प्रभात कुमार रॉय
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरी दफा अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर सत्तासीन होने के पश्चात अपनी राजनीतिक शक्ति के अहंकार में एकदम मदहोश हो गए हैं। सत्ता अहंकार के वशीभूत होकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़-बोलेपन की फितरत में भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनामी करार दे दिया। डोनाल्ड ट्रंप साहब ने ये भी फरमाया दिया कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं डूबती है तो डूब जाने दो मुझे क्या? विश्व पटल पर क्या कोई भी कुशल, सुलझा हुआऔर जानकार सर्वोच्च राजनेता किसी भी मुल्क के लिए इस तरह के तल्ख अल्फाज कदाचित अभिव्यक्त कर सकता है? समस्त विश्व जानता है कि भारत की अर्थव्यवस्था निरंतर गति से आगे बढ़ती हुई एक विकासशील अर्थव्यवस्था है। भारत का स्थान दुनिया के देशों में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर स्थापित हो चुका है। विशवबैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) द्वारा प्रेषित आंकड़ों के मुताबिक भारत की वार्षिक जीडीपी तकरीबन चार ट्रिलियन डॉलर की है। आने वाले वक्त में भारत यथाशीघ्र पांच ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाला मुल्क बन जाएगा। विश्व बैंक और आईएमएफ के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत की इकॉनामी की ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने वाली है!
विश्व बैंक और आईएमएफ के इन आंकड़ों को नजरअंदाज करके इस धरा पर कोई नासमझ व्यक्ति ही भारत की अर्थव्यवस्था को एक मृत अर्थव्यवस्था करार दे सकता है। विश्व पटल पर भारत के सबसे भरोसेमंदमित्र राष्ट्र रूस की अर्थव्यवस्था की तरफ एक दृष्टिपात करें तो रूस-यूक्रेन युद्ध के दौर में भी फरवरी 2022 से रूस की अर्थव्यवस्था प्रत्येक वित्तीय वर्ष में निरंतर 4.3 प्रतिशत की विकास गति से आगे बढ़ रही है।
भारत और अमेरिका के मध्य व्यापार समझौते की खातिर बातचीत विगत छ: महीनों से निरंतर जारी है। हालांकि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वार्ता अपने अंतिम पड़ाव तक अभी पहुंच नहीं सकी है किंतु दुर्भाग्यपूर्ण रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यकायक एक तरफा फैसला लेते हुए, भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सामान पर एक अगस्त से 25 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) आयद करने का ऐलान कर दिया गया। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि भारत यदि रूस से तेल खरीदता है तो फिर पैनल्टी के तौर पर अमेरिका द्वारा भारत पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) भी आयद किया जाएगा।
भारत-अमेरिका के मध्य व्यापार समझौते में सबसे बड़ी अड़चन आई है कि डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि किसी भी तरह से भारत अमेरिका के साथ 500 बिलियन डॉलर की ट्रेड डील साइन कर ले और वह भी अमेरिका द्वारा थोपी गई मनमानी शर्तों पर। भारत के करोड़ों किसानों और छोटे उद्योगों के हितों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार कुछ खास पहलुओं पर अमेरिका से व्यापार समझौता कदापि नहीं करना चाहती है। राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका के डेयरी प्रॉडक्ट्स के लिए भारत के वाजार को खोल देने की जिद पर अड़े हैं। भारत अपने डेयरी बाजार को अमेरिका के लिए कदापि खोलना नहीं चाहता है। डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं के लिए रूस का दामन छोड़कर अमेरिका से आधुनिकतम अस्त्र-शस्त्र खरीदे। सर्वविदित है कि रूस द्वारा भारत को अस्त्र-शस्त्रों के साथ ही उनको निर्मित करने की तकनीक भी उपलब्ध कराई जाती है। जबकि