
2010 में कॉमनवेल्थ खेल से जुड़े विवाद के साथ ही यूपीए-2 के पतन की स्क्रिप्ट देश के सामने आ चुकी थी। दो वर्ष पहले जिस मनमोहन सिंह सरकार ने वैश्विक मंदी के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसकी आंच नहीं आने दी थी, उसके अवसान के दिन आ चुके थे। 2012 तक रियल एस्टेट बुरी तरह से पिटने लगा था। दिल्ली के ‘निर्भया कांड’ ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। इसके साथ ही सरकार पर कॉमनवेल्थ खेल घोटाले के साथ-साथ 2-जी, कोयला आवंटन घोटाले जैसे दसियों लाख करोड़ के घोटाले की खबर देश के समाचारपत्रों और न्यूज टेलीविजन की सुर्खियां बनी हुई थीं। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के झंडे तले महाराष्ट्र के अन्ना हजारे के नेतृत्व में अरविंद केजरीवाल और भाजपा, आरएसएस से जुड़े लोगों की एक पूरी जमात ही देश में भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने के लिए देश के युवाओं और नागरिक संगठनों का आह्वान कर रही थी। मीडिया में दिन-रात कांग्रेस का ट्रायल किया जा रहा था, और बड़ी संख्या में लगभग हर रोज मध्य-वर्ग इंडिया गेट पर जमा होकर खुलकर यूपीए सरकार की मुखालफत कर रहा था। यही वह पृष्ठभूमि थी, जिसमें ‘गुजरात मॉडल’ के ब्रांड एम्बेसडर, नरेंद्र मोदी का भारतीय राजनीति में धमाकेदार एंट्री होती है। लेकिन तब देश के आम-अवाम को नहीं पता था कि असल में यह तैयारी तो पिछले 5 वर्ष से चल रही थी, और इसके पीछे सबसे बड़ा समर्थन देश के सबसे बड़े धन्नासेठों का है। अडानी समूह के निजी विमान से देश के भावी प्रधानमंत्री को एक के बाद एक सभाओं में हुंकार भरते, और देश को ‘अच्छे दिन’ ‘बहुत हुई महंगाई की मार-अबकी बार मोदी सरकार’, ‘प्रति वर्ष 2 करोड़ रोजगार’ ‘किसानों की आय दोगुनी’ और जवानों को ‘वन रैंक-वन पेंशन’ के नारे के साथ प्रसून जोशी के गीत की इन पंक्तियों को भी स्टेज से मोदी जी पूरे जोशो-खरोश के साथ सुनाते देखे जा सकते थे। आज जब तीसरी बार, मोदी सरकार की दुहाई दी जा रही है, देश को 10 वर्ष पीछे मुड़कर देखने की जरूरत है।
देश में नया-नया व्हाट्सअप समूह शुरू हुआ था, जिस पर कांग्रेस के भ्रष्टाचार की एक लंबी फेहरिश्त करोड़ों मध्यवर्गीय परिवारों में एक के बाद एक फॉरवर्ड हो रही थी। इतने फॉरवर्ड्स के बाद तो शायद ही कोई ऐसा बचा हो जिसे कांग्रेस और यूपीए गठबंधन के दलों पर लाखों करोड़ रुपये स्विस बैंकों में रखने पर कोई संदेह रहा हो। एक सभा में मोदी जी विदेशों में छिपाए गये काले धन को देश में वापस लाने और उसमें से हर भारतीय को 15 लाख दिलाने का आश्वासन तक देते दिखे। इसे देखते हुए बहुसंख्य भारतीयों के लिए ‘अबकी बार-मोदी सरकार’ के सिवाय कुछ भी विचार करने का सवाल ही नहीं था। लेकिन हुआ क्या? विदेशों में काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की जगह 2016 में अचानक एक रात 8 बजे पीएम मोदी नोटबंदी की घोषणा करते हैं, और रातों-रात गरीबों और गृहस्थ महिलाओं पर कहर टूट पड़ता है। परिवार पर हारी-बीमारी या विपत्ति के लिए पति से छिपाकर रखे पैसों को परिवार के मुखिया के हाथ बैंक में जमा करने को मजबूर कर दिया गया।
