Wednesday, March 18, 2026
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सपा सुप्रीमो अखिलेश ने किया मेरठ का टिकट होल्ड पर

  • बदला जा सकता है सपा का टिकट

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: समाजवादी पार्टी के मेरठ से घोषित प्रत्याशी भानु प्रताप सिंह का टिकट पार्टी हाई कमान ने होल्ड पर कर दिया है। उनका टिकट बदला जा सकता हैं। दरअसल, पैराशूट प्रत्याशी को लेकर सपा में मायूसी छा गई थी। क्योंकि भानु प्रताप को मेरठ में कोई नहीं जानता, वो एक अनजान चेहरा है। इसी वजह से सपा के कार्यकर्ता भी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव का विरोध कर रहे थे। सपा में ज्यादा बवाल खड़ा हो, इससे पहले ही अखिलेश यादव ने भानु प्रताप का टिकट होल्ड पर कर दिया है। एक दिन पहले ही सपा की सूची में भानु प्रताप सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था।

दरअसल, अखिलेश यादव ने इसका फीडबैक लिया कि मेरठ में भानु प्रताप के कितने समर्थक हैं? लेकिन वहां भानु प्रताप एक अनजान चेहरा है । इस वजह से सपा सुप्रीमो ने टिकट होल्ड पर कर दिया है। अब देखना यह है कि सपा किस प्रत्याशी को मेरठ से चुनाव मैदान में उतरती है? क्योंकि यह चुनाव सपा और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है। हालांकि पिछली बार बसपा प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी को मात्र चार हजार वोटो से ही भाजपा से पराजित हुए थे, लेकिन इस बार हाजी याकूब ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इसके बाद बसपा से देवव्रत त्यागी का नाम प्रत्याशी के रूप में चल रहा है। हालांकि अभी अधिकृत रूप से उनके नाम की घोषणा बसपा सुप्रीमो मायावती ने नहीं की है।

सबसे ज्यादा खींचतान समाजवादी पार्टी में टिकट को लेकर चल रही थी। तमाम पार्टी के नेता लखनऊ में ही डेरा डाले हुए थे। अभी भी समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने लखनऊ में ही डेरा डाल रखा है। क्योंकि पार्टी अध्यक्ष ने भानु प्रताप सिंह का टिकट होल्ड कर दिया है। ऐसा पार्टी सूत्रा बता रहे हैं। इसके बाद अब फिर से टिकट बदला जा सकता है। अब किसका टिकट होगा? यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना अवश्य है कि समाजवादी पार्टी किसी दलित को ही मेरठ में चुनाव मैदान में उतर सकती है। क्योंकि दलित और मुस्लिम एक साथ वोट पड़ते हैं तो भाजपा को चुनौती मिल सकती है। इसी फार्मूले पर सपा काम कर रही है।

मेयर के चुनाव से भी नहीं लिया सपा ने सबक

समाजवादी पार्टी नगर निकाय चुनाव में मेयर की सीट पर हुई हार से भी सबक नहीं ले रही है। तब सपा को ओवैसी जैसी पार्टी से बुरी तरह से पराजय का सामना करना पड़ा था और इसमें भाजपा के हरिकांत अहलूवालिया जीत गए थे। सपा को तीसरे पायदान पर संतोष करना पड़ा था, जबकि ओवैसी की पार्टी प्रत्याशी दूसरे पायदान पर रहे थे। मेयर के चुनाव में समाजवादी पार्टी की जो बुरी गत हुई है, उससे भी लगता है समाजवादी पार्टी के बड़े नेता सबक नहीं ले रहे हैं और यही वजह है कि सपा की स्थिति मेयर के चुनाव में अच्छी नहीं रही।

निकाय चुनाव के बाद भी समाजवादी पार्टी को जो सबक लेना चाहिए था, वह नहीं लिया गया। तभी तो समाजवादी पार्टी ने अनजान चेहरा भानु प्रताप सिंह को मेरठ के चुनाव मैदान में उतरकर क्या संदेश देना चाहती है? इस बात को समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता भी नहीं समझ रहे हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच जो ‘रार’ चल रही है, वह लोकसभा चुनाव में देखने को मिली। नेता भी आपस में लड़ रहे हैं, लेकिन जो भाजपा को हराने का लक्ष्य लेकर चलना, उससे सपा नेता भटक गए हैं। आपस में ही उलझे हुए हैं।

