Tuesday, March 17, 2026
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दहलीज लांघ आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

  • महिलाओं का ग्रुप बना कर ग्रामोद्योग हो रहा मजबूत

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महिलाएं क्या नही कर सकती। शहरी क्षेत्र की महिलाएं जहां एक शहर से दूसरे शहर जा कर नौकरी और बिजनेस करने में लगीं है। वहीं महिलाओं का ऐसा ग्रुप भी है जो गांव की उन महिलाओं को एकत्र कर रोजगार के साधन उपलब्ध करा रहा है, जो शिक्षा की कमी या अवसर की कमी के कारण दूसरो पर निर्भर हैं। ऐसी ही दतावली की एक महिला है, जो महिलाओं को स्वयं सहायता समूह बना कर रोजगार के न केवल अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत भी कर रही है।

महिला कल्याण की तमाम योजनाएं भले चल रही हो, लेकिन जिस तरह से महिलाओं ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है वो काबिले तारीफ है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के हजारों समूह इस वक़्त काम कर रहे हैं। जो 10 महिलाओं से शुरू होकर 100 से अधिक महिलाओं के ग्रुप में तब्दील हो गए हैं। दतावली गांव की सोहनवीरी का कहना है कि 10 महिलाओं के साथ 250 रुपये के साथ ग्रुप शुरू किया था, जो बढ़कर 140 तक संख्या पहुंच गई है।

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कुछ साल पहले तक सोहनवीरी देवी के पास अपना खुद का घर नहीं था, जब वो गांव के सेक्रेटरी के पास गईं तो उन्होंने कहा कि आज तुम्हारे पास घर नहीं है, कल दूसरों के लिए घर बनवाओगी। आज सोहनवीरी ने 100 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया है। रजपुरा ब्लॉक के दतावली गांव की सोहनवीरी को महिला सेक्रेटरी महिला समूह बनाने के लिए कहा बस फिर क्या था?

सोहनवीरी ने अपने गांव की महिलाओं को साथ लिया और महिलाओं का समूह बनाया। आज उनके साथ लगभग 140 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं और जो महिलाओं के मुद्दे पर काम कर रही हैं। इतना ही नहीं सोहनवीरी का मकान भी बन गया है और गरीब महिलाओं का रोजगार देकर मकान बनवा रही हैं। उन्होंने उन गरीब महिलाओं को साथ लिया जिनके हाथ में हुनर था। जिस महिला पर सिलाई आती है उसे कपड़े सिलने को थे, जिसे अचार बनाने का काम आता है।

उसे वही काम सौंपा आज लगभग इस महिला समूह में 140 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं और सभी को रोजगार मिला हुआ है और काफी खुश हैं। सोहनवीरी जैसी तमाम महिलायें हैं जो गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में लगी हुई है। इन महिलाओं के समूह अचार, पापड़, जूस, जैम, सिरका के अलावा मोतियों के आभूषण और खाने की तमाम चीजे बना कर बाजार मे बेच रही है।

महिलाओं के समूह को सोहनवीरी ट्रेनिंग भी दिलवाती है। उनको नई तकनीक से परिचय करवाती है। शास्त्रीनगर की सुनीता गोयल भी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में लगी हुई है। मेरठ के तमाम गांव में इस तरह की योजना महिलाएं चला रही है।

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