- 257 किमी का दायरा और तय करेगी यह पावर ट्रेन
- 12 बिलियन यूएस डॉलर से भी अधिक का आएगा खर्च
- दिल्ली पानीपत और दिल्ली गुड़गांव कॉरिडोर पर शुरू होगा काम
- हवा से करेगी बात, प्रदूषण करेगी कंट्रोल, मिला एप्रूवल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रैपिड ट्रेन के दिल्ली मेरठ कॉरिडोर पर काम युद्ध गति से जारी है। अगले वर्ष मार्च में इसके पहले खंड पर ट्रायल शुरु करने की तैयारी है। जबकि 2025 तक यह दिल्ली से मेरठ के बीच फर्राटा भरेगी। रैपिड का यह सफर सिर्फ दिल्ली मेरठ तक ही सीमित नहीं होगा। इसके बाद इसका विस्तार और शहरों में भी होगा। दिल्ली मेरठ के बाद दो नए कॉरिडोर पर काम शुरु हो जाएगा
जबकि आधा दर्जन अन्य कॉरिडोर पर भी बजट को लेकर मंथन शुरु होगा। रैपिड रेल स्पीड के मामले में हवा से बाते करेगी। 180 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली यह ट्रेन आने वाले समय में सड़कों पर से ट्रेफिक का बोझ भी सीमित करेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
दिल्ली पानीपत व दिल्ली गुड़गांव कॉरिडोर का बजट भी फाइनल
दिल्ली मेरठ के 82 किमी लम्बे कॉरिडोर के बाद दिल्ली पानीपत व दिल्ली गुड़गांव कॉरिडोर का ब्ल्यू प्रिंट भी पूरी तरह से तैयार है। दिल्ली पानीपत कॉरिडोर 103 किमी लम्बा होगा जिसमें कुल 16 स्टेशन होंगे। इस पर कुल 6.3 बिलियन यूएस डॉलर का खर्च आएगा। एनसीआरटीसी द्वारा इसकी डीपीआर एप्रूव्ड हो चुकी है। इसके अलावा दिल्ली गुड़गांव अलवर कॉरिडोर भी शुरु होगा। 154 किमी लम्बे इस कॉरिडोर में कुल 18 स्टेशन होंगे और इस पर 5.9 बिलियन यूएस डॉलर का खर्च आएगा। इस प्रकार दोनों कॉरिडोर 257 किमी लम्बे होंगे और इन पर 12.2 बिलियन यूएस डॉलर खर्च होंगे।
छह अन्य कॉरिडोर पर भी चल रहा मंथन
समय के साथ रैपिड रेल का विस्तार होगा। इसके छह और कॉरिडोर पर काम शुरु करने के लिए मंथन चल रहा है। एनसीआरटीसी सूत्रों के अनुसार रैपिड का अभी यह प्रथम चरण है। दूसरे चरण के लिए एप्रूवल मिल चुका है लेकिन अभी बजट तय होना बाकी है। दूसरे चरण पर जिन कॉरिडोर पर काम होगा उनमें 66 किमी का दिल्ली रोहतक कॉरिडोर, 86 किमी का दिल्ली पलवल कॉरिडोर, 66 किमी का गाजियाबाद खुर्जा कॉरिडोर जो कि बुलन्दशहर से होकर गुजरेगा, 40 किमी का गाजियाबाद हापुड़ कॉरिडोर व 54 किमी का दिल्ली भदौर कॉरिडोर शामिल है। इसके अलावा दिल्ली जेवर कॉरिडोर पर भी दूसरे चरण में ही काम शुरु होगा।
हवा से होगी बात, सड़कों से ट्रैफिक का दबाव होगा खत्म
गति के लिहाज से हवा से बातें करने वाली रैपिड ट्रेन जहां पॉल्यूशन कंट्रोल करेगी वहीं सड़कों पर से ट्रैफिक का दबाव भी कम करेगी। एनसीआरटीसी अधिकारियों के अनुसार इस ट्रेन की स्पीड 180 किमी प्रतिघंटा तक होगी। जिन जिन स्थानों पर यह ट्रेन जाएगी वहां का पाल्यूशन भी आॅटोमेटिक्ली कंट्रोल करेगी। साथ ही साथ जैसे जैसे रैपिड के कॉरिडोर बढ़ेगे वैसे ही सड़कों पर से ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा और यह कारक भी पॉल्यूशन कंट्रोल करने सहायक होगा।
रैपिड रेल का दुहाई डिपो सोलाट्यूब से हुआ रोशन
ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए रैपिड के गाजियाबाद स्थित दुहाई डिपो को सोला ट्यूब लाइटों से रोशन किया गया है। एनसीआरटीसी अधिकारियों के अनुसार इस ग्रीन एनर्जी सिस्टम के प्रयोग से दिन में जब तक सूर्य का प्रकाश रहता है तब तक वहां बिजली की बचत की जा सकती है। सोला ट्यूब का यह डे-लाइटिंग सिस्टम डिपो की प्रशासनिक बिल्डिंग में लगाया गया है। यहां कुल 30 सोला ट्यूब डे-लाइटें लगाई गई हैं। इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह सूरज के प्रकाश को ग्लास ट्यूब की मदद से बिल्डिंग में फैला देता है।
अधिकारियों के अनुसार यह सोलर प्रणाली नहीं है लेकिन यह सिस्टम सूरज के प्रकाश को एक ट्यूब के जरिए सीध उस एरिये में ट्रांसफर करता है। जहां रोशनी की जरूरत होती है। एनसीआरटीसी के पीआरओ पुनीत वत्स के अनुसार स्वच्छ और हरित पर्यावरण की दिशा में सोला ट्यूब एक बेहतरीन कदम है, क्योंकि इसकी मदद से ग्रीन एनर्जी के प्रयोग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल 10 मेगावॉट सोलर ऊर्जा उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा गया है।

