- भारी संख्या में पहुंचे कांवड़ियों ने प्रख्यात बाबा औघड़नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: श्रावण मास की शिवरात्रि से एक दिन पूर्व त्रियोदशी पर भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। भारी संख्या में पहुंचे कांवड़ियों ने प्रख्यात बाबा औघड़नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया। इस अवसर पर शिवालयों में पूजा-अर्चना के साथ कांवड़ियों और शिवभक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इस बीच मंदिरों में लंबी-लंबी लाइनें देखी गर्इं।
बाबा औघड़नाथ मंदिर में त्रियोदशी के अवसर पर भारी संख्या में उमड़े कांवड़ियों ने कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते हुए जलाभिषेक किया। मंदिर कमेटी की ओर से की गई विशेष व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा औघड़नाथ के दर्शन करते हुए पूजा-अर्चना के साथ जलाभिषेक किया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सतीश सिंहल, प्रबंधक दिनेश मित्तल, मंत्री सुनील गोयल समेत कमेटी के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने व्यवस्था में सहयोग किया। मंदिर परिसर में पुलिस फोर्स के साथ-साथ मंदिर कमेटी की ओर से वालियंटर्स की व्यवस्था भी कराई गई।
मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीधर त्रिपाठी ने आरती और पूजन कराया। इस अवसर पर एटीएस के साथ-साथ आरएएफ, पीएसी और पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे। सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन कैमरों की मदद से भी निगरानी की गई। मंदिर के बारि विभिन्न संस्थाओं और संगठनों की ओर से कैंप लगाकर कांवड़ियों की सेवा की गई। वहीं, मुख्य मार्ग पर शिवरात्रि मेले का आयोजन भी किया गया।

इनके अलावा सदर स्थित बिलेश्वर नाथ मंदिर, झारखंडी मंदिर, छत्ता अनंतराम मंदिर, नई सड़क स्थित भोलेश्वर मंदिर, मोहनपुरी स्थित दयालेश्वर मंदिर, पर्ल सोसायटी स्थित रामेश्वर धाम, सुपरटेक स्थित विश्वनाथ महादेव मंदिर, शास्त्रीनगर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर समेत सभी शिवालयों में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना करते हुए भगवान शिव को जल अर्पित किया। पुजारियों ने बताया कि शिवरात्रि के अवसर पर जलाभिषेक शुक्रवार दोपहर बाद 3.26 बजे से शुरू होगा।
शिवरात्रि पर शुभ संयोग में जलाभिषेक से होगी शिवत्व की प्राप्ति
आज श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि रहेगी। इस तिथि पर सावन शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। ये दिन कांवड़ जल चढ़ाने के लिए भी शुभ होता है। इसके अलावा ज्यादातर श्रद्धालु सावन शिवरात्रि पर ही रुद्राभिषेक भी कराते हैं। शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
सावन शिवरात्रि चार प्रहर पूजा समय
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के चैप्टर चेयरमैन ज्योतिषाचार्य आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि इस दिन प्रथम प्रहर की पूजा 2 अगस्त को शाम 7.11 से शुरू होगी 09.49 तक हो सकेगी। दूसरे प्रहर की पूजा रात 09.49 से 3 अगस्त को सुबह 12.27 तक हो सकेगी। तीसरे प्रहर की पूजा सुबह 12.27 से 03.06 तक हो सकेगी। चौथे प्रहर की पूजा सुबह 03.06 से 05.44 तक हो सकेगी। सावन शिवरात्रि व्रत का पारण 03 अगस्त को 05.44 से दोपहर 03.49 तक किया जा सकता है। 03 अगस्त को निशित काल पूजा का समय 12.06 से 12.49 तक रहेगी।
सावन माह की शिवरात्रि व्रत का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 02 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर प्रारंभ होगी और इसके अगले दिन 03 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में सावन शिवरात्रि का पर्व 02 अगस्त को मनाया जाएगा।
बिल्व पत्र के साथ करें शिव पूजा
शिवपुराण में बिल्व वृक्ष को शिवजी का ही रूप बताया गया है। इसे श्रीवृक्ष भी कहते हैं। श्री देवी लक्ष्मी का ही एक नाम है। इस कारण बिल्व की पूजा से लक्ष्मी जी की भी कृपा मिलती है। शिव पूजा में बिल्व पत्र का महत्व काफी अधिक है। इन पत्तों के बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है। बिल्व पत्रों से शिवलिंग का श्रृंगार करना चाहिए। भोग लगाते समय भी प्रसाद के साथ बिल्व पत्र रखे जाते हैं।
सावन शिवरात्रि चार प्रहर पूजा मुहूर्त
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय-सायं 07:11-रात्रि 09:49 तक (2 अगस्त)
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय-रात्रि 09:49-रात्रि 12:27 तक (3 अगस्त)
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय-रात्रि 12:27-प्रात: 03:06 तक (3 अगस्त)
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय-प्रात: 03:06-प्रात: 05:44 तक (3 अगस्त)
निशित काल मुहूर्त
- रात्रि-12:06-रात्रि 12:49 तक (3 अगस्त)
- शिवरात्रि पारण समय-प्रात: 05:44-दोपहर 03:49 तक (3 अगस्त)

