Tuesday, March 17, 2026
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यार्ड है नहीं…कैसे हो राजस्व वसूली?

  • थानों में पुलिस नहीं खड़े करती सीज किये वाहनों को, आरटीओ परेशान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आरटीओ मेरठ आॅफिस का पूरे वर्ष का राजस्व वसूली लक्ष्य 600 करोड़ का हैं। ऐसे में राजस्व वसूली सरकार की प्राथमिकता में से एक हैं। आरटीओ आॅफिस का लक्ष्य तो परिवहन मंत्रालय ने दे दिया, लेकिन वाहनों को सीज कर कहां रखा जाए? इसकी कोई व्यवस्था नहीं की।

क्योंकि पुलिस थानों में वाहनों को सीज कर पहले रखा जाता था, लेकिन पुलिस ने भी सीज वाहनों को थाने में खड़ा करने से इनकार कर दिया हैं, जिसके चलते राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं। जो राजस्व वसूली का लक्ष्य आरटीओ मेरठ को दिया गया है, वह धड़ाम होते हुए दिखाई दे रहा हैं। यह ऐसी समस्या है, जिसे अधिकारी शासन स्तर पर उठा भी नहीं पा रहे है और राजस्व का लक्ष्य भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

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चालान मात्र करने से वाहन चालक दबाव में नहीं आता हैं। चालान होने के बाद एक माह या तीन माह बाद ही चालान का पैसा जमा करता हैं, तत्काल नहीं। जिस वाहन को सीज कर थाने में बंद कर दिया जाता हैं, उस वाहन स्वामी को तीन दिन के भीतर वाहन को छुड़ाने के लिए सीज से मुक्ति करानी होती हैं। ये तभी संभव होगी, जब टैक्स व लगाया गया जुर्माना जमा करा दिया गया होगा?

इस तरह से सीज का जो सिस्टम पहले मेरठ में था, वह खत्म हो गया हैं। अब वाहन को आखिर सीज करें तो करें कहां पर? थाने में सीज वाहन को खड़ा कराने को कोई पुलिस वाला तैयार नहीं हैं। इसके लिए तमाम पत्र व्यवहार किये गए, लेकिन पुलिस वाहन खड़े कराने के लिए हाथ खड़े कर चुकी हैं। अब वाहन को यदि 40 किमी की दूरी पर पकड़ा गया है तो वहां से क्या सीज किये वाहन को आरटीओ आॅफिस के ग्राउंड में लाना मुनासिब हैं?

इस तरह की दिक्कत हो रही हैं, जिसका प्रभाव राजस्व वसूली पर सीधे पड़ रहा हैं। पहले ये होता था कि जिस थाना क्षेत्र में वाहन मिलता था, वहीं पर सीज कर दिया जाता था। बाद में कागजी प्रक्रिया होती रहती थी। लंबे समय से इसी तरह से प्रक्रिया चलती थी, लेकिन पिछले दो वर्ष से थानों में वाहनों को खड़ा कराने से पुलिस ने मना कर दिया हैं, जिसके बाद बड़ी समस्या खड़ी हो गयी हैं। दरअसल, आरटीओ ही एक ऐसा विभाग है, जो जीएसटी और आबाकारी के बाद तीसरा ऐसा विभाग है जो सर्वाधिक राजस्व प्रदेश सरकार को देता हैं, मगर दो वर्षों से राजस्व वसूली में आरटीओ पिछड़ रहा हैं।

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