जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पटना में पेपर लीक, शिक्षा में कथित भ्रष्टाचार और निजीकरण के विरोध में बुधवार को वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA) के बैनर तले हजारों छात्र-युवा और कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान गेट नंबर-10 से राजभवन मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही पेपर लीक मामलों की फास्ट-ट्रैक जांच, शिक्षा में भ्रष्टाचार और निजीकरण पर रोक, छात्र आंदोलनों के समर्थन, 7.5 CGPA की अनिवार्यता समाप्त करने, फीस वृद्धि वापस लेने, नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने और पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखने सहित कई मांगें उठाईं।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
आइसा ने कहा कि मार्च का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। संगठन की प्रमुख मांगों में सभी पेपर लीक मामलों की फास्ट-ट्रैक जांच, शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक, छात्रों पर कथित लाठीचार्ज बंद करने, 7.5 CGPA की अनिवार्यता समाप्त करने, यूजी, पीजी और पीएचडी स्तर पर फीस वृद्धि वापस लेने, बिहार के विश्वविद्यालयों में नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने, शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने तथा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आइसा ने विशेष रूप से पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1974 में प्रस्तावित बदलावों का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक स्वायत्तता बनाए रखने की मांग दोहराई।

