Monday, March 30, 2026
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किसानों की हितैषी है योगी सरकार: लक्ष्मीनारायण

  • खेतों में एक भी गन्ना खड़ा रहने तक मिल बंद नहीं होगी
  • मेरठ में पहली बार किसान सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यूपी सरकार में कैबिनेट व गन्ना विकास मंत्री योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पहली बार मेरठ पहुंचे। यहां पर उन्होंने किसान सम्मेलन में हिस्सा लिया और किसानों की समस्याओं को लेकर केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व गन्ना मिलों पर किसानों को संबोधित किया।

शनिवार को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के नेताजी सुभाष सभागार में किसान सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण सिंह ने केन्द्र व राज्य सरकारों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मैंने इस भूमि को हमेशा एक मंदिर की तरह माना है, जिस तरह मंदिर में एक पुजारी आस्था से पूजा करता है। मुजफ्फरनगर से लेकर गाजियाबाद तक मैं इसी तरह इस भूमी की पूजा करता हूं।

किसान का बेटा तो कोई भी हो सकता है, लेकिन मैंने तो कोई काम ऐसा नहीं है जो नहीं किया। मैंने गाय-भैंसों को चारा भी डाला है। अपने खेत में गन्ना व गेहूं बोया भी है काटा भी है। मेरठ से अलग होकर बागपत-गाजियाबाद जिले जरूर बन गए हैं, लेकिन उनकी अहमियत आज भी मेरठ के नाम से ही है। मेरठ चौधरी चरण सिंह की कर्म भूमि रही है, मैंने यहां के सर्किट हाऊस में भी चौधरी साहब को रुकते हुए देखा है। यहां के बुुजुर्गो को भी उनसे वार्ता करते देखा है।

योगी आदित्यनाथ किसानोंं का करते हैं दर्द महसूस

अपनी 36 साल की राजनीति में यदि किसानों का चौधरी चरण सिंह के बाद कोई हितैशी देखा है तो योगी आदित्यनाथ को देखा है। मैंने उन्हें किसानों का दर्द महसूस करते देखा है, जब वह मुख्यमंत्री बने तो आप कल्पना कीजिए, जिन्हें लोग धरती पुत्र कहते थे, जिन्हें हम बड़े सम्मान से बुलाते थे शपथ लेने के बाद उनका सबसे पहले प्रस्ताव था कि अयोध्या में जो बम विस्फोट में पकड़े गए हैं।

उन्हें रिहा कर दिया जाए, लेकिन योगी का प्रस्ताव यह था कि किसानों का 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ कर दिया जाए। इसलिए मैंने कहा कि योगी के अंदर किसानों को लेकर एक टीस है। वह खुद भी बड़े किसान है, गोरखपुर में योगी जी के मठ में 15 सौ एकड़ गन्ना है।

संवादहीनता न हो तो परिस्थिति हो जाती है विकराल

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मेरा यह मानना है कि परिस्थिति तब विकराल होती है। जब आपस में संवादहीनता हो जाती है। यदि संवादहीनता न हो तो प्रत्येक परिस्थिति का हल जरूर निकलता है। दुनिया की हर समस्या का समाधान संवाद से ही निकला है। किसी भी परिस्थिति में किसानों के साथ बैठकर गन्ना किसानों की समस्या का समाधान करने की कोशिश जरूर होगी। कभी हमारे बीच संवादहीनता नहीं होगी, किसी भी परिस्थिति में।

केन्द्र और राज्य सरकार की गिनाई उपलब्धियां

जितना 2002 से लेकर 2017 तक धान व गेहूं खरीदा गया उतना पिछले चार साल में उत्तर प्रदेश में खरीदा गया। योगी व मोदी निश्चित रूप से किसानों को लेकर पूरी तरह सचेत है, किसानों की सभी समस्याओं को सीएम के सामने रखूंगा। हर समय किसानों के लिए काम करने का प्रयास करने की बात कही।

आरक्षण पर भी बोले

केन्द्र में आरक्षण की स्थिति को लेकर जब 18 दिनों तक मुरादाबाद में रेल रोकी गई थी, होली के अवसर पर मायावती की सरकार थी। 18 दिन तक रेलवे ट्रैक नहीं खुला तो सुप्रीम कोर्ट ने आदेश कर दिये कि या तो सरकार इस्तीफा दे या टैÑक खुलवाए। मुझे कृषि मंत्री रहते हुए कहा गया कि मैं बात करूं, तो मैंने कहा कि मैं अकेला ही जाऊंगा।

