- पटेल मंडप में कार्यक्रम में पहुंची सैकड़ों की भीड़
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मंगलवार को नौचंदी स्थित पटेल मंडप में लोक गायिका मैथिली ठाकुर के गीत सुनने के लिए भीड़ उमड़ी रही। उन्होंने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किये और अपनी आवाज का जादू बिखेरा। यहां उनके गीत सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग पटेल मंडप पहुंचे। इस दौरान कार्यक्रम में डीएम दीपक मीणा, सीडीओ शशांक चौधरी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत एसके गुप्ता, मेला समिति सदस्य नरेंद्र राष्ट्रवादी, सरबजीत कपूर, अंकुर गोयल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्विलत करके किया। इस मौके पर मैथिली ने सभी का बहोत बहोत धन्यवाद व्यक्त किया। सबसे पहले उन्होंने मो से नैना मिलाइके गीत के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत की।

इसके उपरांत दमादम मस्त कलंदर गीत प्रस्तुत का सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। यहां उन्होंने पारम्परिक लोकगीत, हो बनवारी डगर मोरा छोड़, आर गंगा पार जमुना व भोजपुरी गीत की प्रस्तुति दी। उन्होंने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किया जिन्हें सुनने को पटेल मंडप में लगातार भीड़ बढ़ती गयी। इस मौके पर उन्होंने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किया जिन्हे सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो गये। तालियों की गड़गड़ाहट से पटेल मंडप गूंजता नजर आया।
छोटी से उम्र में ही तय किया संघर्ष से सफलता का मार्ग
पिता और दादा से सीखी संगीत की बारीकी
देखा जाये तो संगीत और गायकी की दुनिया में कई लोगों ने अपनी प्रभावी रूप से मौजूदगी जाहिर की है। इसी क्षेत्र में एक ऐसा ही नाम है, जो आज भारतीय संगीत को ऊंचाइयों पर ले जाए हुए हैं। बेहद ही छोटी सी उम्र में उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया है।
जिसका लोग सपना ही देखते रहते हैं। हम बात कर रहे हैं अपनी गायकी से भारत में ही नहीं विदेशों में भी नाम कमाने वाली मैथिली ठाकुर की। मैथिली ने संगीत की दुनिया में एक अलग ही नाम कमाया और आज देश-विदेश में मशहूर है। उन्होंने अपनी इस कहानी के विषय में विस्तार से बात की। वह यहां मंगलवार को प्रांतीय नौचंदी मेले में कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिये पहुंची थी।
इस मौके पर पटेल मंडप में बातचीत के दौरान संगीत की शुरुआती शिक्षा के विषय में बात करते हुए मैथिली ने बताया कि उन्हें संगीत सीखने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उन्होंने शुरुआती ज्ञान अपने दादा से हासिल किया। उन्होंने राम और सीता पर आधारित कई भजन उनसे सीखे। छह साल की उम्र में वह अपने पिता रमेश ठाकुर के साथ दिल्ली पहुंची और वहां उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखा।
11 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहला स्टेज शो ब्राह्मण बाबू यो गीत गाया। उसी वर्ष में उन्हें एक बड़ा मंच मिला। 2015 में उन्होंने इंडियन आयडल जूनियर में प्रतिभाग किया, लेकिन उसमें असफलता मिली। उसके बाद 2016 में सारेगाापा में भी आॅडिशन दिया। जिसमें वह पहले राउंड में ही बाहर हो गर्इं।
लगातार तीन असफलता मिलने के बाद भी वह टूटी नहीं और 2017 में राइजिंग स्टार शो में भाग लिया और वहीं से उन्हें पहचान मिलनी शुरू हुई। वह अभी तक 500 से अधिक शो कर चुकी हैं और सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव भी रहती हैं। आकाशवाणी में भी उनका इंटरव्यू अगले 100 सालों तक सुनाया जाएगा। यह उनकी एक बड़ी उपलब्धि है।
मैथिली ठाकुर का जीवन परिचय
अपनी गायकी के लिए मशहूर मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी में हुआ। मैथिली बचपन से ही संगीत के वातावरण में पली-बढ़ी है। उन्होंने अपने पिता रमेश ठाकुर से ही संगीत की बारीकी सीखी वह एक संगीत टीचर हैं। उनकी मां पूजा ठाकुर, जोकि एक गृहिणी हैं। दो भाई भी है। मैथिली की प्रारंभिक शिक्षा बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल से पूरी हुई। दिल्ली के कॉलेज आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज से पढ़ाई पूरी की है।
यूट्यूब चैनल से बदली जिंदगी
11 जनवरी वर्ष 2014 को मैथिली ने मैथिली ठाकुर के नाम से यूट्यूब चैनल बनाया। जिससे उन्हें और भी बड़ी पहचान मिली। मैथिली के 3.24 मिलियन के आसपास सब्सक्राइबर हैं। यूट्यूब चैनल के माध्यम से ही वह लाखों रुपये प्रति माह कमाई करती हैं। उनका सबसे लोकप्रिय गीत बनवारी डगर मोरी छोड़ा है। जिससे उन्हें काफी पहचान मिली। मैथिली शास्त्रीय संगीत से न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम किये हुए हैं।

