- दिल्ली से मेरठ के बीच कुल 2890 पिलर हो रहे तैयार, जिन पर चलेगी रेल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दिल्ली से मेरठ के बीच दौड़ने वाली देश की पहली रैपिड रेल के ट्रैक की कुल लम्बाई 82.15 किमी होगी। इस ट्रैक पर यह रेल कहीं जमीन के ऊपर तो कहीं जमीन के नीचे दौड़ेगी। रैपिड रेल के लिए कुल 2890 पिलर भी तैयार किए जा रहे हैं, जिन पर यह रेल चलेगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार इस ट्रेन का पहला ट्रायल जहां 17 किमी के प्राथमिक खंड में अगले साल मार्च में प्रस्तावित है। वहीं 2025 तक यह रेल अपनी पूरी गति के साथ दिल्ली से मेरठ तक दौडेÞगी। इस 82.15 किमी लम्बे ट्रैक का 68.03 किमी भाग एलिवेटेड (पिलरों के ऊपर) है जबकि 14.12 किमी भाग अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) है। अब अगर रैपिड रेल के रनिंग रुट की हम बात करें तो यह रेल 68 किमी उत्तर प्रदेश की सीमा में जबकि 14 किमी दिल्ली की सीमा में दौड़ेगी।
दिल्ली से मेरठ के बीच होंगे 24 स्टेशन
रैपिड रेल के दिल्ली से मेरठ के बीच कुल 24 स्टेशन तैयार हो रहे हैं। इन स्टेशनों में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, आनन्द विहार, साहिबाबाद, गाजियाबाद, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मुरादनगर डिपो, मोदी नगर साउथ, मोदीनगर नॉर्थ, मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, बेगमपुल, एमईएस, डौरली, मेरठ नॉर्थ व मोदीपुर शामिल हैं।

इसके अलावा इस 82 किमी लंबे पूरे कॉरिडोर पर 2890 पिलर बनाए जा रहे हैं जिनमें से 1700 पिलर के करीब बनकर तैयार भी हो चुके हैं।
एक कोच प्रीमियम बिजनेस क्लास भी
छह कोच वाली रैपिड रेल में जहां एक कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होगा वहीं एक कोच प्रीमियम बिजनेस क्लास के लिए भी आरक्षित होगा। हालांकि प्रीमियम बिजनेस क्लास के कोच का किराया सामान्य कोच से अधिक होगा लेकिन इस कोच में सुविधाएं भी लग्जरी होंगी।
इस प्रीमिय क्लास कोच को किसी हवाई अड्डे के लाउंज की तरह ही डिजाइन किया गया है, यानि कि ये कोच किसी कॉर्पोरेट आॅफिस जितने ही खूबसूरत होंगे। अधिकारियों के अनुसार भीड़ के दबाव के बढ़ने पर रैपिड रेल छह की जगह नौ कोच की हो जाएगी।
कोच में लाइब्रेरी से कॉफी मशीन भी होंगी
इस वीआईपी मानिन्द कोच में सुविधाएं भी वीआईपी होंगी। प्रीमियम बिजनेस क्लास कोच में सीटों की जगह सोफें होंगे और एक लाइब्रेरी भी होगी। इसके अलावा कोच में कॉफी मशीन भी होगी। हालांकि इन लग्जरी सुविधाओं के लिए यात्रियों को अतिरिक्त पैसा भी खर्च करना पड़ेगा। वैसे रैपिड रेल के टिकट पर अभी फैसला होना बाकी है।
प्रदूषण भी घटाएगी पावर रेल
प्रदूषण को कम करने में भी यह रेल सहायक होगी। यह रेल हर साल लगभग ढाई लाख टन कार्बन उत्सर्जन घटाएगी। इस रेल के शुरु होने के बाद सड़क पर लगभग एक लाख वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। इसके अलावा इस कॉरिडोर में आॅटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम भी होगा। टिकटों को यात्रा से पहले एनसीआरटीसी मोबाइल एप और इसकी वेबसाइट से जेनरेट करना होगा।

