- फलफूल रहा नकली मावे और दूध का कारोबार
- हर बार रिपोर्ट में कई सैंपल आते हैं फेल, लेकिन नहीं होती कार्रवाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में दूध के नाम पर सफेद जहर की बिक्री धड़ल्ले से कि जा रही है। पश्चिमी यूपी में खुलेआम सफेद दूध का काला कारोबार चल रहा है और सिस्टम की सुस्ती इस पर लगाम लगाने में असफल है। कई बार मिलावटी सैम्पल पकड़ने के बाद भी किसी के खिलाफ अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिसके चलते मिलावटखोरों का राज कायम है।
शहर में एकाध नहीं, बल्कि कई हजार लीटर ऐसा दूध सप्लाई होता है, जो सर्वाधिक संदेह के घेरे में रहता है। सिस्टम इस पर अंकुश तो लगाना दूर, सैंपलिंग तक में असहाय नजर आता है। कई बार तो सैंपलिंग तक फेल साबित होती है। बावजूद इसके यहां किसी का ध्यान नहीं है।

शहर के खरदौनी, जानी, बना मसूरी, मवाना, रोहटा और सरधना ऐसे इलाके है। जहां पर मिलावटी दूध का कारोबार फलफूल रहा है। असल में मिलावटी दूध के कारोबारियों ने अपना नेटवर्क इतना मजबूत कर दिया है कि वे इस दूध की सप्लाई न सिर्फ पश्चिमी यूपी बल्कि सूबे के अन्य क्षेत्रों में भी बेखौफ कर चांदी काट रहे हैं। पूरे शहर की बात करें तो यहां लाखों लीटर दूध की रोज खपत होती है।
ऐसे में कितना लीटर दूध शुद्ध है या नहीं है। यह कह पाना मुश्किल है, लेकिन खाद्य एवं औषधि निरीक्षकों की मानें तो उनके विभाग ने कई बार दूध के सैंपल लिये जो मिलावट वाले साबित भी हुए हैं। ऐसे में खुद ही लोगों को अब सतर्क होने की आवश्यकता है। दूध को पूर्ण आहार माना गया है।
दूध में हर वो तत्व पाया जाता है, जिसकी इनसान को जरूरत होती है। आज दूध के उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर वन है। फिर भी लोगों को शुद्ध दूध पीने को नहीं मिलता। अधिकांश लोग डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, यूरिया और पानी मिला दूध पीते हैं। मिलावटी दूध के कई दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।
इस मामले को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन के इंस्पेक्टर अनंत कुमार का कहना है कि विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर सैंपल लिये जाते हैं। अभी बीते दिनों में कई पदार्थों की रिपोर्ट आई हैं। जिसमें कई पदार्थ मिलावट वाले सामने आये हैं। इन मामलों में संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसी होती है दूध में मिलावट
दूध में पानी की मिलावट सबसे ज्यादा होती है, जिससे इसकी पौष्टिकता कम हो जाती है। अगर पानी में कीटनाशक और भारी धातुएं मौजूद हों, तो यह सेहत के लिए खतरनाक हैं। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले स्किम्ड मिल्क पाउडर में ग्लूकोज पाए जाते हैं। दूध के रख-रखाव और पैकेजिंग के समय साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखने की वजह से भी आसपास में इस्तेमाल किया गया डिटर्जेंट दूध में चला जाता है। कई बार यह जान-बूझ कर भी डाला जाता है।
ऐसे करें मिलावट की जांच
दूध में पानी मिलने की जांच में एक प्लेट या ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालें। शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे सफेद लकीर छोड़ते हुए नीचे आ जाएंगी, जबकि पानी की मिलवाट वाली बूंद बिना कोई निशान छोड़े बह जाएंगी। किसी चिकनी लकड़ी या पत्थर की सतह पर दूध की एक या दो बूंद टपकाएं, अगर दूध बहता हुआ नीचे की तरफ गिरे और सफेद धार-सा निशान बन जाए, तो दूध शुद्ध है।
सिंथेटिक दूध का स्वाद कड़वा होता है। अंगुलियों के बीच रगड़ने से साबुन जैसा लगता है और गर्म करने पर पीला हो जाता है। सिंथेटिक दूध में प्रोटीन की मात्रा है या नहीं, इसकी जांच दवा की दुकान पर मिलने वाली यूरीज स्ट्रिप से की जा सकती है। इसके साथ मिली रंगों की सूची दूध में यूरिया की मात्रा बता देगी। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है।

