- दादरी में डिग्री कॉलेज की बिल्डिंग बनकर हो रही तैयार
- कॉलेज के शुरू होने से सपनों को लगेंगे पंख
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: क्षेत्र के दादरी गांव में डिग्री कॉलेज का रास्ता साफ होता दिख रहा है। डिग्री कॉलेज के बनने से 20 गांव की युवतियां शिक्षा आसानी के साथ ग्रहण कर लेंगी। इससे उनका भविष्य उज्जवल होगा और ये युवतियां अपने गांव के साथ साथ अपने प्रदेश का नाम रोशन करेंगी।
महानगर से 25 किमी दूरी पर स्थित दादरी गांव के आसपास 20 गांव ऐसे हैं। जहां युवतियां इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण करने के बाद उनके सामने आगे की पढ़ाई को लेकर संकट मंडराने लगता है। 25 किलोमीटर लंबी दूरी होने के कारण अधिकतर बच्चियां इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण करने के बाद पढ़ाई से वंचित कर हो जाती थी। उसका अहम कारण बच्चियों की सुरक्षा लेकर बना है। दादरी में डिग्री कॉलेज के लिए एक करोड़ रुपये सपा शासन काल में स्वीकृत हुए थे।
11 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण होना था। इस डिग्री कॉलेज बनने की घोषणा के बाद गांव की युवतियों में खुशी का माहौल उत्पन्न हो गया था, लेकिन सत्ता का परिवर्तन होने के बाद से यह डिग्री कॉलेज अधर में लटक गया था। जिसके चलते बच्चियों की शिक्षा पर संकट मंडरा में लगा था, लेकिन भाजपा शासन काल में बजट स्वीकृत होने के बाद से डिग्री कॉलेज की बिल्डिंग तैयार होने लगी है। अब इसकी बिल्डिंग बनने से उम्मीद जगने लगी है कि यह डिग्री कॉलेज जल्द ही चल जाएगा।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
दादरी, समोली, मंडोरा, पीरपुर, भरोटा, कैली, कपसाड़, सलावा, खेड़ा, नंगली आजड़, नंगली साधारण, नंगला राठी, मामूरी, शाहपुरजदीद, रसूलपुर, महलका, कनोड़ा, लोईया समेत दो दर्जन से अधिक ऐसे गांव हैं, जो दादरी के आसपास है। यह गांव महानगर से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जिसके चलते यहां की युवतियां पढ़ाई से वंचित रह जाती है। डिग्री कॉलेज शुरू होने के बाद युवतियों में पढ़ाई की अलख जग जाएगी।
बच्चियों का होगा उज्जवल भविष्य
सरधना के सपा विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि सपा सरकार में डिग्री कॉलेज को बनाने के लिए एक करोड़ की राशि स्वीकृत हुई थी। कॉलेज बनने के लिए 11 करोड़ का बजट है। डिग्री कॉलेज के बनने से बच्चियों का भविष्य उज्वल होगा।
बेसिक शिक्षा विभाग डीबीटी के लिए तैयार
बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले सरकारी स्कूलों के छात्रों को शासन से हर साल डीबीटी योजना के तहत 1200 रुपये मिलते हैं। यह पैसा सीधे छात्रों के परिजनों के खाते में जाता है। जिसको लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने अभी तक 96,800 बच्चों का वैरीफिकेशन कर लिया है। गौरतलब है कि शासन स्तर पर पूरे प्रदेश में प्रत्येक परिवार के बच्चों को शिक्षित करने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चलाई जाती है। इनमें से कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी जिला बेसिक शिक्षा विभाग की है।
विभाग द्वारा सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों को मिले इसका भी पूरा प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में शासन स्तर से चलने वाली डीबीटी (डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर) योजना को लेकर जिला बेसिक शिक्षा विभाग तैयारी कर रहा है। नए सत्र में अभीतक विभाग के पास कुल एक लाख 14 हजार 481 बच्चों का रजिस्ट्रेशन है। जिनमें से 96 हजार आठ सौ बच्चों का डीबीटी के लिए वैरीफिकेशन हो चुका है।
डीबीटी योजना में सरकार द्वारा 1200 रुपये बच्चों के परिजनों के खाते में भेजे जाते है। इस पैसे से बच्चे के लिए पूरे साल की स्कूल यूनिफार्म, जूते-मोजे, स्कूल बैग व स्टेशनरी खरीदी जाती है। हालांकि डीबीटी योजना के लिए शासन स्तर पर विभाग को 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने को कहा गया है। जबकि मेरठ जिला इस लक्ष्य को पूरा करने से महज कुछ प्रतिशत ही पीछे है, जिसका पूरे प्रदेश में नौंवा नंबर है।