अमेरिका कदाचित ऐसा नहीं करता है और अमेरिका वस्तुत: रूस के मुकाबले भारत के लिए कहीं अधिकऊंचे दामों पर अपने अस्त्र-शस्त्रों की कीमत तय करता है। उल्लेखनीय है कि भारत द्वारा अमेरिका के एफ-35 स्टील्थ फाइटर विमानों की खरीद के प्रस्ताव को संभवतया इसलिए ठुकरा दिया गया। भारत के जाने माने सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीकी एफ-35 स्टील्थफाइटर विमान के मुकाबले में रूस द्वारा निर्मित एसयू-57 स्टील्थ फाईटर विमान कहीं अधिक बेहतर और अपेक्षाकृत कम कीमत वाला है। यह भी एक कारण हो सकता है कि भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त पेनाल्टी आयद करने में डोनाल्ड ट्रंप ने जल्दबाजी प्रदर्शित की है।
विश्व पटल पर भारत अकेला देश नहीं है जो कि अमेरिका के आयात शुल्क का दबाव को झेल रहा है,वरन् दुनिया में ऐसे और भी 90 देश हैं, जोकि अमेरिका के मनमाने आयात शुल्क के दबाव का सामना कर रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सदैव भारत को अपना दोस्त देश कहकर पुकारा है। यक्ष प्रश्न है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दोस्त देश के साथ ऐसा दगा क्यों किया है? उल्लेखनीय तथ्य है कि विगत अनेक वर्षों से अमेरिका वस्तुत: भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा है। विगत वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के मध्य कुल व्यापार 131.84 अरब डॉलर का रहा। भारत द्वारा अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया गया और भारत द्वारा अमेरिका से 41.8 अरब डॉलर का सामान आयात किया गया। बाजार व्यवस्था की जानकारों के मुताबिक भारत पर अमेरिका द्वारा तकरीबन 30 प्रतिशत आयात शुल्क आयाद करने से भारत की जीडीपी में तकरीबन 0.20 प्रतिशतकी कमी आ सकती है। क्योंकि भारत द्वारा किए जाने वाले कुल वैश्विक निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी केवल 2.4 प्रतिशत की रही है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कुछ शिथिल हो सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था इतनी ताकतवर है क्योंकि भारत तकरीबन चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का देश है भारत।
बैंक आफ अमेरिका और जेपी मॉर्गन जैसे वित्तीय संस्थान पहले से ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जबरदस्त चेतावनी दे चुके हैं, अगर अमेरिकन टैरिफ नीति लंबे वक्त तक जारी रही तो फिर अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ घट सकती है। अमेरिका में खपत गिर सकती है, जिससे खुदरा बाजार और सेवा सेक्टर अत्यंत प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकन अर्थव्यवस्था पहले से ही चौपट पड़ी हुई है, क्योंकि अमेरिका के ऊपर तकरीबन 37 ट्रिलियन डॉलर का कर्जा सिर पर चढ़ गया है। अमेरिका को अगेन ग्रेट बनाने की दिगभ्रमित सनक में कहीं डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की अर्थव्यवस्था का रहा सहा बंटाधार ही ना कर दें। अमेरिका-भारत टकराव से उत्पन्न वातावरण में भारत अपनी ही करेंसी में चीन, रूस, ब्राजील, साउथ अफ्रीका और ईरान सरीखे मुल्कों के साथ अपना व्यापार बढ़ा सकता है। हालांकि विस्तारवादी चीन के साथ भारत के बुनियादी मतभेद कायम हैं, लेकिन भारत-चीन के द्वारा परस्पर व्यापार में निरंतर वृद्धि की जा सकती है।
विश्व व्यापार संगठन के स्थापित नियमों ने दुनिया की महाशक्तियों का विशेष कर नव साम्राज्यवादी शक्तियों का बहुत अधिक दबाव बर्दाश्त किया है, इसके बावजूद भी वैश्विक व्यापार में शानदार प्रगति का दीदार हुआ है। दुर्भाग्य से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अप्रैल 2025 में अंजाम दिए गए टैरिफ ऐलान ने विश्व व्यापार के संतुलन को एकदम बिगाड़ कर रख दिया।

