Monday, April 13, 2026
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डिवाइडर के निर्माण में मानक का उल्लंघन

  • लापरवाही: मेरठ-करनाल हाइवे पर बना दिया छोटा डिवाइडर
  • वाहन चालकों को होगी भारी परेशानी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ-करनाल हाइवे पर डिवाइडर के निर्माण के मानक दूसरे हाइवे से अलग हैं। यहां पर आबादी क्षेत्र में तो डिवाइडर ढाई फीट ऊंचाई का बना दिया गया है, जबकि आबादी से बाहरी क्षेत्र में पांच इंच ऊंचा ही डिवाइडर बनाया गया है, जो मानकों को पूरा नहीं करता हैं। मेरठ-बागपत हाइवे पर जो डिवाइडर बनाया गया है, उसकी ऊंचाई ज्यादा हैं। रात्रि में वाहनों की लाइट से किसी तरह की परेशानी वाहन चालक को नहीं होती हैं।

मेरठ-करनाल हाइवे को एनएचएआई बना रहा हैं। पहले इसे यूपी सरकार ने बनाया था। वर्तमान में इसका चौड़ीकरण चल रहा हैं तथा एनएचएआई सड़क के चौड़ीकरण के साथ ही फ्लाईओवर भी बना रही हैं। यही वजह है कि सड़क दबथुवा, नानू, भूनि, बपारसी आदि गांवों में चौड़ीकरण कर दिया गया हैं, जहां पर मकानों को भी ध्वस्त किया गया है। इसके बाद ही सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा हैं।

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बड़ा सवाल यह है कि सड़क का चौड़ीकरण तो कर दिया गया, लोगों के मकान भी तोड़ दिये गए, लेकिन जो डिवाइडर की ऊंचाई ढाई फीट से ज्यादा होनी चाहिए थी, उनकी पांच इंच ऊंचाई की जा रही हैं। ऐसे तो रात्रि में सफर करना वाहन चालकों के लिए भारी पड़ जाएगा। आमने-सामने की लाइट वाहनों पर आपस में टकराती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावनाएं ज्यादा बन जाती हैं।

एनएचएआई कम से कम यात्रियों की सुविधाओं का तो ध्यान रखा गया होता। जब लोग टोल भी देंगे, लेकिन उनका सफर सुरक्षित नहीं होगा, तो ऐसे में जान जोखिम में पड़ सकती हैं, लेकिन लगता है, इसकी चिंता एनएचएआई के अधिकारियों को नहीं हैं। टोल भी लिया जाएगा, लेकिन डिवाइडर की ऊंचाई भी कम रहेगी। फिलहाल तो मेरठ-करनाल हाइवे पर कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा हैं।

मेरठ-सरधना बाइपास से नंगलाताशी की सीमा तक डिवाइडर की ऊंचाई ढाई से तीन फीट ऊंची की जा रही हैं, मगर इससे आगे ऊंचाई के नाम पर मजाक किया जा रहा हैं। इस तरह से तो वाहन चालकों को रात्रि में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।

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