टिनेंट कर्नल जबकि अमरजीत ने दो साल से वीआरएस ली और अब युवाओं को योद्धा मिलिट्री एकेडमी के जरिए सेना के लिए तैयार कर रहे हैं,वही लेफ्टिनेंट कर्नल राजदीप वर्तमान में जम्मू के दुर्गम क्षेत्र में कार्य करते हैं। स्वतंत्रा सेनानियों ने सैन्य अफसरों के अलावा भी गांव से दर्जनों युवा आज भी सेना में कार्यरत हैं।

जिनके अंदर देशभक्ति का जज्बा भरा हुआ है। देश की आजादी में गांव का अहम् योगदान रहा। सत्याग्रह से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक में सक्रिय रहे। अंग्रेजों ने आंदोलन के दौरान लोगों पर जमकर लाठियां बरसाईं, लेकिन आजादी के दीवानों ने तमाम जुल्म सहे और इंकलाब जारी रखा।

भारत छोड़ो आंदोलन के जरिए यहां के लोगों ने फिरंगी हुकूमत के खिलाफ बिगुल बजा दिया था। अंग्रेजों को कुचलने के लिए अंग्रेज सरकार ने सैकड़ों लोगों पर जुल्म किये। रासना गांव की माटी में आज भी जंगे आजादी के दीवानों की खुशबू आती है।

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गांव के शुरुआत से लेकर आखिरी छोर तक हर जगह गांव के स्वतंत्र सेनानियों की याद में बने द्वार से लेकर शालिग्राम शर्मा इंटर कॉलेज, प्राचीन दुर्गा माता का मंदिर हो चाहे फिर जगह-जगह बनी आजादी के दीवानों की समाधि। यहां की माटी से आज भी आजादी के दीवानों की खुशबू आती है।

रासना गांव ने दिये थे 17 स्वतंत्रता सेनानी

जंगे आजादी की लड़ाई में रासना गांव के आजादी के दीवानों की फेहरिस्त काफी लंबी है। मेरठ की क्रांतिकारी भूमि की माटी में बसा रासना अकेला ऐसा गांव है जिससे इतने क्रांतिकारी निकले। जिनमें सागर सिंह, ओमप्रकाश, बसंत सिंह भृंग, फूल सिंह सेठ, मिठ्ठन लाल, भिक्कन, काले, मुंशी, रतीराम, डालचंद, बाबू सूरत सिंह, महाशय रेवा सिंह, उमराव, सुंदरलाल, जहारिया, प्रणाम सिंह त्यागी व रघुवीर सिंह ने स्वाधीनता संग्राम में अहम् भूमिका निभाई। गांव के स्वर्ण जयंती द्वार पर आज भी समस्त स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित हैं। रासना गांव निवासी ओमप्रकाश त्यागी विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं।

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