
जब बात अपनी सरकार पर आ गई तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविदं केजरीवाल उन सभी से हाथ मिलाने, गले मिलने और साथ चलने को तैयार हैं, जिन्हें वो किसी समय गर्म पानी पी-पीकर कोसा करते थे। केजरीवाल का यह दोहरा चरित्र देशवासियों के लिए हैरानी की बात भी नहीं है। कई अवसरों पर उनका दोहरा चरित्र और मापदंड उजागर हो चुके हैं। ताजा मामला केंद्र और दिल्ली सरकार के मध्य शक्तियों के बंटवारे को लेकर है। इसीलिए केजरीवाल इस समय विभिन्न प्रदेशों का दौरा कर रहे हैं। इसका उद्देश्य अपनी पार्टी का प्रचार करना नहीं अपितु केंद्र सरकार द्वारा जारी उस अध्यादेश के विरुद्ध विपक्षी दलों का समर्थन जुटाना है जिसके द्वारा उसने दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार निर्वाचित सरकार से छीनकर फिर से उपराज्यपाल को सौंप दिए हैं।