Friday, May 1, 2026
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गुजरात से आरआरटीएस ट्रेन रवाना, जल्द पहुंचेगी दुहाई डिपो

  • आरआरटीएस की प्रथम ट्रेन को सात मई, 2022 को सावली में स्थित मैसर्स एलस्टोम के फैक्टरी में आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीआरटीसी को गया था सौंपा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भारत के प्रथम आरआरटीएस के प्रथम ट्रेनसेट को गुजरात के सावली से रवाना कर दिया गया है। इस सेमी-हाई-स्पीड एरोडायनामिक आरआरटीएस ट्रेनसेट को एल्सटॉम के फैक्टरी से एक बड़े ट्रेलर पर रख कर भेजा गया है जो लगभग एक हफ्ते के यात्रा के बाद सड़क मार्ग से दुहाई डिपो, गाजियाबाद में पहुंचेगी। आरआरटीएस की इस प्रथम ट्रेन को सात मई, 2022 को सावली में स्थित मैसर्स एलस्टोम के फैक्टरी में आयोजित एक कार्यक्रम में एनसीआरटीसी को सौंपा गया था।

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव एवं एनसीआरटीसी अध्यक्ष मनोज जोशी और एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक विनय सिंह समेत अनेक एनसीआरटीसी अधिकारी इस कार्यक्रम में मौजूद थे। गाजियाबाद का दुहाई डिपो आरआरटीएस की प्रथम ट्रेन के आगमन के लिए तैयार है। इस डिपो में रेल लाइन बिछा दी गई हैं, वर्कशॉप के लिए शेड तैयार किए गए हैं और डिपो में ट्रेन की टेस्टिंग की तैयारी की जा रही है। आरआरटीएस ट्रेनों के संचालन के लिए डिपो में प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है।

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आरआरटीएस ट्रेनों के परीक्षण और रखरखाव के लिए दुहाई डिपो में 11 स्टेबलिंग लाइन, 2 वर्कशॉप लाइन, 3 इंटरनल-बे लाइन (आईबीएल) और एक हेवी इंटरनल क्लीनिंग (एचईसी) लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें एक वर्कशॉप और एक आईबीएल लाइन का निर्माण अंतिम चरण में हैं, जबकि बाकी लाइनों का निर्माण पूरा हो चुका है। एनसीआरटीसी ने आरआरटीएस की ट्रेनसेट को बनाने के लिए मैसर्स एलस्टोम के साथ अनुबंध किया है, जिसके अनुसार मैसर्स एलस्टोम, मेरठ मेट्रो के लिए 10 तीन कोच वाली मेट्रो ट्रेन सहित 40 ट्रेनों की डिलीवरी करेगा।

इनमें 30 छह कोच वाली आरआरटीएस ट्रेने होंगी। ट्रेनों के निर्माण के साथ ही आगामी 15 सालों तक इन ट्रेनों के रखरखाव का जिम्मा भी मैसर्स एलस्टोम का ही होगा। मैसर्स एलस्टोम ही संपूर्ण दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के लिए डिजाइनिंग, आपूर्ति, इंस्टालिंग, और परीक्षण सहित सिग्नलिंग एवं ट्रेन कंट्रोल की स्थापना, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और दूरसंचार प्रणाली की स्थापना का कार्य कर रहा है।

आरआरटीएस ट्रेनसेट अपने आकर्षक और आधुनिक डिजाइन के साथ रेजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से युक्त हल्के वजन के होंगे और स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी), स्वचालित ट्रेन नियंत्रण (एटीसी) व स्वचालित ट्रेन संचालन (एटीओ) से सम्पन्न होंगे। रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम आरआरटीएस ट्रेनों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जो ब्रेक लगाने पर बिजली उत्पन्न करती है और ट्रेन सिस्टम के ओवरहेड ट्रैक्शन के माध्यम से बिजली इलेक्ट्रिक ग्रिड में चली जाती है।

आरआरटीएस ट्रेनों में एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई 272 ट्रांसवर्स बैठने की सीट, खड़े होने के लिए चौड़ी जगह, लगेज रैक, सीसीटीवी कैमरे, लैपटॉप/मोबाइल चार्जिंग सुविधा, डायनेमिक रूट मैप, आॅटो कंट्रोल एम्बिएंट लाइटिंग सिस्टम, हीटिंग वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम समेत अन्य सुविधाएं हैं।
वातानुकूलित आरआरटीएस ट्रेनों में स्टैंडर्ड क्लास और प्रीमियम वर्ग (प्रति ट्रेन एक कोच) के साथ-साथ एक कोच महिला यात्रियों के लिए आरक्षित होगा। आरआरटीएस अपनी तरह की पहली प्रणाली है जिसमें 180 किमी प्रति घंटे की गति वाली ट्रेनें हर 5-10 मिनट में उपलब्ध होंगी, जो दिल्ली और मेरठ के बीच की दूरी 55 मिनट में तय करेंगी।

एनसीआरटीसी ने एनसीआर में विभिन्न सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को निर्बाध रूप से जोड़कर एक विशाल नेटवर्क बनाने की पहल की है। मल्टी-मॉडल-इंटीग्रेशन के साथ, आरआरटीएस स्टेशनों का मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और बस डिपो के साथ जहां कहीं भी संभव हो, सहज एकीकरण होगा। एक बार चालू होने के बाद, पहले आरआरटीएस कॉरिडोर से प्रतिवर्ष वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में 2,50,000 टन कार्बन डाइआॅक्साइड कम होने का अनुमान है।

लगभग आठ लाख अपेक्षित दैनिक यात्रियों के साथ, आरआरटीएस सबसे अधिक ऊर्जा कुशल फ्यूचरिस्टिक ट्रांजिट सिस्टम होगा। एनसीआरटीसी इस साल के अंत तक दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन पर ट्रायल रन शुरू करने की योजना बना रहा है। देश की पहली आरआरटीएस ट्रेनसेट की अन्य यात्री केंद्रित विशेषताएं।

लंबी नाक और प्लग-इन-दरवाजे के साथ एयरोडायनेमिक प्रोफाइल, उच्च गति पर हवा के खिंचाव को कम करने के लिए। प्रवेश और निकास के लिए यात्रियों के लिए अधिकतम स्थान के लिए चौड़े गलियारे के साथ पूरी तरह से वातानुकूलित कोच। टिंट वाले बड़े खिड़की के शीशे बाहर का मनोरम दृश्य देंगे। एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन की गई 22 ट्रांसवर्स सीटिंग, ओवरहेड लगेज रैक वाली कुशन वाली सीटें।

हर ट्रेन में एक ‘प्रीमियम क्लास कार’ जो आरामदेह, सुविधाजनक और यूजर फ्रेंडली होगी जिसमें अधिक लेगरूम, कोट हैंगर के साथ चौड़ी सीटें होंगी और वेंडिंग मशीन की सुविधा से सुसज्जित होगी। महिलाओं के लिए आरक्षित एक कोच। एनर्जी एफिसियेंट, रोशनी-आधारित आॅटो नियंत्रण परिवेश प्रकाश प्रणाली।

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