Tuesday, March 17, 2026
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Dussehra 2025: विजयादशमी पर कब करें शस्त्र पूजन? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। 2 अक्तूबर 2025 को पूरे देश में विजयादशमी का पर्व उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। तभी से दशहरा को अधर्म, अहंकार और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर लोग पूजा-पाठ, हवन और दान-पुण्य कर अपने जीवन से भय और बाधाओं को दूर करने की कामना करते हैं। दशहरा के दिन पूरे देशभर में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन कर बुराई के अंत का संदेश दिया जाता है। वहीं कई घरों और मंदिरों में शस्त्र पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में…

शस्त्र पूजन शुभ मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक दशहरा पर शस्त्र पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 9 मिनट से प्रारंभ होगा। यह मुहूर्त 2 बजकर 56 मिनट तक बना रहेगा। ऐसे में आप इस अवधि में शस्त्र पूजन कर सकते हैं।

रावण दहन का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों के मुताबिक रावण के पुतले का दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है। इस वर्ष दशहरा पर सूर्यास्त शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। ऐसे में इसके तुरंत बाद रावण दहन कर सकते हैं।

पूजा विधि

दशहरा पर शस्त्र पूजन के लिए सबसे पहले अपने सभी अस्त्र-शस्त्रों को पूजा स्थान पर एकत्रित कर लें।

अब एक साफ चौकी लेकर उसपर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।

अब सभी शस्त्रों को साफ करें और उसे चौकी पर रख दें।

इसके बाद शस्त्रों पर गंगाजल का छिड़काव करें और प्रभु के मंत्रों का स्मरण करें।

अब शस्त्रों पर कलावा बांधें और उन पर तिलक लगाकर भगवान राम के नाम का जाप करें।

अब उनपर ताजे फूलों की माला अर्पित करें।

अब शुद्ध देसी घी से दीप जला लें और सुख-समृद्धि की कामना करें।

शमी के पौधे की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण से युद्ध करने से पूर्व भगवान राम ने शमी के पौधे के समक्ष झुककर विजय की कामना की थी। तभी से दशहरा पर शमी के पौधे की पूजा का महत्व माना जाता है। इसके प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि, खुशहाली, कार्यों में आ रही बाधाएं दूर व विरोधियों से मुक्ति मिलती हैं।

मां दुर्गा की पूजा का महत्व

दशहरा के दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इसलिए इसे शक्ति की जीत का त्योहार भी कहते हैं।

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