देश को कैश-लेस बनाने की सनक में लाखों एमएसएमई और कुटीर उद्योगों पर ताला लग गया। विदेशों से काला धन तो एक पैसा नहीं आया, उल्टा देश के बैंकों में जमा आम लोगों की जमापूंजी को कर्ज पर लेकर कई पूंजीपति मित्र दुनिया के विभिन्न कोनों में पलायन कर गए। बैंकों के बढ़ते एनपीए को सरकार ने लाखों करोड़ रुपए की फंडिंग से एक बार फिर चकाचक कर दिया, अगला एनपीए कराने के लिए। 2019 में कमजोर विपक्ष अपनी आधी-अधूरी कोशिशों के कारण सरकार पर राफेल, क्रोनिज्म के आरोप को बड़ा नैरेटिव नहीं बना सका। विपक्ष ने खुद को प्रेस कांफ्रेंस और ट्वीट तक सीमित रख अतीत की तरह उम्मीद पाल रखी थी कि देश की जनता रोटी पलट देगी। लेकिन 14 फरवरी, 2019 के दिन पुलवामा की घटना के बाद तो देश का चुनावी माहौल ही पूरी तरह से बदल गया। अपने शहीद जवानों की मौत में गमगीन देश को राष्ट्रवाद के नए उन्माद में ले जाने का पूरा अवसर था, जबकि विपक्ष सन्नाटे की स्थिति में था। मोदी-शाह राजस्थान, गुजरात की सीमाओं पर पाकिस्तान को ललकार रहे थे।
भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 26 फरवरी, 2019 को पीएम नरेंद्र मोदी एक बार फिर चुरू, राजस्थान की चुनावी सभा में ‘मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा’ को 3.53 मिनट तक लगातार दोहराते हैं, जिसके जवाब में भीड़ पूरे जोशोखरोश के साथ जवाब देती नजर आती है। यह वही दिन है, जिस दिन पाकिस्तान के बालाकोट पर भारतीय वायुसेना की सर्जिकल स्ट्राइक होती है, जिसमें कथित तौर पर करीब 300 आतंकियों को मार गिराने और उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद की सूचना के आगे देश के लिए कुछ भी गौरतलब नहीं रह गया था। 2019 में एंटी-इनकम्बेंसी पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक में गुम हो गई, और मोदी सरकार पहले से भी बड़े बहुमत के साथ लौटी। लेकिन 2024 की तो तारीख भी तय हो गई। तो क्या 2024 राम मंदिर उद्घाटन, सीएए कानून, धारा 370, एक देश-एक चुनाव, सनातन धर्म या विपक्ष के खिलाफ परिवारवाद के आरोप पर लड़ा जायेगा? इस बार तो भाजपा ने अपने लिए 370+ का लक्ष्य रखा है, जो 2019 की संख्या से 67 सीट ज्यादा है।
जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को एक-एक कर इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़े सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक पटल पर उजागर करने की बाध्यता है, तो ऐसे में क्या ‘मैं देश नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं बिकने दूंगा’ थीम को भाजपा तीसरी बार भी अपना चुनावी थीम बनाने की हिम्मत जुटा सकती है? कथित मुख्यधारा न्यूज मीडिया को एक बार परे हटा दें तो मोदी जी की लोकप्रियता को उनके एक यूट्यूब पोस्ट से समझा जा सकता है। यूट्यूब पर पीएम मोदी के चैनल को 2.25 करोड़ लोग सब्सक्राइब करते हैं। 6 दिन पहले पीएम मोदी ने अपने चुनावी अभियान में यूक्रेन से हजारों मेडिकल छात्रों की सुरक्षित देश वापसी का वीडियो जारी किया है, जिसमें बेहद घबराए अपने माता-पिता से चिपटती हुई लड़की बताती है कि कैसे मोदी जी ने हमें सुरक्षित निकालने के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवा दिया। हैरानी की बात यह है कि इस पोस्ट को सिर्फ 626 लोगों ने लाइक किया है, लेकिन 1242 लोगों ने अपने कमेंट्स में इस वीडियो को सबसे बड़ा जोक बताकर खिल्ली उड़ाई है। इस चुनावी प्रचार के हिस्से काटकर सोशल मीडिया पर मीम को कई गुना ज्यादा लोकप्रियता मिल रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कथित मोदी-भक्तों को भी अब लगने लगा है कि अब बहुत हुआ, अब और झेल पाना अपने वश की बात नहीं है? और इसी तथ्य से बाखबर, भाजपा सरकार अंतिम क्षणों तक सभी विपक्षी दलों के भीतर सेंधमारी, देश के हर कोने में छोटे-छोटे राजनीतिक दलों से गठबंधन बनाने के चक्कर में बिहार और महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में अपने उम्मीदवार घोषित करने से बच रही है। सवाल बहुत से हैं, जवाब देश की आत्मा को देना है, बशर्ते सही तार छेड़े जाएं।


