Friday, March 13, 2026
- Advertisement -

ऐसा न हो कि भाजपा को जख्म आ मिले…

  • हरदा की हर रणनीति से हरिद्वार सीट पर हलचल
  • सन् 22 के विस चुनाव में केवल तीन सीटों पर खिला था कमल

अवनीन्द्र कमल |

देहरादून: राजनीति के चतुर सुजान कहे जाने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत की घेराबंदी से भाजपा के सहोदर संगठनों को कुछ-कुछ होने लगा है। यह अलग बात है कि सूबे की पांचों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। सन् 2014 और 19 में भी भाजपा ने कांग्रेस का खाता इस पर्वतीय राज्य में नहीं खुलने दिया, लेकिन इस बार सबसे हाट सीट हरिद्वार पर हरदा और उनके सिपहसालरों की रणनीति हर दिन मजूबत होती दिख रही है।

यह बता दें कि राज्य में चुनाव महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर गरम नहीं हो रहा। सभी प्रमुख दल जातीय समीकरण साधने में लगे हैं। हरिद्वार संसदीय सीट के चुनावी समीकरण काफी उलझे हुए हैं। भाजपा के कारकुन इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि पनघट की डगर त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए उतनी आसान नहीं, जितनी समझी जा रही थी। दरअस्ल, पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक लगातार दस साल यहां से सांसद रहे। वह केंद्र में भी मानव संसाधन मंत्री रहे। भाजपा संगठन के ज्यादातर लोग कद्दावर नेता पोखरियाल से जुड़े हैं।

सदर सीट पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का प्रभाव है। इन दोनों दिग्गजों की फौजें अगर मन से नहीं लगेंगी तो सियासी रनवे पर त्रिवेंद्र सिंह रावत उड़ान कैसे भर पाएंगे?

उधर, कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र रावत भाजपा के लिए पगबाधा बनते जा रहे। थोड़ा अतीत में झांक कर देखें तो सन 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में सरकार बनाई। पुष्कर सिंह धामी सीएम बने। लेकिन भाजपा राज्य की जिन 23 विधानसभा सीटों पर पस्त हुई थी, उसमें सात सीटें सिर्फ हरिद्वार की थींं। झबरेड़ा, ज्वालापुर, भगवानपुर सीट भाजपा हार गई तो हरिद्वार ग्रामीण सीट पर हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत कांग्रेस से विधायक चुनी गईं। पिरान कलियर सीट भी कांग्रेस के खाते में है। मंगलौर और लक्सर में बसपा और खानपुर निर्दलीय ने जीती थी। जाहिर है कि हरिद्वार में केवल तीन सीटों पर भाजपा जीती थी। ऐसे में लोस चुनाव में भाजपाइयों को नाको चने चबाने पड़ रहे हैं।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

छोटे बच्चों की करें उचित परवरिश

नीतू गुप्ता साफ-सुथरा, हंसता मुस्कुराता बच्चा सभी को अच्छा लगता...

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

सही कहा है, दूसरों को उपदेश देने वाले एक...

मराठा कूटनीति के चाणक्य नाना फड़नवीस

मराठा साम्राज्य का संदर्भ आते ही आंखों के सम्मुख...

नीतीश कुमार का अंतिम दांव

बिहार की राजनीति में बहुविध हलचल है। मुख्यमंत्री नीतीश...
spot_imgspot_img