जनवाणी ब्यूरो
नई दिल्ली: राजधानी में कोरोना संक्रमण की चौथी लहर सबसे खतरनाक साबित हो रही है। हर दिन बढ़ते मामलों के साथ अस्पतालों में भी बेड की कमी होने लगी है। आलम यह है कि दिल्ली के 17 निजी अस्पतालों में अब सभी बेड भर चुके हैं।
इसमें राजधानी के सबसे प्रमुख मैक्स और बीएलके जैसे अस्पताल भी शामिल हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि केंद्र और दिल्ली सरकार के अस्पतालों में अभी कोरोना बेड उपलब्ध हैं।
दिल्ली कोरोना एप पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अस्पतालों में कोविड 19 के मरीजों के लिए कुल 12,226 बेड हैं। इनमें सोमवार दोपहर तक 7,066 बेड भरे हुए हैं। जबकि, 5160 खाली हैं। लेकिन 17 बड़े निजी अस्पतालों में एक भी बेड खाली नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि इस समय जिन मरीजों में कोरोना के गंभीर लक्षण आ रहे हैं। वह निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि इन अस्पतालों में बेड तेजी से भर रहे हैं।
उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को लोगों से अपील की थी कि वह जरूरत पड़ने पर ही अस्पताल में भर्ती हों। साथ ही यह भी कहा था की सभी लोगों को सिर्फ निजी अस्पतालों का रुख करने की जरूरत नहीं है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में भी बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
जानकारी के अनुसार, अग्रसेन अस्पताल ( द्वारका), बीएलके अस्पताल, जयपुर गोल्डन अस्पताल, मैक्स (शालीमार बाग), वेंकटेश्वर अस्पताल, महाराजा अग्रसेन अस्पताल (पंजाबी बाग), सरोज सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल, कालरा अस्पताल, होली फैमिली अस्पताल, भगत चंद्र अस्पताल, आयुष्मान अस्पताल, गोयल अस्पताल, दिल्ली हार्ट इंस्टीट्यूट, मलिक अस्पताल, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, विमहन्स अस्पताल और रिवाइव अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए बेड उपलब्ध नहीं है।
पिछले वर्ष के कोरोना काल में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई थी कि कोरोना को प्राथमिकता मिलने के कारण दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। लेकिन इस वर्ष इसके लिए काफी प्रयास किये गये हैं जिसका परिणाम भी सामने दिखाई पड़ रहा है।
इस समय नॉन कोविड-19 मरीजों के लिए 1692 आईसीयू बेड राजधानी में बनाए जा चुके हैं। सोमवार दोपहर तक की स्थिति के अनुसार, इनमें 1256 बेड भरे हुए हैं, जबकि 436 अभी रिक्त हैं।