मुझे बताया गया कि वहां बड़ी विस्फोटक स्थिति है। तो मैंने कहा कि अपने मारेंगे तो छाया में डालेंगे, जाऊंगा तो अकेला ही। दो घंटे तक किसानों ने मेरी क्लास ली, उसके बाद मैंने पूछा कि अब क्या करना है तो किसान बोले अब क्या ट्रैक खोल रहे है। इसलिए मैं आश्वास देता हूं कि कोई क्षण ऐसा नहीं होगा जब आपसे आंखें चुराई जाएंगी।

गन्ना मिलों का समय बढ़ाया जाएगा

यदि हम अपनी मिलों को 15 अक्टूबर से 30 अप्रैल तक चलाएं तो हमारी रिकवरी कम नहीं होगी। जब रिकवरी अच्छी होगी तो मिलों को घाटा भी नहीं होगा, किसनों को भी समय पर दाम मिलेगा और कीमत भी अच्छी होगी। इस समय मिले 20 मई व 15 जून तक चल रहीं है, इसलिए मिलों की क्षमता बढ़ाई जाए और बंद पड़ी मिलों को चालू करें। क्षमता बढ़ानें के लिए 12 सौ पीसीबी की जगह 5 हजार पीसीबी की मशीनें लगा दी जाए तो यह संभव है कि 30 अप्रैल तक गन्ने की तराई हो जाएगी।

जब तक एक भी गन्ना खड़ा है मिल बंद नहीं होगी

सबसे ज्यादा गन्ना जहां है, सबसे ज्यादा रिकवरी जहां है, उस जगह ही अगर पेमेंट न हो तो इससे ज्यादा आशचर्य की बात नहीं हो सकती। मैं आप लोगों से मिल बैठकर बात करूंगा, हर जिले के किसानों की समस्या दूर कर सकूं। मुझे जब खबर मिलती है कि यह मिल बंद हो गई, वह मिल बंद हो गई तो मैं वादा करता हूं कि जब तक एक गन्ना खेत में खड़ा होगा कोई मिल बंद नहीं होगी।

गन्ने की कीमत कीमत बढ़ाने से किसानों का भला नहीं

भले ही गन्ने की कीमत कम हो, लेकिन उसका भुगतान हो जाए तो इससे किसानों की संपन्नता बढ़ेगी। हम कोशिश करेंगे कि गन्ने का क्षेत्रफल व उत्पादन किस तरह बढ़ाया जा सकता है। एक बात यह है कि गन्ने की कीमत कितनी भी बढ़ा दी जाए, लेकिन समय पर पेमेंट न हो तो उससे किसानों को भला नहीं हो सकता। किसानों से बातचीत करके उनके विचारों पर सहमती बनाते हुए सीएम के सामने किसानों की बात रखूंगा।

पत्रकारों के सवालों पर भड़के कैबिनेट मंत्री

सर्किट हाऊस में कैबिनेट व गन्ना मंत्री ने पत्रकारों को संबोधित किया। इस दौरान जब पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि मिलों पर कितना गन्ना भुगतान बकाया है तो वह भड़क गए। इस दौरान पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब नहीं दिया गया। शनिवार को यूपी सरकार के गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण मेरठ पहुंचे। यहां उन्होंने सर्किट हाऊस में पत्रकारों को संबोधित किया।

जब उनसे सवाल किया गया कि गन्ना किसानों का मिलों पर कितना बकाया है तो वह जवाब नहीं दे सके। सरकारी गन्ना मिल मोहिउद्दीन पुर ने भी गन्ना किसानों का भुगतान रोक रखा है क्यों इसपर गन्ना मंत्री बोले कि हमारी सरकार ने किसानों का 54 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। जो बाकि होगा कर दिया जाएगा।

लेकिन उनके इस जवाब पर पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया, कहा कि इस मिल ने अभीतक केवल 30 प्रतिशत भुगतान किया है। 26 प्रतिशत भुगतान किनोनी शुगर मिल, 20 प्रतिशत भुगतान सिंभावली मिल का है। इसपर मंत्री ने कहा कि क्या पिछली सरकार का एक रूपया भी बाकी है, सरकार की 27 मिले है सभी में एक रूपया भी पिछला बकाया नहीं है।

