Tuesday, May 26, 2026
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खड़ी हो गई चार मंजिला इमारत, कैंट के इंजीनियर मौन

  • कैंट क्षेत्र में दो मंजिल से ऊपर नहीं हो सकता मानचित्र स्वीकृत
  • नहीं है निजी बिल्डिंग, प्लैट बनाकर बेचने का किया जा रहा कारोबार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कैंट क्षेत्र में दो मंजिल से ऊपर मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता। ऐसे नियम बने हुए हैं, लेकिन नियम चाहे जो हो, लेकिन कैंट क्षेत्र के मछेरान स्थित भूसा मंडी में चार मंजिल बिल्डिंग बना दी गई है। यह कोई एक व्यक्ति की निजी बिल्डिंग नहीं है, बल्कि चार मंजिल तक फ्लैट का निर्माण किया गया है। फ्लैट बनाकर बेचने का कारोबार किया जा रहा हैं। कैंट क्षेत्र में भी बिल्डर सक्रिय हो गए हैं।

नहीं कोई नक्शा पास कराया और नहीं कैंट बोर्ड से कोई स्वीकृति ली और बिल्डिंग चार मंजिल बना कर खड़ी कर दी गई। यह उस कैंट क्षेत्र का हाल है, जहां पर पिछले दिनों अवैध निर्माणों की जांच करने के लिए लखनऊ से एक टीम आई थी, जिस टीम का नेतृत्व डीएन यादव कर रहे थे। डीएन यादव ने अपनी जांच रिपोर्ट में भी लिखा है कि अवैध निर्माण होना कैंट क्षेत्र में पाया गया।

इसको लेकर इंजीनियरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि भूसा मंडी में चार मंजिला बिल्डिंग बनाकर फ्लैट बना दिए गए। ग्राउंड से लेकर चार मंजिल तक बिल्डिंग बन गई और कैंट बोर्ड के इंजीनियरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। बड़ी बात हैं। जो इंजीनियर अवैध निर्माण को रोकने के लिए ही तैनात हैं, उन्हें निर्माण का पता कैसे नहीं लगा, यह भी जांच का विषय बनता हैं।

क्योंकि बिल्डिंग एक मंजिल रही होती तो मान भी लेते कि बिल्डिंग चोरी छुपे बना ली गई होगी, लेकिन यहां तो चार मंजिल बिल्डिंग बना दी गई। एक नहीं, बल्कि कई ब्लॉक बिल्डिंग के यहां भूसा मंडी में बने हुए हैं। निर्माण ताजा है, इसे छुपाने के लिए पुताई कर दी गई हैं। लगता है कुछ लंबे समय से अवैध निर्माण करता दुस्साहसिक तरीके से अवैध निर्माण करने में जुटा है, जिस पर इंजीनियर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।

यही वजह है कि अवैध निर्माण चार मंजिल तक पहुंच गया। बड़ा सवाल यह है कि क्या इसके जिम्मेदार इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की गाज गिरेगी या फिर इसी तरह से बिल्डिंग बनती रहेगी और फिर पर प्रकरण दर प्रकरणों पर लीपापोती का काम चलता रहेगा। क्योंकि लंबे समय से कैंट बोर्ड में कुछ वैसा ही चल रहा है। कार्रवाई कम हो रही है शोर ज्यादा मचाया जा रहा है।

यही वजह है कि कैंट में अवैध निर्माण की श्रृंखला बढ़ती जा रही है। इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? यह भी कह दिया जाता है कि कैंट बोर्ड को कार्रवाई करने के लिए फोर्स ने नहीं मिल रहा हैं, जिसके चलते अवैध निर्माणों पर बुलडोजर नहीं चल पा रहा है। ऐसा कब तक चलेगा। यह कहना मुश्किल है, लेकिन आला अफसरों को बड़े अवैध निर्माणों को लेकर संज्ञान अवश्य ही लेना पड़ेगा। अन्यथा जांच बैठ गई तो इंजीनियर ही नहीं आला अफसरों तक की भूमिका कठघरे में खड़ी हो सकती है।

48 घंटे का समय पूरा, नहीं हुई बिल्डिंग खाली

210-बी की बिल्डिंग को खाली कराने के लिए 48 घंटे की वार्निंग पूरी हो गई है, लेकिन अभी तक 210-बी कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने कराई गई मुनादी के अनुसार बिल्डिंग को खाली कराने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाये हैं। बिल्डिंग में रह रहे लोगों से बिल्डिंग खाली कराने की अपील की गई थी। साथ ही कहा गया था कि 48 घंटे के अंदर इस बिल्डिंग को खाली कर दिया जाए, ताकि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जा सके।

वर्तमान में जो 48 घंटे की समयावधि पूरी हो गई हैं। समयावधि पूरी होने के बाद कैंट बोर्ड अधिकारियों का जो कदम आगे उठाना चाहिए था, वह नहीं उठाया गया। बिल्डिंग खाली कराने की दिशा में कैंट बोर्ड ने अभी कोई कार्रवाई नहीं की है। कहा जा रहा है कि इस बिल्डिंग को लेकर सांसद राजेंद्र अग्रवाल और कैंट विधायक अमित अग्रवाल, सीईओ ज्योति कुमार से भी मिले थे, जिसमें कोई राहत की बात की गई थी।

हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के पालन करने के बाद कैंट बोर्ड के अधिकारी वर्तमान में भी कर रहे हैं। कब कार्रवाई की जाएगी? यह तो कहना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल इस मामले को लगता है कैंट बोर्ड ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यदि ठंडे बस्ते में ही बिल्डिंग को खाली कराने का मामले को डालना था तो फिर मुनादी ही क्यों कराई गई? क्या मुनादी सिर्फ खानापूर्ति करने के लिए कराई गई थी?

यह बड़ा सवाल है। कैंट बोर्ड के अधिकारी इसको लेकर अभी कुछ नहीं बोल रहे हैं। क्योंकि पहले भी कैंट बोर्ड के अधिकारी बिल्डिंग को खाली कराने के मुद्दे को लेकर विवादों में आ चुके हैं। अब कैंट बोर्ड के अधिकारी इसको लेकर कोई बयान भी जारी नहीं कर रहे हैं। इसे विधिक अनुभाग का मामला बताकर पीछा छुड़ा रहे हैं।

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