Wednesday, March 18, 2026
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निगम के भ्रष्ट अधिकारियों की क्यों न हो संपत्ति की जांच?

  • सड़क निर्माण के नाम पर लाखों का घोटाला क्या पहली बार हुआ?
  • निगम के जिन अधिकारियों पर आरोप है उनकी संपत्ति की जांच कराने पर आएगा सच सामने

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में भ्रष्टाचार का यह पहला मामला है ऐसा है नहीं। इससे पहले भी यहां के अधिकारियों पर तमाम तरह के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन जांच के बाद ठोस कार्रवाई नहीं होने से यह मामले दब जाते हैं। अब सड़क निर्माण घोटाले को लेकर निगम के अधिकारी फिर सुर्खियों में है और यह मामला शासन तक पहुंच गया है। वहीं, निर्माण विभाग के जिन अधिकारियों के नाम इसमें शामिल है अगर उनकी संपत्ति की जांच कराई जाए तो काफी हद तक सच सामने आ सकता है।

मेयर सुनीता वर्मा ने निगम के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए शासन को लिखा है। उन्होंने मांग की है कि जिन अधिकारियों जिनमे सहायक अभियंता केके सिंघल, सहायक अभियंता राजबीर सिंह, सहायक अभियंता नानक चन्द, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी महेश बालियासन, अधिशासी अभियंता विकास कुरील, अधिशासी अभियंता अमित कुमार व अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी देशपाल सिंह शामिल है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं मांग है कि जिन अधिकारियों का नाम इस भ्रष्टाचार में सामने आ रहा है उनकी संपत्ति की जांच क्यों न कराई जाए। यदि संपत्ति की जांच होगी तो इस बात का खुलासा हो जाएगा कि यह इससे पहले भी इसी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त रह चुके है। मांग उठ रही है कि जिस कंपनी मैसर्स पीपी रियलकॉन को ठेका दिया गया है उसकी भी जांच होनी चाहिए।

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क्योंकि ऐसा कैसे हो गया कि कंपनी ने जो काम किया ही नहीं उसका लाखों रुपये का एस्टीमेट बनाकर भुगतान कराने की तैयारी थी। जिस समय कंपनी को दो करोड़ से अधिक का काम दिया गया तो उस समय कंपनी ने सारे मानकों को पूरा किया था या नहीं।

चर्चा तो यहां तक है कि ऐसे भी कई कार्य है जिन्हें उन ठेकेदारों को दिया गया जो पहले से अपने कार्यो को लेकर जांच के दायरे में है। इनमे से बड़ी संख्या में ठेकेदारों का निगम में ब्लैकलिस्ट किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब यह ठेकेदार अपनी पिछली जांच को दबाए जाने के बाद फिर निगम में ठेकेदारी कर रहे हैं।

निगम की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपी थी इसके बाद मामला शासन को चला गया है। फिलहाल आरोपियों की संपत्ति की जांच करने जैसी कोई बात सामने नहीं आ रही है। हालांकि मेयर ने मांग की थी, लेकिन शासन से आदेश आने के बाद ही यह कार्रवाई होगी। -प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त

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