Wednesday, March 18, 2026
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एसडी कॉलेज मार्केट में खुल रहीं परतें

  • 40 साल पहले ही खत्म हो चुकी है लीज, 70 साल से न पालिका ने ही बढ़ाया किराया और न ही एसोसिएशन ने किया जमा

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: एसडी कॉलेज प्रकरण में परत दर परत खुलासा हो रहा है। दि सनातन धर्म कॉलेज एसोसिएश्न को 71 रुपये वार्षिक किराये दर से दी गई भूमि की लीज भी 40 साल पहले ही खत्म हो चुकी है। इतना ही नहीं नगर पालिका द्वारा 70 सालों से वार्षिक किराये की दर में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई और न ही एसोसिएशन द्वारा 70 सालों में एक बार भी किराया जमा कराया गया।

जबकि एसोसिएशन द्वारा इस मार्केट से हर साल 13 लाख रुपये से अधिक किराया वसूला जा रहा है। इतना बड़ा गड़बड़-झाला शहर के बीचो बीच चल रहा था और इस पर न तो किसी जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन द्वारा कोई ध्यान दिया गया। इस खुलासे के बाद अब सभी की निगाहें इस मुददे पर टिकी हुई है। एक ओर जहां एसडी मार्केट के दुकानदारों में खलबली मची हुई है, वहीं इस बार प्रशासन भी कड़ा रुख अख्तियार करने के मूड़ में है।

शहर के बीचोबीच एक बड़े व्यवसायी मार्केट के रूप में पहचाने जाने वाली एसडी कॉलेज मार्किट कॉलेज के खेल के मैदान से कब और कैसे व्यावसायिक कॉम्पलैक्स में बदल गई, इसको लेकर चर्चाओं का दौर शुरु हो गया है। इतना बड़ा घोटाला इसमें परत दर परत सामने आ रहा है, जो चौंकाने वाला है।

करीब चार दशक पूर्व लीज खत्म होने के बाद भी किसी ने इस भूमि पर बनी मार्किट के वजूद से छेड़छाड़ की जुर्रत नहीं की, लेकिन जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह ने चार दशकों से दबे इस मामले को उधेड़कर रख दिया तो कई सफेदपोश पर सवाल उठने लगे हैं।

जिले की सबसे बेशकीमती जमीन होने के कारण इसको लेकर सामने आ रहे तथ्यों में अब बड़े बड़े घोटाले भी उजागर होने की दहलीज पर पहुंचने लगे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि नगरपालिका से अनुबंध के तहत शिक्षण कार्यों के उपयोग के लिए लीज पर ली गयी इस भूमि का वार्षिक किराया भी कभी जमा नहीं कराया गया।

नगरपालिका परिषद् के अधिशासी अधिकारी हेमराज सिंह की ओर से 27 दिसम्बर को दि सनातन धर्म कॉलेज एसोसिएशन को नोटिस संख्या 325 जारी किया गया। इसमें ईओ ने बताया कि 12 मई 1952 को नगरपालिका परिषद् ने नजूल की भूमि, जिसका क्षेत्रफल 0.5730 हैक्टेयर है को 30 वर्ष के लिए शैक्षणिक कार्यों के लिए पट्टे ;लीजद्ध पर दी गई थी। इसमें लीज के लिए एसोसिशन को वार्षिक किराया तय किया गया था, जोकि 71 रुपये सालाना था।

नोटिस के अनुसार वार्षिक किराया का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अपै्रल तक अग्रिम रूप से जमा कराये जाने की शर्त अनुबंध में शामिल की गयी थी। इस अनुबंध को स्वीकार का एसोसिएशन ने उक्त भूमि का पट्टा तो प्राप्त कर लिया था, लेकिन किराया आज तक भी जमा नहीं कराया गया।

