- किंग बेकरी पर ब्रेड और बंद की पैकिंग पर नहीं एक्सपायरी डेट
- पब्लिक के साथ किया जा रहा खिलवाड़, एक ही दिन में खराब हुई ब्रेड
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किंग बेकर्स द्वारा लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां बेकरी पर बे्रड, बंद समेत कई खाद्य पदार्थ बिना एफएसएसएआई नंबर के बेचे जा रहे हैं। यहां न तो प्रोडक्ट के ऊपर नंबर पड़ा है और न ही उस पर कोई एक्सपायरी डेट है। जबकि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आॅफ इंडिया के नियमानुसार पैकिंग उत्पाद पर नंबर और एक्सपायरी डेट जरूरी है, लेकिन यहां दोनों ही नहीं है। इसे लेकर जनसुनवाई पोर्टल पर भी किंग बेकर्स की शिकायत की गई है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एफएसएसएआई) के नियमानुसार कोई भी पैकट प्रोडक्ट बिना नंबर के बाजार में नहीं बेचा जा सकता, लेकिन यहां पीएल शर्मा रोड स्थित किंग बेकर्स पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है जिससे आम पब्लिक की जान के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां बेकरी पर खुलेआम बे्रड को प्लेन पन्नी से पैक कर सील लगाकर बेचा जा रहा है। इस पर न तो एफएसएसएआई नंबर है और न ही एक्सपायरी डेट पड़ी है। जबकि बे्रड पर यह दोनों नंबर ही जरूरी है।
आमतौर पर ब्रेड तीन दिन तक के लिये होती है, लेकिन इस पर कोई डेट नहीं है। जिससे ग्राहकों के साथ धोखा किया जा रहा है। इस संबंध में एक शिकायत भी जनसुनवाई पोर्टल पर की गई है। वहीं, इस संबंध में फूड इंस्पेक्टर अरुण राणा का कहना है कि इस प्रकार से किसी भी खाद्य पदार्थ को पैकिंग करके नहीं बेचा जा सकता। अगर कोई पदार्थ पारदर्शित पॉलीथिन में सील लगाकर पैक किया गया है तो उस पर एफएसएसएआई नंबर और एक्सपायरी डेट आवश्यक है। इस प्रकार से पदार्थ को बेचा जाना नियम विरुद्ध है। इसमें दंडात्मक कार्रवाइ की जायेगी।
जनसुनवाई पोर्टल पर पहुंची किंग बेकर्स की शिकायत
पीएल शर्मा रोड निवासी अंकुर ने इस संबंध में एक शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर की है। शिकायत नंबर 40013822005894 पोर्टल पर दर्ज हो गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि किंग बेकरी पर मिलावटी पदार्थ से बनाई ब्रेड, बंद और पिज्जा बेस पाव को पारदर्शित पन्नी में बिना कोई बैच कोड उत्पादन एक्सपायरी डेट और एमआरपी लिखे पैक करके बेचा जा रहा है। उस पर किसी प्रकार को कोड नहीं है और सील लगी है। उन्होंने बताय कि 17 मार्च की रात को उन्होंने एक ब्रेड का पैकेट 35 रुपये देकर खरीदा था।

जिस पर कोई भी डेट या बैच कोड और एमआरपी तक नहीं थी अगले दिन 18 मार्च को होली रंग का त्योहार था। जब बच्चों ने घर पर सुबह पैकेट खोला तो ब्रेड में फफूंदी लगी थी और बहुत ही तीखी सड़ांध आ रही थी तो मैंने स्वयं 19 मार्च को फफूंदी लगी ब्रेड को ले जाकर दिखाया तो किंग बेकरी के स्टाफ एवं मालिक ने मुझे यह बोला कि ब्रेड की एक ही दिन की लाइफ होती है और हस्ते हुए कहा कि वापस या बदली नहीं जायेगी। पीड़ित ने इस संबंध में एक शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर संबंधित बेकरी के खिलाफ की है। इस प्रकार के खाद्य पदार्थों के सेवन से किसी की जान तक जा सकती है।
क्या है एफएसएसएआई?
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का गठन भारत सरकार ने 2006 में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत किया था। जिसको 1 अगस्त, 2011 में केंद्र सरकार के खाद्य सुरक्षा और मानक विनिमय (पैकेजिंग एवं लेबलिंग) के तहत अधिसूचित किया गया था। एफएसएसएआई का काम लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने एवं इसके तय मानक को बनाए रखना है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक, 2006 के तहत की गई है, जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में अब तक खाद्य संबंधी मुद्दों को संभालने वाले विभिन्न कृत्यों और आदेशों को समेकित करता है। एफएसएसएआई को खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानकों को निर्धारित करने और मानव उपभोग के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनके निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात को विनियमित करने के लिए बनाया गया है। सभी को इसका रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है।
ये हैं पैक्ड पदार्थ के मानक
- पैकिट के ऊपर एफएसएसएआई नंबर अंकित होना चाहिए।
- पदार्थ की एक्सपायरी डेट अवश्य लिखी होनी चाहिए।
- पैकिट के ऊपर उसकी एमआरपी भी अंकित होनी चाहिए।
- उसे निर्माण में प्रयोग होने वाली सामग्री भी लिखी हो।

