
तमाम मुद्दों और दांव-पेच के बावजूद कर्नाटक में सत्ता बचाने में असफल भाजपा के लिए इन परिणामों के प्रभाव से दूसरे राज्यों को बचा पाना नई चुनौती बन गया है, जबकि संकेत स्पष्ट हैं कि कर्नाटक में कमल न खिलने का असर आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश में सत्ता से संगठन तक विभिन्न स्तरों पर बदलाव के रूप में दिखाई पड़ सकता है। उसके सामने आत्मविश्वास और उत्साह से भरपूर कांग्रेस है, जिसे कर्नाटक के परिणाम से संजीवनी मिल गई है। अब विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, मध्यप्रदेश में भाजपा की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह कम होने की बजाय बढ़ेंगी ही।