सूत्रों के अनुसार 1952 में पट्टा स्वीकृति के बाद से दिसम्बर 2022 तक पालिका द्वारा लीज पर दी गई भूमि का तय 71 रुपये वार्षिक किराया एसोसिएशन की ओर से पालिका में जमा ही नहीं कराया गया है। इसमें पालिका सूत्रों का कहना है कि इस किराये के लिए डिमांड तो की गई, लेकिन वसूली का प्रयास किसी भी स्तर से नहीं किया गया है।

अब नोटिस में भूमि के व्यावसायिक उपयोग के लिए जो क्षतिपूर्ति का आकलन कर पालिका ईओ हेमराज सिंह ने एक अरब 89 करोड़ 79 लाख 80 हजार 390 रुपये एक सप्ताह के अंदर पालिका में जमा कराने के लिए प्रतिपूर्ति तय की है, उसमें लीज से आज तक के लिए 70 साल का वार्षिक किराया भी शामिल है।

एसोसिएशन किराये के साथ जीएसटी की भी करती है वसूली

नपा को एक बार भी किराया न देने वाली एसडी कॉलेज एसोसिएशन का एक और खुलासा हुआ है, जो एसोसिएशन खुद तो किराया तक भी नहीं देती, लेकिन एसडी कॉलेज मार्केट के दुकानदारों से किराये के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी भी वसूल करती है। पालिका से लीज पर मिली भूमि पर मार्किट एसडी कॉलेज पुरानी और नई, झांसी रानी मार्किट, नेहरू मार्किट, सनातन धर्म सभा भवन के सामने मार्किट, किताबों वाली मार्किट आदि बनी है। इसके अलावा टाउनहाल मैदान के गेट से लेकर कोतवाली के सामने ब्रज टाकीज तक बनी मार्किट की दुकाने इसी भूमि पर निर्मित हैं, जिनके दुकानदार एसोसिएशन में ही किराया जमा करते रहे हैं।

लीज की शर्तों का हुआ उल्लंघन

ईओ द्वारा दिये गये नोटिस के अनुसार 1952 में जिन शर्तों के अधीन दि सनातन धर्म कॉलेज एसोसिएशन को यह भूमि लीज पर दी गई थी। उस अनुबंध की दो शर्तों का पालन नहीं किया गया है। नोटिस के अनुसार शर्त नम्बर 01 और 04 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। इसमें शर्त 01 में स्पष्ट किया गया है कि लीज पर दी गई भूमि का उपयोग पूर्ण रूप से और विशेष रूप से शैक्षिक उद्देश्य से ही किया जायेगा, पट्टेदार इस भूमि पर किसी को भी व्यापार या व्यवसाय करने की अनुमति नहीं देगा और पट्टे में मिली भूमि बंधक बिक्री पट्टे के रूप में किसी को सौंपेगा या स्थानांतरित करेगा। शर्त नम्बर 04 में वार्षिक किराया जमा कराने की समय सीमा के साथ ही भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहित करने पर पट्टा निरस्त होना शामिल रहा है। इसमें किराया जमा कराने और भूमि का केवल शैक्षिक उद्देश्य से उपयोग करने की शर्तों का पालन नहीं किया गया है।

क्या कहते हैं एसोसिएशन के अध्यक्ष

मार्किट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नामदेव के अनुसार इसमें करीब 1100 दुकानें हैं, जिनमें 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का किराया व्यापारी एसोसिएशन में इनवाइस वायचर के माध्यम से नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। ऐसे में देखा जाये तो यदि एक दुकान का किराया 100 रुपये भी माना जाये तो मासिक किराये के रूप में इन मार्किट से एसोसिएशन को 1.10 लाख और वार्षिक किराये के रूप में 13.20 लाख रुपये प्राप्त हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस किराये के साथ एसोसिएशन दुकानदारों से 18 प्रतिशत जीएसटी के अलावा पालिका के निर्धारित वाटर टैक्स और हाउस टैक्स को भी वसूल कर रही है। सवाल यही है कि कम से कम करीब साढ़े 13 लाख रुपये का वार्षिक किराया वसूलने के बाद भी आज तक एसोसिएशन 71 रुपये वार्षिक लीज शुल्क का भुगतान पालिका को क्यों नहीं कर पाई है।

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