- अनलॉक होने के बाद फिर शुरू हुई लापरवाही, मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग की नहीं है चिंता
- बाजार में दुकानदार व ग्राहकों द्वारा हो रहा उल्लंघन, पालन कराने वाले नहीं आते नजर
मुख्य संवाददाता |
बागपत: कोरोना अभी पूरी तरह से गया भी नहीं है और तीसरी लहर की चेतावनी पहले ही जारी हो चुकी है, लेकिन लापरवाहों की फौज इस बात को समझने को तैयार नहीं है। उन्हें मालूम है कि कोरोना है, लेकिन नियमों का पालन नहीं करेंगे।
सोचते हैं कि कोरोना कुछ नहीं बिगाडेगा। लेकिन हकीकत यह है कि वह मास्क न लगाकर और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करके अपने साथ परिजनों की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं। परंतु इन्हें इस बात को समझाने वाला भी कोई नहीं है। क्योंकि यहां खुद समझना मुश्किल होता है।
पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी भी इन दिनों बाजारों में नियमों का पालन कराते नजर नहीं आ रहे हैं। चंद कदम पर कोतवाली पुलिस, चंद कदम पर राष्ट्रवंदना चौक पर पुलिस, फिर भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

कोरोना की दूसरी लहर ने हर तरफ कहर बरपा दिया था। हर दिन आंकड़ों में इजाफा होता चला गया। कोरोना की दूसरी लहर के चलते महीनेभर से अधिक लॉकडाउन भी रहा। लोगों से नियमों का पालन करने की लगातार अपील भी की जा रही है, ताकि कोरोना को पूरी तरह से हराया जा सके।
600 से कम सक्रिय केस होने पर बागपत जनपद अनलॉक की श्रेणी में आ गया। बाजार भी खुल गए और दिनचर्या वही हो गई, लेकिन फिर वही लापरवाही का भूत सवार हो गया है। कोरोना की गति धीमी हुई है अभी गया नहीं है, फिर कुछ को यह बात समझ में नहीं आ रही है। लापरवाही की हद पार करना वह जरूरी समझ रहे हैं। सुबह बाजार खुलते ही अपार भीड़ बाजार में उमड़ आती है।
भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि मानों अगले दिन बाजार नहीं खुलेगा। दुकानदार भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बजाय अपनी चांदी कूटने में लगे हैं। दुकानदार व ग्राहक मास्क लगाना भी जरूरी नहीं समझ रहे हैं। दुकानदार अधिक लापरवाही बरत रहे हैं। आलम यह है कि वह अपने साथ दूसरों को भी खतरे में डाल रहे हैं।
मास्क नहीं लगाकर जहां दुकानदार सामान बेच रहे हैं वहीं लोगों का आवागमन भी बिना मास्क के ही चल रहा है। पुलिस राष्ट्रवंदना चौक पर वाहनों की चेकिंग कर कार्रवाई तो करती है और कोतवाली पुलिस भी वहीं खड़ी होकर चेकिंग में व्यस्त हो जाती है, लेकिन बाजार में नियमों का पालन कराने के लिए अभियान नहीं चलाया जाता है। यहां से प्रशासनिक अधिकारी गुजर जाते हैं, लेकिन एक बार भी नियमों का पालन कराने के लिए यहां भरमण तक नहीं करते।

नगर पालिका के अधिकारियों का भी यही हाल है। मास्क को लेकर इन दिनों बाजार में कोई अ•िायान नजर नहीं आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर यहां कौन है नियमों का पालन कराने वाला? क्या इसी तरह से लापरवाही होती रहेगी? लापरवाहों पर कार्रवाई का चाबुक चलेगा या नहीं?
अगर कोई परिवार अपने घर के बाहर घूमता है तो उसे तो पुलिस लॉकडाउन का पाठ पढ़ाती नजर आती है, लेकिन यह भीड़ नजर नहीं आती है। सात बजे के बाद दुकानें भी खुली रहती हैं, रेहड़ी-ठेली भी लगी रहती हैं। लोगों का आवागमन भी खूब रहता है, लेकिन कोई लॉकडाउन का पालन कराने वाला नजर नहीं आता है। कहीं यह ढिलाई एक बार फिर बागपत को संकट में न डाल दे?

