- वन्य पशु होने के कारण निगम नहीं चला पाता अभियान
- रोजना बंदरों को पकड़ने के लिये आते हैं फोन, सराफा क्षेत्र में हालात बदतर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर में बंदरों का आतंक कोई नया नहीं है। यहां आए दिन बंदरों के काटने के कारण लोग जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने के लिए भी पहुंचते हैं, लेकिन इन बंदरों को पकड़ने के लिए नगर निगम भी कुछ नहीं कर पा रहा है। वन्य जीव होने के कारण इनकों पकड़ने के लिये वन विभाग की ओर से अभियान चलाया जाता है। वन विभाग की ओर से ही नगर निगम से सहायता लेकर यह अभियान चलाया जाता है, लेकिन यहां विभाग में रोजाना बंदरों के आतंक से परेशान लोग फोन घुमा रहे हैं, लेकिन अधिकारी परेशान हैं कि उन्हें पकड़े कैसे?
शहर में बंदरों के आतंक के कारण लोग परेशान हैं। शहर सराफा, सदर, सुभाष बाजार समेत तमाम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बंदरों का आतंक है। रोजाना नगर निगम के अधिकारियों के पास बंदरों को पकड़ने के लिये फोन आते हैं, लेकिन निगम की ओर से कोई अभियान नहीं चलाया जाता। इसके पीछे का कारण है बंदरों का वन्य जीव होना। बंदर एक वन्य जीव है और इसे पकड़ने के लिये वन विभाग की ओर से ही टीम लगाई जाती है।

वह टीम नगर निगम अधिकारियों से सहायता लेकर साथ में अभियान चलाती है और बंदरों को पकड़ती है, लेकिन यहां क्षेत्र की जनता को इस विषय में नहीं पता, जिसके कारण प्रतिदिन दर्जनों फोन बंदरों को पकड़ने के लिए आते हैं। उधर, नगर निगम की टीम वन विभाग के अधिकारियों का इंतजार करती है कि कब वह अभियान चलाएंगे और कब बंदरों को पकड़ा जाएगा। फिलहाल शहर में फैले बंदर निगम अधिकारियों के लिये सिरदर्द बन चुके हैं। उनका कोई हल निगम के पास नहीं है। जब वन विभाग कहेगा तब ही निगम के अधिकारी बंदरों को पकड़ सकते हैं।

