Sunday, May 3, 2026
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किसकी जेब में गया है नगर निगम का करोड़ों रूपया

जनवाणी संवाददाता | 

रुड़की: नगर निगम को शासन विकास के लिए धन आवंटित करता है और इसी के साथ शहर से भी टैक्स के रूप में बड़ा बजट जमा होता है। यह सब आम नागरिक की मेहनत की कमाई होती है। यदि इस बजट को कोई अधिकारी-कर्मचारी डकार जाए तो बड़ी ही कष्टदायक और चिंता में डाल देने वाली बात है। वह भी रुड़की शहर जैसे जागरूक शहर में।

जहां पर पढ़े-लिखों की संख्या काफी अधिक है। जो ऑडिट रिपोर्ट वायरल हो रही है और और नगर निगम से इस संबंध में सवाल-जवाब भी किए गए हैं। उसमें नगर निगम के द्वारा सृजीत पदों से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति दर्शाकर कोई 1-2000 नहीं बल्कि 17945160 का भुगतान होना दर्शाया गया है।

जो की बहुत बड़ी धनराशि है। इसमें लेखा परीक्षक 04, कर संग्रहकर्ता 04,,पर्यावरण पर्यवेक्षक 15, पर्यावरण मित्र 28,,नाय ब तहसीलदार 01,वाहन चालक 8 जबकि वाहनों की संख्या 49 है जिसके सापेक्ष 57 पद भरे गए हैं। जबकि शासन आदेश में स्पष्ट है कि यदि अधिकारी स्तर पर कोई सर्जित पद से अधिक कर्मचारी नियुक्त करता है तो वह स्वतः ही शून्य मानी जाएगी।

ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तो होगी ही। साथ ही अपने स्तर से नियुक्त किए गए कर्मचारियों को जारी किए गए मानदेय का पूरा बजट भी संबंधित अधिकारी के वेतन या पेंशन से वसूला जाएगा। की अनुमति के बिना नगर आयुक्त सहायक नगर आयुक्त स्तर से कोई भी कर्मचारी नियुक्त नहीं किया जा सकता।

वैसे तो नगर निगम स्तर से कुछ ठेकेदारों को अधिक भुगतान भी किया गया। जिसमें 2 लाख 28 हजार ₹960 की वसूली करने के लिए भी कहा गया है। यह बात अलग है कि वसूली की कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। इसके अलावा भी 489936 का अधिक भुगतान किया गया है।

यह एक ही कार्य की दो बार स्वीकृति और भुगतान का मामला है। नालों की सफाई कार्य पर 65 22939 दर्शाए गए हैं। इसका ऑडिट किए बिना ही भुगतान किया गया है। साफ है कि बड़ी वित्तीय अनियमितता हुई है। तो अब सवाल उठ रहा है कि यह बजट किसकी जेब में गया है।

अधिकारी हड़प गए हैं या फिर कर्मचारी। इस बारे में शहर के जागरूक नागरिक नगर निगम के अधिकारियों से सवाल-जवाब कर रहे हैं। इस संबंध में विभिन्न स्तरों से शासन को शिकायत भी भेजी गई है।

नगर निगम रुड़की में पिछले कुछ सालों में हुए वित्तीय अनियमितताओं की एसआईटी कराने की मांग की गई है। जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलेगा ताकि नगर निगम के वित्तीय घोटाले की जांच एसआईटी से हो सके। और उन अधिकारियों से यह सरकारी बजट वसूला जाए जो कि कागजों में हेराफेरी कर पैसा हड़प चुके हैं।

वहीं मेयर गौरव गोयल इस बारे में अपनी स्थिति मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में स्पष्ट कर चुके हैं कि सब गोलमाल अधिकारी स्तर पर हुआ है।

इस बाबत वह समय-समय पर शिकायत कर चुके हैं । इनमें कुछ मामलों की जांच भी चल रही है। यहां पर सहायक नगर आयुक्त रहे चंद्रकांत भट्ट के खिलाफ जिलाधिकारी हरिद्वार के द्वारा जांच कमेटी भी गठित की गई है।

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