नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनन्दन है। सनातन धर्म में निर्जला एकादशी व्रत को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तिथि को निर्जला एकादशी मनाई जा रही है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है।
ऐसा माना जाता है कि यह व्रत सबसे कठिन और शुभफलदायी है। इस एकादशी को पांडव निर्जला एकादशी, पांडव भीम एकादशी भी कहा जाता है। तो आइये जानते है मोहिनी एकादशी की पूजा विधि…
निर्जला एकादशी मुहूर्त
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एकादशी तिथि प्रारम्भ- 30 मई को दोपहर 1:32 मिनट पर शुरू
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एकादशी तिथि समाप्त- 31 मई को दोपहर 1:36 मिनट पर
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निर्जला एकादशी का पारण- 01 जून को सुबह 05:24 मिनट से लेकर सुबह 08:10 मिनट तक रहेगा।
निर्जला एकादशी पूजा विधि
निर्जला एकादशी व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें। भगवान की आरती करें। भगवान को भोग लगाएं।
पूरे दिन भगवान स्मरण-ध्यान व जाप करना चाहिए। पूरे दिन और एक रात व्रत रखने के बाद अगली सुबह सूर्योदय के बाद पूजा करके गरीबों, ब्रह्मणों को दान या भोजन कराना चाहिए। इसके बाद खुद भी भगवान का भोग लगाकर प्रसाद लेना चाहिए।
इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।



