- खुलासा करने वाले का विश्वविद्यालय प्रशासन पर मामले को दबाने का आरोप
- मामले के आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसएसपी को भी दे चुके हैं शिकायत पत्र
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: फर्जी यूजीसी-नेट के प्रमाण पत्र से सीसीएसयू की चयन प्रक्रिया में शामिल होने वाले शिक्षकों के खिलाफ मामला सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। मामले का खुलासा करने वाले जितेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले से साक्ष्यों के साथ सीएम कार्यालय को अवगत कर दिया है। उन्होंने बताय कि इससे पहले वह एसएसपी से भी मिल चुके हैं। मामले के आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसएसपी को भी शिकायत पत्र दे चुके हैं।
एफआईआर की उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में उनके खुलासे के बाद सीसीएसयू प्रशासन की ओर से आरोपियों पर मुकदमे के लिए बाकायदा तहरीर भेजे जाने के बाद भी मेडिकल पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि एक महिला अभ्यार्थी ने यूजीसी-नेट को जो प्रमाण पत्र लगाया उस पर बार कोर स्कैन करने पर किसी अन्य का नाम दर्शाया जाता है।
ऐसा दूसरा मामला अन्य शिक्षक है जिसके पेपरों की पड़ताल की तो सारा घोटाला सामने आ गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों अभ्यार्थियों का यूजीसी नेट का प्रमाण पत्र फर्जी है। क्योंकि विश्वविद्यालय द्वारा इनका सत्यापन नहीं कराया जा सका है। उन्होंने इनके खिलाफ एफआईआर की मांग की है।
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने ईडी को भेजा रिकार्ड
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आरपी सिंह की मुश्किले बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय-ईडी द्वारा शुरू की गई जांच की आंच अब तेज होने लगी है। इस संबंध में ईडी सहायक निदेशक जयकुमार ठाकुर द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 प्रीवेंशन आॅफ मनी लांडरिंग एक्ट 2002 की धारा 52 के अन्तर्गत समस्त रिकॉर्ड मांगा गया। रिकार्ड विवि द्वारा उपलब्ध कराने का दावा किय गया है।
बताते चले कि ईडी ने पूर्व कुलपति, फाइनेंस कंट्रोलर की जांच पूर्व कुलपति आरपी सिंह, पूर्व वित्त नियंत्रक चन्द्र किरण सिंह और प्रो. हरेंद्र सिंह बालियान का ईडी के जोनल आॅफिस लखनऊ ने सीसीएसयू के पूर्व कुलपति प्रो. रामपाल सिंह, पूर्व वित्त नियंत्रक चन्द्र किरण सिंह और प्रो. हरेन्द्र सिंह बालियान का विवि अधिकारियों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वेतन आदि के बैंक अकाउंट, ब्रांच का नम्बर व नाम का रिकार्ड आदि भेजने को कहा था। इस संबंध में विवि की ओर से वांछित रिकार्ड भेजने की बात कही गई थी।
भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त हुए थे विवि के पूर्व कुलपति
अधिवक्ता संदीप पहल की माने तो 2 मार्च, 2003 को प्रो. आरपी सिंह ने विवि वीसी का पद संभाला था। कुलपति अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे थे। शिकायतें राजभवन से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंची तो जांच शुरू हुई थी। उच्च स्तरीय जांच में प्रो. आरपी सिंह द्वारा करोड़ों रुपये की घूस लेकर 150 से ज्यादा बीएड एवं दूसरे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को गलत तरह से मान्यता देने की बात सामने आई। भवनों के ठेकों से लेकर नियुक्तियों में अनियमितताओं की बात सामने आई।
सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक प्रो. हरेंद्र सिंह बालियान की एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करने का मामला भी संज्ञान में आया था। संदीप पहल ने बताया कि राजभवन ने आरपी सिंह को दोषी मानते हुये 27 जून 2005 को उनकी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आरपी सिंह को बर्खास्त किया था, जिसके खिलाफ वह हाईकोर्ट गये, जहां पर उनकी दायर याचिका कोर्ट ने सबूत और गंभीर आरोपों के चलते खारिज की थी। इनके खिलाफ विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई, लेकिन राजनीति संरक्षण के चलते आज तक कुछ नहीं हुआ।
ये बोले-संदीप पहल एडवोकेट
कुलपति जैसे गरिमामय पद पर रहते हुये रिश्वत लेकर कालेजों को फर्जी मान्यता, फर्जी निर्माण, नियुक्तियां, सीपीएमटी की परीक्षाओं में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने आरपी सिंह पर ईडी का शिकंजा देर से ही सही, लेकिन कसा तो सही। ईडी की निष्पक्ष कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले कुलपति और उनके सहयोगियों पर कड़ी कार्रवाई करें यही उनका लक्ष्य है।