गन्ना भुगतान के लिए लगाई क्लास

प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चैधरी ने सर्किट हाउस में विभागीय समीक्षा की। गन्ना किसानों को त्वरित गन्ना मूल्य का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए चीनी मिल प्रबंधकों की क्लास लगा दी। उप गन्ना आयुक्त, मेरठ राजेश मिश्र, सहारनपुर डा. दिनेश्वर मिश्र, मुरादाबाद अमर सिंह के साथ समस्त जिला गन्ना अधिकारी परिक्षेत्र मेरठ, जिला गन्ना अधिकारी बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर एवं चीनी मिलों के प्रबंधकों को फटकार लगाई।

मेरठ की चीनी मिल दौराला, सकौती, मवाना, नंगलामल, साबितगढ़, अगौता, बुलंदशहर, परिक्षेत्र-सहारनपुर की चीनी मिल खतौली, मंसूरपुर, टिकौला, तितावी, रोहाना कलॉ एवं परिक्षेत्र-मुरादाबाद की चीनी मिल धामुपर, धनौरा, स्योहारा, बरकतपुर, चांदपुर को निर्देशित किया गया कि 15 जून तक प्रत्येक दशा में शत प्रतिशत गन्ना भुगतान करने के लिए दबाव बनाया।

साथ ही अन्य मिलों को अन्य संशाधनों से धनराशि जुटाकर वर्तमान पेराई सत्र 2021-22 का गन्ना मूल्य भुगतान आगामी पेराई सत्र 2022-23 से पूर्व ही शत प्रतिशत भुगतान किए जाने के निर्देश दिए गए। अन्यथा की स्थिति में समयान्तर्गत गन्ना मूल्य भुगतान न किये जाने पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाए जाने की चेतावनी दी गई तथा जो चीनी मिल वर्तमान में गन्ना पेराई कार्य कर रही है,

उन्हें समस्त गन्ना पेराई किए जाने के पश्चात ही चीनी मिल बंद किए जाने के निर्देश दिए गए एवं मंत्री ने बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों एवं चीनी मिलों के अध्यासी/प्रधान प्रबन्धक को सम्बोधित करते हुए कहा कि आगामी पेराई सत्र 2022-23 के संचालन करने के लिए चीनी मिलों की मरम्मत एवं रखरखाव का कार्य उत्कृष्ट गुणवत्ता एवं मानकों के आधार पर किया जाये।

14 दिन में भुगतान का नियम

गन्ना मंत्री से पूछा गया कि जब 14 दिनों में भुगतान करने का नियम है तो फिर कितने दिनों में पेमेंंट हो रहा है, पूरे मेरठ मंडल में कुल 54 प्रतिशत भुगतान हुआ है। 52 सौ करोड़ रूपये में से महज 29 सौ करोड़ का भुगतान हुआ है। इसपर मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने सबसे ज्यादा भुगतान किया है। वहीं पत्रकारों ने तीखा सवाल दागा कि अगर सरकार ने भुगतान किया है तो किसानों ने भी उसे गन्ना दिया है। मंत्री ने कहा कि 1 लाख 3 हजार करोड़ का भुगतान उनकी सरकार द्वारा किया गया है।

मैं बकाया देने थोड़े ही आया हूं

पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि मेरठ मंडल के गन्ना किसानों का कितने करोड़ रुपये बकाया है, इसपर मंत्री बोले कि मिल के शुरू होने से पहले सारा भुगतान कर दिया जाएगा। सरकार गन्ना किसानों का एक-एक पैसा देने के लिए वचनबद्ध है। कितना बकाया है पर मंत्री बोले कि मैं बकाया देने थोड़े ही आया हूं।

शासन से गन्ना अधिकारी को जानकारी देने पर रोक क्यों?

पत्रकारों ने गन्ना मंत्री से पूछा कि जिला गन्ना अधिकारी किसानों के बकाया भुगतान पर चुप्पी साध लेते है क्यों। इसपर मंत्री बोले कि उनकी जगह मैं जवाब देने आया हूं, लेकिन शासन ने गन्ना अधिकारी को क्यों जानकारी देने से रोका है इसपर वह चुप्पी साध गए। यह बात सही है कि गन्ना भवन से किसानों के बकाया भुगतान की कोई जानकारी नहीं दी जाती है। यहां तक की मीडिया से सच्चाई छिपाई जा रही है ऐसा क्यों।

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