जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज, 1 फरवरी को सुबह 11 बजे अपना लगातार 9वां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। यह पिछले एक दशक में पहला अवसर है जब भारत का केंद्रीय बजट रविवार को पेश किया जा रहा है। मोदी सरकार 3.0 का यह दूसरा पूर्ण बजट देश के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 2025 के आम चुनाव और अंतरिम बजट के बाद अब सरकार लंबी अवधि के विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने देश की आर्थिक स्थिति पर संतोष जताया और संसद में घोषणा की कि भारत की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने आत्मनिर्भरता को अपनी नीति का मूल मंत्र बना लिया है। सरकार के पिछले फैसलों ने न केवल सिस्टम में पारदर्शिता लाई है, बल्कि आम नागरिकों तक सीधे लाभ पहुँचाने का भी काम किया है।
सरकार का ‘त्रिकर्तव्य’ दृष्टिकोण
निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में सरकार के विकास दृष्टिकोण पर भी जोर दिया। उन्होंने “त्रिकर्तव्य” पर चर्चा की, जो सरकार के तीन मुख्य लक्ष्यों को स्पष्ट करता है:
आर्थिक विकास को तेज़ी से बढ़ाना और इसे लंबे समय तक बरकरार रखना।
देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य – ‘सबका साथ, सबका विकास’ के तहत समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की हर बूंद पहुँचाना।
SC-ST, किसानों और युवाओं पर फोकस
वित्त मंत्री ने बजट के दौरान वंचित वर्गों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश की आर्थिक प्रगति का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि यह लाभ किसानों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), युवाओं और गरीब वर्ग तक भी पहुंचे। इसके लिए सरकार योजनाओं के कार्यान्वयन में तकनीकी नवाचार और पारदर्शिता का सहारा ले रही है।
350 से अधिक सुधारों का हवाला
नीतियों को सरल बनाने के लिए सरकार ने अब तक 350 से अधिक बड़े सुधार लागू किए हैं। इन सुधारों में जीएसटी का सरलीकरण, श्रम न्यायालयों से संबंधित अधिसूचनाओं को आसान बनाना, और अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का युक्तिकरण शामिल है। इसके साथ ही, वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के बोझ को कम करने (Deregulation) पर काम कर रही है, ताकि व्यापार और सामान्य जीवन में सरकारी हस्तक्षेप कम हो सके।