स्थिति सपा के लिए शर्मनाक बन सकती है। यदि मेयर के चुनाव से सबक नहीं लिया तो स्थिति निकाय चुनाव वाली ही फिर से मेरठ में दोहराई जा सकती है। इसी वजह से सपा के नेता कुछ अब अनजान चेहरे को लेकर सामने आने लगे हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी ने मेयर के चुनाव में प्रत्याशी का चयन जिस हिसाब से करना चाहिए था, वह नहीं किया, जिसके चलते मेयर के चुनाव में तीसरे पायदान पर ही संतोष करना पड़ा था। अब वर्तमान में समाजवादी पार्टी ने फिर ऐसा चेहरा भानु प्रताप सिंह के रूप में चुनाव मैदान में उतारा है,

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जो सपा समर्थकों के भी गले नहीं उतर रहा है। हालांकि अब चर्चाएं चल रही है कि प्रत्याशी को बदला जा सकता है, लेकिन अभी स्थिति इसको लेकर क्लियर नहीं है। कहा जा रहा है कि बिजनौर और मेरठ दोनों ही प्रत्याशी बदले जा सकते हैं। हालांकि इसकी पुष्टि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने नहीं की है, लेकिन चर्चा आम हो गई है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं को भी लोकसभा चुनाव में पार्टी सुप्रीमो को वास्तविकता से अवगत कराना चाहिए, लेकिन वहां भी गुमराह कर किया जा रहा है।

भानु प्रताप को लेकर मातमी चुप्पी साध बैठे सपाई

मेरठ वाले नेताओं को किनारे करके खुद लोकसभा चुनाव का टिकट हासिल करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील भानु प्रताप सिंह को लेकर सपा नेता बिल्कुल उदासीन बने हुए हैं। एक भी नेता ने भानु प्रताप को फोन तक करना गवारा नहीं किया है। समाजवादी पार्टी का मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर टिकट को लेकर भारी घमासान मचा हुआ था। एक दर्जन से ज्यादा दावेदार देखकर खुद सपा सुप्रीमो भी भौंचक्क हैं।

टिकट मांगने वालों की कतार में किठौर विधायक शाहिद मंजूर, शहर विधायक रफीक अंसारी, सरधना विधायक अतुल प्रधान, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, मुखिया गुर्जर, पूर्व मंत्री आकिल मुर्तजा, नीरज पाल, सनी गुप्ता, पूर्व पार्षद संगीता राहुल के साथ साथ जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी ने भी खुद अपनी दावेदारी पेश की थी। लखनऊ पार्टी कार्यालय में सपा अध्यक्ष अखिलेश के सामने सभी अपने अपने जीत के दावे करते रहे। किसी एक नाम पर सहमति न बन पाने पर अखिलेश यादव ने मेरठ के टिकट को होल्ड पर डाल दिया था।

अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गत दिवस जब एडवोकेट भानु प्रताप सिंह के नाम की घोषणा की थी तो सभी भौंचक्क रह गये। बड़े-बड़े दावेदार अपने दावे लेकर धरे ही रह गये और बाहरी प्रत्याशी मैदान मारकर ले गये। शनिवार को सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी की चर्चा होती रही। हर कोई जानना चाहता था कि अखिलेश यादव ने जिस पर विश्वास करके टिकट दिया है वास्तव में वह कितना कददावर नेता है, लेकिन समाजवादी पार्टी के सभी छोटे और बड़े नेता भानु प्रताप के नाम को लेकर मौन साधकर बैठ गये हैं। हर तरफ मातम-सा नजर आ रहा है। यदि यही हालात रहे तो भानु प्रताप के करीब चुनाव की डगर बेहद मुश्किल भरी साबित होगी।

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