Saturday, March 28, 2026
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छत गिरने के अंदेशे से स्कूल बंद क्यों?

हमें तो लगता नहीं है कि अब भी पब्लिक की समझ में ये आएगा कि मोदी जी-योगी जी वगैरह की सरकारें, सरकारी स्कूल धड़ाधड़ बंद क्यों कर रही हैं? सिंपल है। राजस्थान में झालावाड़ में स्कूूल की छत जैसे आ गिरी और सात बच्चों की दब कर मौत हो गई और कई घायल हो गए, पर ऐसी नौबत ही क्यों आयी? जाहिर है कि स्कूल बंद नहीं होने की वजह। स्कूल बंद होना छोड़ो, वहां तो बच्चे बाकायदा पढ़ रहे थे और वह भी सैकड़ों में। बस गिर पड़ी छत। न होता स्कूल और न गिरती स्कूल की छत। सरकारी स्कूल नहीं होता तो सात के सात बच्चे कम से कम जिंदा तो होते, क्या हुआ कि उनमें से दो-तीन बिना पढ़े ही रह जाते। आखिर, जान है तो जहान है।

सच पूछिए तो बच्चों की जान बचाने के लिए ही भगवा पार्टी की सरकारों ने स्कूल बंद करने का बीड़ा उठाया हुआ है। यूपी में, एमपी में, राजस्थान में, हरियाणा में, जहां-जहां, जितना-जितना राम राज्य आया हुआ है, वहां-वहां उतनी ही ज्यादा तेजी से स्कूलों के बंद करवाया जा रहा है। मोदी जी का राज आने के बाद से पूरे 89,441 स्कूलों को बंद कराया गया है। अब जरा हिसाब लगाइए कि अगर हर हजार में से सिर्फ एक स्कूल की छत गिरती और औसतन एक स्कूल की छत सिर्फ सात बच्चों के लिए ही जानलेवा साबित होती, तब भी करीब 90 स्कूलों में करीब सवा छ: सौ बच्चे तो काल के गाल में समा ही सकते थे, जिन्हें डबल इंजन के राज ने बचा लिया।

यह दूसरी बात है कि इसके बाद भी थैंक यू मोदी जी के नारे लगाने के बजाए, योगी जी के राम राज्य वाली यूपी में तो बच्चे, ‘मधुशाला नहीं पाठशाला’ के ही नारे लगाते नजर आ रहे थे। हद तो ये हो गई कि मोदी जी-योगी जी के विरोधियों ने कई जगहों पर तो बच्चों को भड़का कर, उनसे स्कूल बंदी के खिलाफ आंदोलन जैसा ही करा दिया। वीडियो वाइरल करा दिए जिनमें बच्चे अपने बंद किए जा रहे स्कूलों के दरवाजे पर जाकर रो-रोकर गुहार लगा रहे थे कि उन्हें तो वहीं पढ़ना है। बच्चों के पुराने शिक्षक, अपना पूरा शिक्षण कौशल खर्च कर के भी बच्चों को समझा नहीं पा रहे थे कि सरकार उनके भले के लिए ही उनके स्कूल बंद कर रही थी। सरकार उनके लिए भक्ति का मार्ग आसान बना रही थी।

इससे कोई यह नहीं समझे कि मर्जर के नाम पर, और दूसरे-दूसरे नामों से भी बच्चों के स्कूल बंद कराना ही सरकार के पास बच्चों को स्कूल की छत गिरने से बचाने का इकलौता उपाय था। देखा नहीं, अभी पिछले ही दिनों कांवड़ के टैम पर क्या हुआ? योगी जी के राम राज्य में कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले सारे के सारे जिलों में, स्कूलों को बंद कर दिया गया। मजाल है कि किसी भी स्कूल की छत गिरने और उसके नीचे बच्चों के दबने की योगी जी के राज से कोई खबर आयी हो। और हां! स्कूल ही बंद होता, तो डबल इंजन सरकार से कोई झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने का जवाब भी नहीं मांगता। फिर मंत्री जी के दुर्घटना-दर्शन के लिए आने की तैयारी में सड़क बनती भी तो भी उसे सड़क का विकास ही कहते, न कि स्कूल की छत गिरने का ताना देते।

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