Monday, March 16, 2026
- Advertisement -

मखदूमपुर में सुबह चार बजे से शुरू हुआ मुख्य गंगास्नान

  • कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालओं ने किया स्नान

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा पर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हस्तिनापुर स्थित प्राचीन गंगा नदी और मखदूमपुर गंगा घाट के विभिन्न गंगा घाटों पर करीब चार लाख से भी अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मखदूमपुर गंगा घाट में आने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर सुबह से रात तक जाम लगा रहा। गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु सोमवार देर शाम से ही में आने शुरू हो गए थे।

गंगा घाटों पर सुबह चार बजे से ही स्नान शुरू हो गया था। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर आदि सहित कई जिलों से श्रद्धालु पहुंचे। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने कई जगहों पर रूट डायवर्ट किए। वाहनों को मखदूमपुर गंगा घाट से काफी दूर रोका गया। श्रद्धालुओं को गंगा घाटों तक पहुंचने के लिए लम्बी पैदल दूरी तय करनी पड़ी। हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करना पवित्र माना गया है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरा नामक राक्षक का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरा पूर्णिमा कहा जाता है। मखदूमपुर गंगा घाट पर कई दशक से कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु गंगा में स्नान करते आ रहे हैं।

मंगलवार को भी लाखों लोगों में गंगा में पवित्र स्नान कर पितृओं के आत्मा शांति के लिए सूर्य को अर्ध्य दिये। सूर्याेदय के साथ ही मखदूमपुर गंगा घाट पर लोगों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इससे पहले सोमवार को शाम से लेकर रात तक लोगों ने दीपदान किया। श्रद्धालुओं ने गंगा मैया के उद्घोष के साथ गंगास्नान किया। गंगा घाट पर लाखों लोगों ने गंगा स्नान किया।

23 8

मेले में आए श्रद्धालुओं के अलावा मगंलवार सुबह भी स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला जारी रहा। भीमकुंड घाट पर भी लोगों ने गंगा स्नान किया। इसके अलावा बूढ़ी गंगा पर भी गंगा स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की जमकर भीड़ उमड़ी। गंगा मैया के उद्घोष से घाट गूंज उठे। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।

सोमवार को श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए दीपदान किया। मेले में हुई फायरिंग के चलते गंगा स्नान कर श्रद्धालु जल्दी ही घाट से अपने घरों के लिए रवाना हो गए। हालांकि, हर वर्ष स्नान के बाद भी श्रद्धालु तंबू में रहकर पूरे दिन वहां रहकर आनंद लेते थे और अगले दिन अपने घरों के लिए रवाना होते थे।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुख्ता इंतजाम कर रख हैं। मेले में अस्थाई अस्पताल, अग्निशमन दल की टीम, समेत भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। घाट पर भी पुलिस बल तैनात किया गया है। थाने के साथ-साथ अस्थाई चौकी भी बनाई गई है।

मेले में जमकर हुई खरीदारी

मेले में लकड़ी का सामान वाजिब दामों में मिल रहा था। बच्चों के खिलौने व मिट्टी के बर्तन भी सही दाम में मिल रहे थे। जिस कारण मेले में आने वाले लोग इसकी जमकर खरीदारी कर रहे थे। लोग माला, धार्मिक प्रतीक के लॉकेट आदि जमकर खरीद रहे थे।

खानपुर गढ़ी गंगाघाट पर श्रद्धालुओं ने किया मुख्य स्नान

परीक्षितगढ़: मंगलवार को ग्राम खानुपर गढ़ी में स्थित गंगा में श्रद्धालुओं ने रीति-रिवाज से अपने बच्चों का मुंडन कराते हुए पूजा-अर्चना कर गंगास्नान कर धर्म लाभ उठाया। वर्षों से गांव खरखाली गांधी गंगा घाट पर गंगास्नान मेले का आयोजन किया जाता था,

लेकिन इस बार एसडीएम मवाना अखिलेश यादव ने मेले को स्थागित करने के बाद ब्लॉक प्रमुख ब्रह्मसिंह गुर्जर व ग्राम प्रधान संजीव धामा ने गांव खानपुर गढ़ी स्थित गंगा में दीपदान व पिड़दान करने की व्यवस्था कराई थी। मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा मैय्या की पूजा-अर्चना के बाद रीति-रिवाज बच्चों का मुंडल कराया।

गगोल सरोवर में हजारों ने लगाई आस्था की डुबकी

परतापुर: गगोल स्थित महर्षि विश्वामित्र तपोस्थली गगोल सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए मंगलवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। यहां सरोवर में हजारों की संख्या में श्रद्घालुओं ने स्नान किया। स्नान का उत्सव किसी कुंभ से कम नहीं नजर आया। कहीं समूहबद्ध महिलाओं के धार्मिक गीत गूंज रहे थे तो कहीं दीपदान और पूजा, अर्घ्यदान।

सरोवर में स्नान के बाद महिलाओं ने भगवान की आरती उतारी और घर, परिवार से समाज के मंगल की कामना की। मंगलवार को वर्ष का अंतिम चंद्रग्रहण था। ऐसे में सूतक काल लगने से पहले लोगों में स्नान-दान की होड़ रही। गगोल तीर्थ के पुजारी महंत बाबा शिव दास ने बताया कि परतापुर का गोल तीर्थ महर्षि विश्वामित्र की तपस्थली है, जहां श्रीराम और लक्ष्मण ने यज्ञ किया था।

25 8

बताया कि गगोल तीर्थ स्थल के सरोवर में डुबकी लगाने के बाद चर्म रोगियों को भी लाभ मिलता है। मेरठ और आसपास के जिलों सहित हरियाणा से श्रद्घालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं। परतापुर थाना प्रभारी रामफल सिंह ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा स्नान को लेकर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। सनातन संस्कृति में स्नान पर्वों में कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का विशेष महत्व है।

इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी आदि पवित्र नदियों तथा सरोवरों में स्नान की महत्ता पुराणों में वर्णित है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा में या तुलसी के समीप दीप जलाने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला हर वर्ष 15 मार्च को विश्व भर में...

पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स. पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ...

IAF Agniveer Vayu: खिलाड़ियों के लिए एयरफोर्स भर्ती, जानें आवेदन शुरू होने की तारीख

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर...

Delhi Fire: दिल्ली के नेचर बाजार में भीषण आग, 40 दुकानें जलकर खाक

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: रविवार सुबह दिल्ली के अंधेरिया...
spot_imgspot_img