Thursday, June 4, 2026
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मंत्री से शिकायत के बाद भी चेकिंग के नाम पर खुली लूट

  • चौराहों पर चेकिंग के अलावा वाहनों से उगाही भी होमगार्ड की ड्यूटी में शामिल
  • जब तक जेब ढीली नहीं, तब तक चौराहा पार करने की इजाजत नहीं
  • वाहनों में मरीज और महिला बच्चों तक की नहीं की जाती लिहाज

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रभारी मंत्री से भाजपाइयों की शिकायत के बाद भी महानगर के चौराहों पर वाहन चेकिंग के नाम पर खाकी की लूट रुकने का नाम नहीं ले रही है। चेकिंग के नाम पर लूट का पूरा जिम्मा होमगार्ड का होता है। दरअसल, चौराहों पर ड्यूटी करने वाले ट्रैफिक दूसरे पुलिस कर्मी बेहद सावधानी से यह संगठित लूट कराते हैं।

खुद और नौकरी को सुरक्षित कर पूरी जिम्मेदारी होमगार्ड के कंधों पर डाल देते हैं। ताकि यदि कभी कोई सवा सेर मिल जाए तो होमगार्ड को बलि का बकरा बना दिया जाए। शहर के कई चौराहे तो इस लूट के लिए मेरठ ही नहीं आपसास के जनपदों तक में खासे बदनाम हैं।

जो चालक अपने वाहन टैक्सी के तौर पर चलाते हैं वो अपने साथियों को शहर के कुछ खास चौराहों से बेहद संभल कर निकलने की हिदायत देने से नहीं चूकते। अफसर भले की कुछ भी दावें करें, लेकिन वाहनों से चेकिंग के नाम पर उगाही से इनकार के अफसरों के दावे सच्चाई से बहुत परे हैं।

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उगाही ड्यूटी का पार्ट

ट्रैफिक पुलिस के साथ चौराहों पर ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड के लिए अब वाहनों से उगाही किया जाना उनकी ड्यूटी का हिस्सा बना दिया गया है। हालत ये हो गयी है कि चौराहे पर यातायात नियंत्रित करने के नाम पर खड़ा होने वाला होमगार्ड के जवान का सारा ध्यान उन वाहनों पर होता है जिनसे उगाही की जा सके।

ये वाहन होते हैं रडार पर

चौराहों पर ड्यूटी करने वालों होमगार्ड के रडार पर आमतौर पर वो वाहन होते हैं, जिन पर बाहरी नंबर होता है। मसलन मेरठ से बाहर के वाहन पर इनकी गिद्ध दृष्टि होती है। क्या मजाल जो कोई भी बाहरी वाहन इनकी मर्जी के बगैर चौराहा पार भी कर जाए। भाग कर उसको पकड़ना। सब कुछ पेपर पूरे होने के बावजूद कोई न कोई कमी निकाल कर चालान की धमकी देना और फिर सेटिंग-गेटिंग का खेल, इस काम में ये होमगार्ड पूरी तरह से माहिर होते हैं।

मरीज, औरतों और बच्चों का भी लिहाज नहीं

चौराहों पर चेकिंग के नाम पर तो कई बार इंसानियत को तार-तार कर दिया जाता है। कई वाहन ऐसे होते हैं, जिनके कागजों में कमियां होती हैं। ऐसे कुछ वाहनों में कई बार मरीज, औरते और बच्चे होते हैं। मरीज की हालात बेहद नाजुक होती है, लेकिन सबकुछ देखे जानने के बाद भी जब तक जेब ढीली नहीं करावा लेते, तब तक जाने नहीं देते।

चौराहे पर ड्यूटी के लिए चढ़ाया जाता है चढ़ावा

जो होमगार्ड चौराहों पर ड्यूटी लगवाते हैं, उन्हें भी पहले चढ़ावा देना होता है। उगाही के लिए खास बदनाम चौराहों पर ड्यूटी के लिए तय रेट से कुछ ज्यादा का रिवाज सुना जाता है। उगाही के लिए जैसे चौराहा उसके अनुसार ड्यूटी का दाम देना होता है।

उगाही के लिए सबसे बदनाम चौराहे

वाहनों से उगाही के लिए बदनाम चौराहों की यदि बात की जाए तो ऐसे चौराहों में सबसे पहला नंबर रुड़की रोड स्थित गांधी बाग चौराहा है। इस चौराहे के अलावा इससे सटा एक बड़ा इलाका भी टैÑफिक स्टाफ के लिए उगाही की लिहाज से बेहद मुफीद समझ जाता है। यहां बाकायदा फिल्डिंग सजाकर शिकार फंसने का काम स्टाफ करता है।

अन्य चौराहे जो हैं बदनाम

बेगमपुल चौराहा, हापुड़ स्टैंड चौराहा, जेल रोड चौराहा, आयुक्त आवास चौराहा, लालकुर्ती पैंठ एरिया चौराहा भी उगाही के लिए बेहद बदनाम चौराहों में शामिल है। तेजगढ़ी चौराहा भी ऐसे ही चौराहों में शामिल किया जाता है। रेलवे रोड डीएन कालेज चौराहा, मेट्रो प्लाजा चौराहा आदि करीब दो दर्जन ऐसे चौराहे हैं जो वाहनोें से उगाही के मामले में स्टाफ की फर्स्ट च्वाइस माने जाते हैं।

लूट के लिए वर्दी से छूट

वाहनों से उगाही के लिए स्टाफ व होमगार्ड के जो जवान खासे बदनाम हैं, उन्हें वाहनों से उगाही के नाम पर की जाने वाली लूट के लिए वर्दी से छूट हासिल होती है। रुड़की रोड तथा महानगर के ऐसे ही बाहरी इलाकों की यदि बात की जाए तो सुबह सवेरे बगैर वर्दी वाला स्टाफ वाहनों से चेकिंग के नाम पर लूट करता अक्सर देखा जा सकता है।

खुद लेंगे जायजा

एसपी ट्रैफिक ने बताया कि इस तरह के मामले की जांच व खुद करेंगे। अपनी प्राइवेट गाड़ी से सादी वर्दी में पूरे महानगर में तमाम चौराहों पर जाएंगे। वहां देखेंगे टैÑफिक का स्टाफ कैसे कार्य कर रहा है। यदि कोई खामी पायी गयी तो कार्रवाई तय समझें।

ये कहना है एसपी ट्रैफिक का

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इस संबंध में एसपी ट्रैफिक जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि ये बात उनकी जानकारी में नहीं है। यदि कोई शिकायत मिलती है तो जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।

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