- चिकित्सकों और स्टाफ पर उपचार न करने के आरोप
- कमिश्नर से जताई नाराजगी, उचित उपचार के दिए निर्देश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. ने गुरुवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने एनआरसी, आईसीयू व इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण किया। सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनआरसी वार्ड में देहात से आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा बच्चों को भर्ती न कराने पर भी नाराजगी जताई। कमिश्नर के सामने मरीजों व तीमारदारों ने हंगामा किया। उन्होंने चिकित्सकों व स्टाफ पर उपचार न करने के आरोप जड़े। कमिश्नर ने नाराजगी जताई और मरीजों को उचित उपचार करने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त गुरुवार सुबह जिला अस्पताल पहुंची तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में चिकित्सक अपने कक्षों में पहुंचे और मरीजों को देखने में जुट गए। मंडलायुक्त पोषण पुनर्वास केन्द्र पहुंची। उन्होंने वहां 10 बेड में से नौ बेड पर बच्चों को देखा। उनके तीमारदारों से उपचार के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उक्त वार्ड से रिलीव हो चुके बच्चों का रिकार्ड रजिस्टर में चेक किया और एक तीमारदार को मोबाइल पर काल करके बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। एक मरीज ने बताया कि उन्हें दोबारा बच्चे को भर्ती करना पड़ा। मंडलायुक्त ने सीएमएस से जवाब तलब किया।
उन्होंने बताया कि बच्चा अस्पताल में ठीक होकर घर गया था, लेकिन घर पर उसे समय पर दवाई नहीं दी गई और परहेज नहीं कराया गया, जिस कारण उसकी तबीयत खराब हुई। उन्होंने चिकित्सकों को रिलीव करने से पहले परिजनों को मरीज को घर लेकर उसे कैसे दवाई देनी है और क्या परहेज करना है, जागरूक करें, ताकि वे जल्दी स्वस्थ हो सकें। उन्होंने आईसीयू वार्ड का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने तीन मरीज भर्ती पाए। किसी के भी आॅक्सीजन नहीं लगा था। उन्होंने पूछा कि आॅक्सीजन नहीं चल रहा। बताया गया कि आॅक्सीजन प्लांट चल रहा है।
कमिश्नर से एक बेड पर लगे मॉनिटर चलवाकर आॅक्सीजन की रीडिंग देखी। उन्होंने आॅक्सीजन आॅडिट होने के बारे में पूछा। स्टाफ ने बताया कि आॅडिट नहीं यहां एएमसी होता है। कमिश्नर ने आॅक्सीजन आॅडिट कराने के निर्देश दिए। कमिश्नर जब इमरजेंसी वार्ड जा रही थीं तो जहां पर्ची बनती है, वहां मरीजों व तीमारदारों ने उन्हें घेर लिया और हंगामा किया। उन्होंने चिकित्सकों व स्टाफ पर उपचार न करने के आरोप लगाए। अफसाना निवासी पचपेड़ा ने कमिश्नर को बताया कि उनका पुत्र आसिफ को कल पेट दर्द बताकर भर्ती किया गया था, पर न तो उन्हें चिकित्सक देख रहे, न ही उन्हें उपचार दिया जा रहा।
उन्हें कभी 22 नंबर में कभी एक नंबर में चक्कर कटाए जा रहे। वार्ड में डाक्टर राउंड पर नहीं आते। सरोज निवासी छज्जीपुर ने कहा कि मारपीट में उसका हाथ तोड़ दिया गया। उनका प्लास्टर नहीं किया गया। इन्द्रजीत निवासी मखदूमपुर ने बताया कि झगड़े में उनका पुत्र कृष्ण घायल हुआ था। वह अस्पताल में भर्ती है, उसे न तो दवाई दी जा रही, न ही ड्रिप लगाई जा रही। इस दौरान कार्यवाहक अपर निदेशक डा. राजेन्द्र सिंह, सीएमओ डा. अशोक कटारिया, एसआईसी डा. सुदेश कुमारी, सीएमएम डा. कौशलेन्द्र और आयुष्मान भारत के मंडल कोआर्डिनेटर काशिफ परवेज मौजूद रहे।
मंडलायुक्त ने बच्चों को दिए खिलौने
जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती बच्चों को मंडलायुक्त ने खिलौने दिए। खिलौने पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। बच्चों व तीमारदारों ने उनका आभार जताया।
आनन-फानन में आॅक्सीजन प्लांट चालू किया
जिला अस्पताल में कई माह से आॅक्सीजन प्लांट बंद है। कमिश्नर के पहुंचते ही आनन-फानन में आॅक्सीजन प्लांट को चालू किया गया।

