Wednesday, March 18, 2026
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हंसमुख थी हर्षिता, कैसे हारी जिंदगी?

  • स्कूल में शोक की लहर, शोक सभा में दो मिनट का रखा मौन

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अभी उसकी उम्र अपने सपनों को पूरा करने के लिये उड़ान भरने के लिये थी। वो बहुत हंसमुख थी और अपनी सहपाठियों के बीच पॉजिटिव सोच के कारण दुलारी भी थी। एक यक्ष सवाल सभी के मस्तिष्क में गूंज रहा है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी

जिस कारण दीवान पब्लिक स्कूल की हाईस्कूल की छात्रा हर्षिता को खुद को कमरे में बंद करके मौत को गले लगाना पड़ा। इस तरह के सवालों के जबाव भी आने वाले दिनों में मिल जाएंगे लेकिन ट्रांसपोर्टर प्रदीप चौधरी को अपनी बिटियां नहीं मिलेगी जिसे वो बुढ़ापे का सहारा समझते थे। हर्षिता के स्कूल में हुई शोक सभा में दो मिनट का मौन रखा गया।

मौत हमेशा दुखदायी होती है। उस वक्त कुछ ज्यादा जब खुद का बोया हुआ पौधा जब फल देने की स्थिति में आ जाए। जागृति विहार के सेक्टर चार निवासी प्रदीप चौधरी की बेटी हर्षिता देखने में जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही हंसमुख भी थी। पढ़ाई और आर्थिक तंगी के कारण उसके कोमल मस्तिष्क ने बुरा असर डाल दिया था। उसकी घर की माली हालत सही नहीं थी और इस कारण स्कूल की फीस भी जमा नहीं हो पा रही थी।

हालांकि स्कूल प्रबंधन कोई दबाव नहीं डाल रहा था लेकिन हर्षिता के मन में एक तनाव बार बार उसे सालता था। जैसे ही स्कूल में हर्षिता की मौत की खबर पहुंची तो उसके साथ पढ़ने वाले छात्र और छात्राएं हैरत में पड़ गए। जिस हर्षिता ने उसके साथ आने वाली एथलीट मीट में भाग लेने के लिये सबसे पहले नाम लिखवाया था, वो अब मैदान में दौड़ने के बजाय अनंत यात्रा पर चली गई थी।

उसकी प्रिय टीचर नम्रता सिंह का कहना था कि आज से शुरु हुए प्री बोर्ड में उसकी खाली सीट ने मन को काफी दुखी कर दिया था। हालांकि तीन दिन पहले उसने बताया था कि वो परीक्षा की तैयारी कर रही है। स्कूल के प्रधानाचार्य ए के दुबे ने बताया कि हर्षिता की मौत से अन्य बच्चों पर असर न पड़े, इसके लिये बच्चों की काउंसलिंग की गई और उनको बताया गया कि जिंदगी में हर तरह की मुसीबतों से लड़ने की ताकत पैदा करनी चाहिये।

क्या हर्षिता ने पढाई के दबाव में आकर सुसाइड किया, यह सवाल भी गूंज रहा है। पिता प्रदीप चौधरी के पास कोई शब्द नहीं है कि वो अपनी बेटी की मौत के बारे में कुछ बोल सकें। उनका बस बार बार यही कहना था कि डिप्रेशन में हर्षिता इतना बड़ा कदम उठा लेगी कभी सोच भी नहीं सकते हैं।

पिता बार बार पढ़ाई को लेकर डिप्रेशन की बात कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि हर्षिता के घर वालों ने यह भी बताया कि हर्षिता एक साल से बीमार चल रही थी और उसे दौरे भी पड़ रहे थे जिस कारण मानसिक रूप से वो काफी परेशान चल रही थी।

कांपते हाथों से किया शव का अंतिम संस्कार

बड़ी नाजों से जिस हर्षिता को फूल की तरह पिता ने पाल पोस कर बड़ा किया था, उसी पिता के सामने जिंदगी की सबसे कठिन घड़ी उस वक्त आई जब अपनी बेटी का अंतिम संस्कार उसे करना पड़ा। पिता के हाथ कांपने लगे और कोरोना के कारण खराब हुई एक आंख से भले उनको वो दर्दनाक पल पूरी तरह से न दिखा हो लेकिन पिता पिता ही होता है, बेटी को अंतिम विदाई देते वक्त वो खुद को संभाल नहीं पाये। आंखों में आंसुओं की धारा उस वक्त भी दिखी जब मां शिखा ने घर से अर्थी को विदा करते समय दहाड़ मारकर गिर गई थी।

पुलिस पता करेगी कौन पिस्टल लाया?

पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि हर्षिता ने बंद कमरे में सुसाइड किया। सवाल यह उठ रहा है कि हर्षिता के पास देशी पिस्टल कहां से आई। उसने सुसाइड के लिये पिस्टल का इंतजाम कहां से किया। आईजी प्रवीण कुमार ने इस बाबत एसएसपी रोहित सिंह सजवाण से पूछा है कि पुलिस ने इस दिशा में क्या किया।

फिलहाल हर्षिता की मौत के बाद परिवार गमगीन है और जांच करने पहुंची पुलिस से पड़ोसियों ने भी कहा कि प्रदीप चौधरी का परिवार काफी भला है और कोरोना काल में आई आर्थिक मंदी ने इस परिवार को परेशानियों में ला दिया है। हर्षिता की मौत चौकाने वाली है क्योंकि तनाव कभी मौत का विकल्प नहीं बन सकता है।

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