Friday, April 17, 2026
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Uttarakhand News: परमार्थ निकेतन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में लिया हिस्सा

जनवाणी ब्यूरो |

ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन में माँ गंगा के पावन तट पर आज उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सपरिवार पहुँचे। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में मुख्यमंत्री, श्रीमती धामी और यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट जी ने माँ गंगा का पूजन, अभिषेक और वैदिक विधि-विधान से अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ में आहुतियाँ अर्पित की।

यह आयोजन उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। महायज्ञ में विश्व के अनेक देशों से आए 200 से अधिक विदूषियों ने वेद मंत्रों का सामूहिक गान कर पूरे वातावरण को पवित्र ध्वनि से गूंजायमान कर दिया।

माननीय मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य की निरंतर उन्नति, भारत की सुरक्षा, समृद्धि और विश्व में शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि के लिए वैदिक हवन में आहुति अर्पित की।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना का धड़कता हृदय है। हिमालय की गोद, माँ गंगा की निर्मल धारा और ऋषियों की तपःस्थली इस भूमि को मानवता के लिए योग, शांति और धर्म का संदेश देती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार, शासन और आध्यात्मिकता का समन्वय होता है, तब समाज में संतुलन और सेवा के कार्यों का शुभारंभ होता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि परमार्थ निकेतन में आयोजित अति रुद्रम एवं शतचंडी महायज्ञ एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्पंदन है, जो मानवता के कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, विश्व शांति और आंतरिक जागरण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में, उत्तराखंड की शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना में और मानवता का भविष्य शांति, सेवा एवं सनातन मूल्यों में निहित है।

इस आठ दिवसीय महायज्ञ में 15,000 रुद्रम मंत्रों का जाप, 1,500 रुद्र होम, 300 दुर्गा सप्तशती पाठ, 300 चंडी होम सहित रुद्रम, दुर्गा सप्तशती, रुद्र घनम्, रुद्र क्रमम्, महान्यासम्, अरुण प्राश्नम्, अश्वमेधम और उदकाशांति जैसे अनेक वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।

दक्षिण भारत और लंदन से आए विद्वान नारी शक्ति, जैसे श्री अमृतेश्वर्यंबा, श्री अमृतेश्वरानंदनाथ सरस्वती, श्री नरेश नटराजन और श्री हिमाशु जी के मार्गदर्शन में इस अनुष्ठान में सहभागी हुईं। इस आयोजन ने सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता और नारी शक्ति के वैदिक उत्थान का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

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