- योगेश के खिलाफ पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, जा चुका है जेल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कैंट बोर्ड के सफाई निरीक्षक योगेश यादव का मुश्किलें पीछा नहीं छोड़ रही है। कभी सीबीआई ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था, तो तत्कालीन सीओ नवेन्द्र नाथ ने उसकी बर्खास्तगी कर दी थी। हालांकि बर्खास्तगी बीच में कार्यवाहक सीईओ हरेंद्र सिंह ने बहाली कर दी थी, लेकिन अब वर्तमान सीईओ ज्योति कुमार ने योगेश यादव को फिर से निलंबित कर दिया है।
इस बार योगेश यादव पर आरोप लगा है कि सीईओ के नाम पर कुछ लोगों से घूस की मांग की गई थी। इसी तथ्य के आधार पर योगेश यादव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। दरअसल, योगेश यादव कैंट बोर्ड में सफाई निरीक्षक के पद पर तैनात है। पिछले दिनों योगेश यादव ने कूड़ा कलेक्शन पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप तत्कालीन सीईओ नवेन्द्र नाथ पर लगाए थे।
नवेन्द्र नाथ को भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई थी। जब नवेन्द्र नाथ का तबादला हुआ तो जाते हुए नवेन्द्र नाथ ने सफाई निरीक्षक योगेश यादव को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था। योगेश यादव को बाद में बहाली तो मिल गई थी, लेकिन मुश्किलें अभी भी पीछा नहीं छोड़ रही है। नए सीईओ ज्योति कुमार ने योगेश यादव को फिर से भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा कर दिया हैं।
योगेश यादव पर निलंबन की जो गाज गिरी है, उसमें सीईओ के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आ रहा हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है हि कौन व्यक्ति है, जिससे योगेश ने रिश्वस्त मांगी हैं। इसी को सीईओ ने आधार बनाते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।
कैंट बोर्ड में सफाई निरीक्षक योगेश यादव सुर्खियों में बने हुए हैं। सबसे पहले योगेश के खिलाफ सीबीआई ने कार्रवाई की थी। उसे सीबीआई ने पहले गिरफ्तार किया और फिर जेल भेज दिया था। जब भी योगेश पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और वर्तमान में भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।
कैंट के सिविल क्षेत्र को निकाय में शामिल करने की कवायद तेज
कैंट बोर्ड के सिविल क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल करने के लिए रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रदेश सरकार से आख्या मांगी गई है, जिस पर शासन ने सभी डीएम स्तर से रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मेरठ कैंट बोर्ड महत्वपूर्ण बोर्ड है। कैंट के सिविल क्षेत्रों में बड़ी आबादी निवास करती है, पर कैंट बोर्ड के पास सीमित संसाधन में कम बजट होने से मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है। कैंट बोर्ड को मिलने वाली ग्रांट लगातार कम हो रही है, जो बजट मिलता है उसमें ही काम चलाया जाता है तथा तनख्वाह बोर्ड कर्मचारियों का बामुश्किल काम चल पाता है ।
आय बढ़ाने के साधन भी बोर्ड के पास नहीं है । उस पर केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ भी यहां की जनता को नहीं मिल पा रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार ने जनता के हित के लिए जो भी योजनाएं चला रखी हैं, उनका लाभ कैंट क्षेत्र की जनता को नहीं मिल पाता हैं।
विधायक व सांसद निधि से काम कराने में भी कैंट बोर्ड की अनापत्ति समेत कई औपचारिकताएं हैं, जिसके लिए कैंट बोर्ड विधायक निधि के काम कराने के लिए अनुमति नहीं देता है। ऐसे में कैंट के सिविल क्षेत्र में रहने वाली आबादी नगर निगम शामिल होने की लंबे समय से मांग करती है। क्षेत्रों में रहने वाली जनता की राय क्या हैं?
इसको लेकर भी जानकारी समय समय पर मिलती रही हैं। कैंट बोर्ड के सिविल एरिया को नगर निगम में शामिल करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मई में रक्षा मंत्रालय ने मुख्य सचिव से आख्या मांगी थी, जिस पर शासन ने डीएम से स्तर से रिपोर्ट देने के लिए कहा हैं? अब डीएम स्तर से इसकी रिपोर्ट शासन को जाएगी, जिसके बाद इस दिशा में तेजी आएगी।

