- होली का त्योहार नकदीक होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन मौन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मावे के नाम पर बेचे जा रहे सिंथेटिक व केमिकल युक्त पदार्थ जनता के लिए किसी जहर से कम नहीं है। सरधना क्षेत्र के कई गांवों में यह गोरखधंधा सालों चल रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कभी इसपर अंकुश लगाने की कोशिश नहीं की गई।

सरधना कस्बे के कई इलाकों व आसपास के गांवों में मावे के नाम पर सालों से जहर तैयार होता आ रहा है। त्योहारों पर इसकी मांग कई गुना बढ़ जाती है, राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण इसकी सप्लाई आसानी से होती है। दिल्ली में ही हर साल होली के त्योहार पर लाखों टन सिंथेटिक मावे की खपत होती है, जिसकी पूर्ती मेरठ के सरधना क्षेत्र से ही होती है। सिंथेटिक मावे को तैयार करने के लिए केमिकलों का इस्तेमाल होता है, यह केमिकल आसानी से पंसारी की दुकानो पर उपलब्ध है।
दूध की कमी के बावजूद कैसे होता है मावा तैयार
दुधारू पशुओं की कमी के कारण दूध की भी कमी है, बावजूद इसके हर साल त्योहारों के मौसम में मिठाइयों की मांग आसानी से पूरी होती है। मावे से बनी बर्फी, कलाकंद, गाजर का हलवा जैसी तमाम मिठाइयों में मावे का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इनको तैयार करने के लिए सिंथेटिक मावे का प्रयोग होता है। सिंथेटिक मावे को आर्डर पर बनाया जाता है, इसमें भी कई तरह की वैराइटियां होती है जिनकी कीमते भी अलग-अलग होती है।
शरीर के लिए घातक
सिंथेटिक मावे में प्रयोग होने वाले एसेंस व केमिकल से बने रंगों का इस्तेमाल होता है। यह केमिकल इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक होते है, इनके सेवन से किडनी से लेकर आंते तक प्रभावित होती है। बच्चों के स्वास्थ्य पर भी इन केमिकल के गंभीर परिणाम होते है जिनका पता कुछ समय बाद चलता है। एक बार केमिकल शरीर में प्रवेश कर जाए तो वह अपना असर दिखाना शुरू कर देता है, हालांकि यह असर फौरी तौर पर नहीं होता लेकिन जबतक इसका पता चलता है शरीर गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाता है।
अंधेरे में होती है सिंथेटिक मावे की सप्लाई
सरधना में बनने वाला सिंथेटिक मावा दूर-दूर तक जाता है, लेकिन यह किसी की पकड़ में क्यों नहीं आता यह बड़ा सवाल है। बताया जा रहा है कि दिन में मावा बनने के बाद इसे आर्डर सप्लाई करने के लिए रात 12 बजे से सुबह 9 बजे का समय होता है। इसके पीछे वजह यह है कि स्वास्थ्य व खाद्य विभाग की टीमे दिन के समय ही सड़कों पर चेकिंग करती है, शाम होने के बाद टीमे अपनी ड्यूटी पूरी करके वापस चली जाती है जिसके बाद इस जहर की सप्लाई की जाती है।

