
जुलाई माह के पहले सप्ताह में मैंने मराठवाड़ा के कृषि प्रधान जिले में करीब दो हजार किलोमीटर की यात्रा की थी। अधिकांश किसान भीषण गर्मी में बोनी कर वर्षा की राह देख रहे थे और उसकी देरी किसानों को बेचैन कर रही थी। फसल बोवाई का ये तो फकत दूसरा माह है और अभी से महाराष्ट्र के अधिकांश क्षेत्रों से किसानों को हो रहे नुकसान की कहानियां सुनाई दे रही हैं। बदलता मौसम विगत दस सालों से बेमौसम वर्षा दे रहा है और उससे ग्रामीण महाराष्ट्र के किसानों की मानसिक बीमारी भी बढ़ रही है, लेकिन राज्य में हो रही राजनैतिक उठापटक के कारण ‘टाइम बम’ कभी भी विस्फोटक हो सकता है इसकी किसी को चिंता नहीं है।