Wednesday, February 21, 2024
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मूल्यवान ग्रन्थ 

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मिस्र के विख्यात विचारक अनस्तेशियस के आश्रम में पुस्तकों का विशाल संग्रह था, जिसमें अनेक प्राचीन, दुर्लभ और मूल्यवान ग्रंथ थे। एक बार उनके आश्रम में आए एक व्यक्ति को एक ग्रंथ बेहद महत्वपूर्ण लगा और उसने चुपके से उसे अपने पास रख लिया। ग्रंथ के गायब होने का अनस्तेशियस को तुरंत पता चल गया। वह यह भी जान गए कि उसे कौन लेकर गया है। लेकिन उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा। कुछ दिन बाद एक संपन्न व्यक्ति उनके पास वही ग्रंथ लेकर आया। उसने उनसे कहा कि एक व्यक्ति इसे बेहद मूल्यवान बताकर इसकी मोटी कीमत मांग रहा है।

अनस्तेशियस पुस्तक को तुरंत पहचान गए, लेकिन वह इस बारे में कुछ न बोलकर संपन्न व्यक्ति से बोले, ‘यह ग्रंथ वाकई अमूल्य है। आप इसे मोटी कीमत पर खरीद सकते हैं।’ अनस्तेशियस की बात सुनकर संपन्न व्यक्ति वहां से लौट कर उसी व्यक्ति के पास गया और उससे ग्रंथ देने को कहा। बातों-बातों में उसने यह भी बता दिया कि उसने इस ग्रंथ के संदर्भ में महान विचारक अनस्तेशियस से पूछा है।

यह सुनकर वह व्यक्ति दंग रह गया। उसने उसी क्षण उस ग्रंथ को बेचने का विचार त्याग दिया। इसके बाद वह सीधा अनस्तेशियस के पास पहुंचा। उस व्यक्ति की आंखों में पश्चाताप के आंसू थे। वह अनस्तेशियस से बोला, ‘आपने सब कुछ जानते हुए भी किसी को यह भनक तक नहीं लगने दी कि उसे मैंने चुराया है।

आखिर क्यों?’ अनस्तेशियस बोले, ‘यदि, मैं ऐसा कहता तो तुम झूठ बोलकर एक और गलती करते। तुम इस पुस्तक को रख सकते हो, लेकिन कभी अपने ईमान और सच को तोलकर कोई गलत काम मत करना।’ यह सुनकर वह व्यक्ति बोला, ‘मैं यह किताब लौटाने के साथ ही आश्रम में रहकर आपसे ज्ञान प्राप्त करना चाहता हूं, ताकि मैं अपने जीवन को सफल बना सकूं।’ इसके बाद उसने वह ग्रंथ अनस्तेशियस को सौंप दिया और उनके पास रहने लगा।


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